भूखंड आवंटन में स्वामी के आरोपों से करुणानिधि का इंकार
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि आवासीय भूखंड और कमरों के आवंटन के लिए विवेकाधीन कोटे की शुरुआत वर्ष 1979 में ऑल इंडिया अन्ना द्रमुक मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) सरकार के समय शुरू हुई।
करुणानिधि ने कहा कि एआईएडीएमके सरकार (1991 से 96 ) के दौरान इस कोटे को पांच पतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि विवेकाधीन कोटे के तहत भूखंडों का आवंटन एआईएडीएमके नेताओं के नजदीकी रिश्तेदारों, भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा के अधिकारियों और अन्य लोगों के बीच किया गया।
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री द्वारा अपने विवेकाधीन कोटे के तहत तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड (टीएनएचबी) के भूखंडों का आवंटन करने पर स्वामी ने उनके खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी देने के लिए राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला को आवेदन दिया है।
स्वामी के इस आवेदन पर मीडिया में आई रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री विधानसभा में अपना बयान दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि टीएनएचबी के भूखंडों अथवा कमरों का 85 प्रतिशत आवंटन नीलामी के जरिए किया गया और शेष 15 प्रतिशत भूखंडों अथवा कमरों का आवंटन सरकार ने अपने विवेकाधीन कोटे के तहत किया।
उन्होंने कहा कि विवेकाधीन कोटे के तहत राज्य में भूखंडों का आवंटन लंबे समय से किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक स्वामी ने कहा है कि विवेकाधीन कोटे के तहत भूखंडों और कमरों के आवंटन में विसंगतियां अपनाई गई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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