देशभर में रहा वसंत पंचमी का उल्लास (राउंडअप)

नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। वसंत ऋतु के आगमन एवं ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना का त्योहार वसंत पंचमी मंगलवार को देशभर में उल्लास के साथ मनाई गई। श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में स्नान किया। खासकर इलाहाबाद के संगम तट तथा हरिद्वार की गंगा में लाखों लोगों ने डुबकी लगाई। बिहार, झारखण्ड व पश्चिम बंगाल में सरस्वती पूजा की धूम रही।

पंजाब और उत्तर प्रदेश की बात करें या पश्चिम बंगाल और बिहार की, वसंत पंचमी के इस त्योहार में पीले रंग का खास महत्व होता है। यही वजह है कि इस अवसर पर ज्यादातर लोग पीले परिधान पहनते हैं। इसी ऋतु में खेतों में सरसों के पीले-पीले फूल खिलने से वातावरण मनोरम हो जाता है।

इलाहबाद में गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती नदियों के मिलन स्थल संगम तट पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई जबकि हिमाचल प्रदेश के तात्पानी गर्म झरने पर भी लोग स्नान के लिए इकट्ठे हुए। इलाहाबाद जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया, "सुबह तड़के से शाम तक लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं।"

इलाहबाद के पुलिस उप-महानिरीक्षक राम कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि बसंत पंचमी के मौके पर भक्तों की भीड़ को देखते हुए संगम तट पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए।

इलाहबाद के अलावा प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर शहरों में श्रद्धालुओं ने पवित्र गोमती, रामगंगा, सरयू सहित अन्य नदियों में स्नान करके मंदिरों में पूजा-पाठ किया।

राधास्वामी सम्प्रदाय के लिए वसंत पंचमी का विशेष महत्व है, 150 साल पहले इसी दिन इस सम्प्रदाय की स्थापना हुई थी। इस अवसर पर आगरा में विशेष आयोजन हुआ। वहां दयालबाग में इस सम्प्रदाय के संस्थापक हुजूर महाराज की समाधि है। आगरा में इसी दिन 18वीं शताब्दी के शायर मियां नजीर अकबराबादी का जन्मदिन मनाया गया।

उत्तराखण्ड के विभिन्न भागों से आए करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने तीर्थ नगरी हरिद्वार की गंगा में डुबकी लगाई तथा विशेष रूप से देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की।

हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। जिलाधिकारी डा.आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि वसंत पंचमी पर अन्य कई राज्यों के लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने यहां गंगा स्नान किया।

सोमवार रात ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में हुई बारिश के बाद मंगलवार को मौसम साफ होने के कारण सुबह से ही हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया और दिन के समय चटख धूप निकलने के बाद संख्या में इजाफा होता गया।

वसंत पंचमी के अवसर पर अधिकांश क्षेत्रों में सभी वर्ग के लोग छतों पर पतंगबाजी का भी आनंद लेते दिखाई दिए।

उधर, ग्रामीण पंजाब में लोगों को सरसों के खेतों में इस त्योहार का आनंद लेते देखा गया। युवाओं और बच्चों ने पतंगबाजी में हिस्सा लिया। ज्यादातर पतंगें पीले रंग की थीं।

पश्चिम बंगाल में श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार व ढाक (विशेष वाद्य यंत्र) की थापों के बीच देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की। कई घरों में सरस्वती प्रतिमाएं बिठाई गईं तो कई पंडालों और शैक्षिक संस्थानों में भी उनकी पूजा की गई।

कोलकाता की एक कॉलेज छात्रा अनुषा मुखर्जी ने बताया, "पीले या केसरिया रंग के वस्त्र पहनकर हमने देवी सरस्वती का आशीर्वाद लिया। इस दिन किताबें न छूने की परम्परा है।"

दरअसल, इस दिन ज्यादातर बंगाल के लोग किताबों को देवी सरस्वती के आशीर्वाद के लिए उनकी प्रतिमा के आगे रखते हैं। कई बच्चे इस दिन अपना पहला अक्षर लिखते हैं।

पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड व अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश के तात्पानी में इकट्ठे हुए और उन्होंने वहां सल्फर के गर्म झरनों में स्नान किया।

बिलासपुर जिले में प्रसिद्ध सिख धार्मिक स्थल गुरु-का-लाहौर में एक मेले का आयोजन हुआ। ऐसी मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन सिख गुरु गोबिंद सिंह का विवाह हुआ था।

झारखण्ड में इस दिन शासकीय अवकाश होता है। वहां जनजातीय छात्रों ने चंदा इकट्ठा कर देवी सरस्वती की पूजा की और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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