धान की खरीददारी न होने से बिहार के किसान परेशान

पटना, 18 फरवरी (आईएएनएस)। बिहार के तमाम किसान धान की खरीददारी न होने से चिंतित हैं। सुरिंदर महतो उनमें से एक हैं। उन्होंने पिछले वर्ष पूरे सूखे के दौरान कड़ी मेहनत की थी, ताकि उनकी धान की फसल पर सूखे का असर न पड़े। लेकिन अब वह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि धान का भंडार उनकी झोपड़ी में पड़ा हुआ है और उसका खरीददार कोई नहीं है।

महतो ने कहा, "मैं अपनी फसल बिकने का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण मैं स्थानीय व्यापारियों को किसी भी दर पर फसल बेचने को मजबूर हूं।"

केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय एजेंसियों ने अभी तक मात्र लगभग 283,000 टन धान की खरीददारी की है, जबकि यह मात्रा निर्धारित लक्ष्य 10.50 लाख टन से काफी कम है। खरीफ का मौसम दिसम्बर के साथ ही समाप्त हो चुका है, और खरीददारी दो-तीन महीनों तक और चलेगी।

बिहार कृषि विभाग के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "पिछले साढ़े तीन महीने से जब से खरीददारी शुरू हुई है, सरकारी एजेंसियों ने मात्र 283,000 टन धान की ही खरीददारी की है, जो कि अबतक का खरीददारी का सबसे खराब रिकॉर्ड है।"

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सरकारी एजेंसियों ने देश में हुई धान की कुल खरीददारी के एक प्रतिशत से भी कम की खरीददारी की है।

एक अधिकारी ने कहा, "देश भर में लगभग 2.54 करोड़ टन धान की खरीददारी हुई है, लेकिन इसमें बिहार की हिस्सेदारी उम्मीद से कम है।"

राज्य में पिछले वर्ष 11 लाख टन धान की रिकॉर्ड खरीददारी हुई थी।

खासतौर से किसानों के लिए यह स्थिति गम्भीर है, क्योंकि राज्य में 2010 में लगातार दूसरे साल सूखा पड़ा है और किसानों को उम्मीद थी कि फसल की अच्छी कीमत मिलने से उनका खर्च निकल आएगा।

बिहार सरकार ने खराब बारिश के कारण अगस्त में सभी 38 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया था। खराब बारिश के कारण अररिया, पूर्वी एवं पश्चिमी चम्पारन को छोड़कर बाकी अधिकांश जिलों में धान की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

सामान्यतौर पर प्रति वर्ष बिहार में 45 से 50 लाख टन धान की पैदावार होती है। लेकिन इस वर्ष धान की पैदावार 30 लाख टन से कम होने की सम्भावना है, जबकि पिछले वर्ष राज्य में 34 लाख टन धान पैदा हुआ था।

लेकिन यह कम पैदावार भी एजेंसियों द्वारा खरीदी गई मात्रा से बहुत अधिक है।

खुले बाजार में धान की बिक्री किसानों के लिए लाभकारी नहीं है, क्योंकि बाजार की कीमत, सरकारी कीमत से न केवल कम है, बल्कि इससे उन्हें स्थानीय व्यापारियों और बिचौलियों की दया पर निर्भर रहना पड़ता है।

रोहतास जिले के एक किसान मुकेश राय ने कहा, "सरकार की रणनीति हमारी समझ से परे है।"

ज्ञात हो कि भारतीय खाद्य निगम ने 45,000 टन धान की खरीददारी की है, बिहार राज्य सहकारी विपणन संघ लिमिटेड ने 100,000 धान की खरीददारी की है और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन परिसंघ लिमिटेड (नाफेड) ने 60,000 टन धान खरीदे हैं।

बिहार की बनिस्बत पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश में सरकारी एजेसियों ने अब तक धान की रिकॉर्ड (2.31 करोड़ टन) खरीददारी की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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