इसरो और देवास की करार पर जांच समिति (राउंडअप)

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने नई दिल्ली में पत्रकारों को बताया, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया है। यह आयोग एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।"

ज्ञात हो कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अधीन है। उन्होंने जांच समिति में योजना आयोग के सदस्य एवं पूर्व कैबिनेट सचिव बी.के. चतुर्वेदी और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य एवं एयरोस्पेस विशेषज्ञ रोद्दम नरसिम्हा को शामिल किया है।

करार की जांच के लिए गठित जांच समिति को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मामले की लीपापोती का एक प्रयास बताया है।

पार्टी की प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने उल्लेख करते हुए कहा कि विवादास्पद समझौते को जब मंजूरी दी गई, चतुर्वेदी उस समय कैबिनेट सचिव थे। उन्होंने कहा कि जांच समिति में उनकी नियुक्ति 'जांच के पूरे उद्देश्य को विफल करने वाली है।'

इसरो ने बेंगलुरू में एक बयान में कहा, "जांच समिति संगठन की वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए करार के तकनीकी, व्यावसायिक, प्रक्रियात्मक और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा करेगी।"

बयान के मुताबिक, "जांच समिति एंट्रिक्स, इसरो एवं अंतरिक्ष विभाग द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं और अनुमोदन प्रक्रियाओं की उपयुक्तता की समीक्षा करेगी। समिति सुधार और परिवर्तन की सलाह देगी।"

ज्ञात हो कि करार की जांच कराने की घोषणा से पहले इसरो ने जोर देकर कहा कि एंट्रिक्स के पास अधिकार है कि वह बेंगलुरू की कम्पनी देवास को अग्रिम कीमत 58.37 करोड़ रुपये का भुगतान कर करार को निरस्त कर दे।

देवास ने हालांकि कहा कि एंट्रिक्स के साथ उसका करार गत 28 जनवरी 2005 को हुआ और यह 'कानूनी रूप से बाध्यकारी' है।

कम्पनी के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामचंद्रन विश्वनाथन ने बेंगलुरू में एक बयान में कहा, "देवास ने पिछले छह सालों में करार से जुड़े अपने सभी दायित्वों का निवर्हन किया है और अब कम्पनी अनुबंधित अंतरिक्ष स्पेक्ट्रम क्षमता को उपलब्ध कराए जाने की प्रतीक्षा कर रही है।

उन्होंने कहा, "इसे कम्पनी को उपलब्ध कराने में दो वर्षो से अधिक की देरी हो चुकी है।"

देवास के अध्यक्ष इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सचिव और वर्ष 1988 से 1997 तक संगठन के उच्च प्रबंधन परिषद के सदस्य रहे एम.जी. चंद्रशेखर हैं।

उल्लेखनीय है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने संकेत दिया है कि एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए करार से देश के राजस्व को करीब दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सीएजी की रिपोर्ट के मद्देनजर सरकार ने जांच समिति गठित करने का फैसला किया।

सरकार ने हालांकि किसी तरह के राजस्व के नुकसान से इंकार किया है और सीएजी ने कहा कि उसके निष्कर्ष अंतिम नहीं हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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