2जी स्पेक्ट्रम घोटाला : विशेष अदालत गठित करने की सर्वोच्च न्यायालय की सलाह (लीड-1)
न्यायमूर्ति जी. एस. सिंघवी और न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने कहा, "हम चाहेंगे कि इस मामले को तार्किक परिणाम तक पहुंचाया जाए। हम यह भी चाहेंगे कि तकनीकी खामियों के चलते इसे लेकर निराशा न पनपे।"
न्यायालय ने कहा, "2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले पर एक विशेष न्यायालय गठित करने की दी गई सलाह पर सरकार न्यायालय को सूचित करेगी। सर्वोच्च न्यायालय के अलावा कोई अन्य न्यायालय इस विशेष अदालत की कार्यवाहियों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।"
2जी स्पेक्ट्रम का लाइसेंस दूरसंचार कम्पनियों को आवंटित करने में लिए गए गलत निर्णयों की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने न्यायालय में अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल की थी। स्थिति रिपोर्ट पर विचार करते हुए न्यायालय ने सरकार को अपनी यह सलाह दी।
न्यायालय ने कहा कि इस मामले को सीबीआई अदालतों के हवाले करने से कोई लाभ नहीं होगा और इससे पूरा उद्देश्य विफल हो जाएगा क्योंकि जांच एजेंसी की अदालतों के पास पहले से ही बहुत मामले विचाराधीन हैं।
इस मामले में सरकार का पक्ष रखने वाले महान्यायवादी जी. वाहनवती ने न्यायालय को बताया कि वह इस मामले को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष ले जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि यदि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत गठित होती है तो यह अपने तरह की दूसरी अदालत होगी। इसके पहले वर्ष 1992 में प्रतिभूति घोटाले मामले की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय का गठन हो चुका है।
अदालत ने सीबीआई को अपनी जांच और घोटाले के लाभार्थियों का पता लगाने की कोशिश जारी रखने को कहा।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि वह 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 31 मार्च को आरोपपत्र दाखिल करेगी जबकि 2001-2006 तक की जांच के सवाल पर 31 मई को वह आरोप पत्र दाखिल करेगी।
इस मामले की अगली सुनवाई एक मार्च को होगी, जिसमें महान्यायवादी जी. वाहनवती अदालत को विशेष अदालत गठित करने के सिलसिले में सरकार के रुख से अवगत कराएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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