आरुषि मामले में क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला बुधवार को (लीड-1)
सीबीआई ने अदालत में कहा कि इस मामले में उसे कोई ठोस सबूत नहीं मिल पाया है, लिहाजा इस मामले को बंद करना ही एक मात्र विकल्प है।
सीबीआई के वकील आर.के.सैनी ने अदालत से कहा, "दीवार पर पाए गए हाथ और अंगुलियों के निशान को भी फोरेंसिक प्रयोगशाला सत्यापित नहीं कर सकी है।"
सैनी ने कहा, "तलवार दम्पति ने जांच में सहयोग नहीं किया और सीबीआई को कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इसलिए सीबीआई के पास मामले को बंद करने की रिपोर्ट सौंपने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था।"
सैनी ने अदालत से मामले की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करने का अनुरोध किया।
दूसरी ओर राजेश तलवार के वकील सतीश टमटा ने अदालत से अनुरोध किया कि वह इस मामले को बंद करने वाली सीबीआई की याचिका स्वीकार न करे।
टमटा ने कहा कि जांच एजेंसी ने पूर्ण तथ्य एवं सबूत अदालत में नहीं प्रस्तुत किए थे। उन्होंने कहा कि आरुषि की भी नृशंस हत्या की गई थी और तलवार के नौकर हेमराज की भी नृशंस हत्या की गई थी।
टमटा ने कहा कि इस तरह वे "पीड़ित पक्ष हैं"। "इसलिए क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।"
तलवार के वकील ने कहा कि दीवार पर पाए गए अंगुलियों के निशान के लिए एक लो काउंट का डीएनए परीक्षण कराया जना चाहिए।
ज्ञात हो कि आरुषि (14) की, नोएडा के जलवायु विहार स्थित उसके माता-पिता के घर में 16 मई, 2008 को रहस्यमय स्थितियों में हत्या कर दी गई थी। शुरू में उसके घरेलू नौकर हेमराज पर हत्या का शक था। लेकिन एक दिन बाद फ्लैट की छत पर हेमराज का शव पाया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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