देशभर में धूमधाम से मनाई गई वसंत पंचमी (लीड-1)
पंजाब और उत्तर प्रदेश की बात करें या पश्चिम बंगाल और बिहार की वसंत पंचमी के इस त्योहार में पीले रंग का खास महत्व होता है। यही वजह है कि इस अवसर पर ज्यादातर लोग पीले परिधान पहनते हैं।
इलाहबाद में गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती नदियों के मिलन स्थल संगम तट पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई जबकि हिमाचल प्रदेश के तात्पानी गर्म झरने पर भी लोग स्नान के लिए इकट्ठे हुए।
इलाहाबाद जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया, "सुबह तड़के से लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं।"
ग्रामीण पंजाब में लोगों को सरसों के खेतों में इस त्योहार का आनंद लेते देखा गया। युवाओं और बच्चों ने पतंगबाजी में हिस्सा लिया। ज्यादातर पतंगें पीले रंग की थीं।
पश्चिम बंगाल में श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार व ढाक (विशेष वाद्य यंत्र) की थापों के बीच देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की। कई घरों में सरस्वती प्रतिमाएं बिठाई गईं तो कई पंडालों और शैक्षिक संस्थानों में भी उनकी पूजा की गई।
कोलकाता की एक कॉलेज छात्रा अनुषा मुखर्जी ने बताया, "पीले या केसरिया रंग के वस्त्र पहनकर हमने देवी सरस्वती का आशीर्वाद लिया। इस दिन किताबें न छूने की परम्परा है।"
दरअसल इस दिन ज्यादातर बंगाली किताबों को देवी सरस्वती के आशीर्वाद के लिए उनकी प्रतिमा के आगे रखते हैं। कई बच्चे इस दिन अपना पहला अक्षर लिखते हैं।
पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड व अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश के तात्पानी में इकट्ठे हुए और उन्होंने वहां सल्फर के गर्म झरनों में स्नान किया।
बिलासपुर जिले में प्रसिद्ध सिख धार्मिक स्थल गुरु-का-लाहौर में एक मेले का आयोजन हुआ। ऐसी मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन सिख गुरु गोबिंद सिंह का विवाह हुआ था।
झारखण्ड में इस दिन शासकीय अवकाश होता है। वहां जनजातीय छात्रों ने चंदा इकट्ठा कर देवी सरस्वती की पूजा की।
राधास्वामी सम्प्रदाय के लिए वसंत पंचमी का विशेष महत्व है, 150 साल पहले इसी दिन इस सम्प्रदाय की स्थापना हुई थी। इस अवसर पर आगरा में विशेष आयोजन हुआ। वहां दयालबाग में इस सम्प्रदाय के संस्थापक हुजूर महाराज की समाधि है। आगरा में इसी दिन 18वीं शताब्दी के शायर मियां नजीर अकबराबादी का जन्मदिन मनाया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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