'दक्षिण भारत अब वाहन पुर्जो का प्रमुख उत्पादन केंद्र'

एक सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि जापानी कम्पनियां लगातार वाहनों के सस्ते उत्पादन केंद्रों की खोज करती रहती हैं और जापानी मुद्रा का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मूल्य भी बढ़ रहा है।

वाहनों के कल-पुजोर्ं की खरीददारी पर एक सेमिनार और कुछ जापानी कम्पनियों के साथ 'बिजनेस-टू-बिजनेस' बैठक का अयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), जापान एक्स्टर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जेट्रो) और ऑटोमोटिव कम्पोनेंट मैन्युफैक्च र्स एसोसिएशन (एसीएमए) ने किया था।

चेन्नई में जेट्रो के महानिदेशक शिन्या फुजी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि उनके सर्वेक्षण के मुताबिक 86 फीसदी जापानी कम्पनियां भारत में अपने कारोबार का विस्तार कर सकती हैं। उनमें से 83.5 फीसदी कम्पनियां स्थानीय बाजार से खरीददारी बढ़ाएंगी। भारतीय कारोबारियों के लिए यह एक बेहतरीन अवसर होगा।

उकाल ऑटो की प्रबंध निदेशक गायथ्री श्रीराम ने कहा कि अभी सस्ता उत्पादन करने वाले देशों से लगभग 65 अरब डॉलर के कल-पुजोर्ं की खरीददारी हो रही है, जिसके 2015 तक बढ़कर 375 अरब डॉलर हो जाने की सम्भावना है।

उन्होंने कहा कि भारत में तैयार होने वाले वाहन के कल पुर्जो में से 20 फीसदी का उत्पादन तीन कम्पनियों द्वारा किया जाता है। ये कम्पनियां हैं टीवीएस, राने और अमलगेमेशन और इन तीनों का मुख्यालय चेन्नई में है।

एसीएमए के दक्षिणी क्षेत्र के अध्यक्ष हरीश लखमन ने कहा कि अगले दशक में वाहनों और वाहनों के कल-पुजोर्ं के क्षेत्र में उभरते बाजार वैश्विक बाजार की अगुआई करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में वाहनों का उत्पादन 2009 की तुलना में 2020 में बढ़कर तीन गुना हो जाएगा।

लखमन ने कहा कि भारत में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियां अपना विस्तार कर रही हैं। यह भारत के 22 अरब डॉलर के वाहन सम्बंधी कल-पुर्जो के बाजार के लिए एक अच्छी खबर है। उन्होंने कहा कि 2020 तक यह उद्योग बढ़कर 110 अरब डॉलर का हो जाएगा। उस समय तक इस क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 26 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

लखमन ने कहा कि टाटा मोटर्स की नैनो कार बनने के कारण कल-पुर्जे बनाने वाली कम्पनियों ने 37 पेटेंट के लिए आवेदन किए हैं। इससे भारत के कल-पुर्जे निर्माता कम्पनियों की क्षमता का पता चलता है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में अधिकतर कल-पुर्जे निर्माता कम्पनियों को गुणवत्ता के प्रमाणपत्र मिले हुए हैं और तमिलनाडु की आठ कम्पनियों ने डेमिंग मेडल (गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए मेडल) हासिल किए हुए हैं।

इंडिया पिस्टंस के समूह प्रौद्योगिकी निदेशक आर. महादेवन ने कहा कि भारत की 728 कल-पुर्जे निर्माता कम्पनियों में से 250 कम्पनियां चेन्नई-होसुर-बेंगलुरू क्षेत्र में हैं और 35 फीसदी कल-पुर्जो का उत्पादन करती हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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