सेन की जमानत याचिका पर गुरुवार को फैसला (लीड-1)
गत 24 दिसम्बर को रायपुर की निचली अदालत ने राष्ट्रद्रोह के आरोप पर सेन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सेन पर नक्सली विचारक नारायण सान्याल के साथ सम्पर्क रखने का आरोप है। उन्हें रायपुर की जेल में रखा गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता किशोर भादुरी ने बुधवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.पी. शर्मा और न्यायमूर्ति आर.एल. झंवर की खंडपीठ को बताया कि सेन का नक्सलियों के साथ गहरा सम्बंध है।
उन्होंने कहा कि सेन के पास से बरामद दस्तावेज और अन्य साक्ष्य 'निचली अदालत द्वारा उन्हें दी गई सजा को निरस्त न करने के' लिए पर्याप्त हैं।
अभियोजन पक्ष के वकील ने दलील दी, "सेन पेशे से एक डॉक्टर हैं लेकिन तलाशी के दौरान उनके घर से जांच टीम को स्टेथोस्कोप, चिकित्सा से सम्बंधित कोई दस्तावेज अथवा डॉक्टरों के इस्तेमाल में सामान्य रूप से आने वाली कोई सामग्री नहीं मिली।"
वकील ने कहा, "निचली अदालत ने पहले ही सेन को राष्ट्रद्रोह के अपराध में सजा सुना चुकी है। जो दस्तावेज उनके पास से बरामद हुए और पूरी परिस्थितियों को ध्यान में रखने पर उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह के आरोप जायज हैं।"
बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि दूसरे दोषी पियूश गुहा जिसके पास से पुलिस ने आपत्तिजनक पत्र जब्त किया, उसने अपने बयान पुलिस हिरासत में दिए। इसलिए उसके बयानों को विश्वसनीय साक्ष्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।"
बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला गुरुवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
उल्लेखनीय है कि गत 24 जनवरी को प्रख्यात वकील राम जेठमलानी ने निचली अदालत के फैसले में खामियों का हवाला देकर सेन की जमानत की मांग की।
उन्होंने सेन की सजा को 'बिना साक्ष्यों वाला मुकदमा' और 'राजनीतिक अभियोजन' करार दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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