ईरान को पैसा जर्मन बैंक के ज़रिए

ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है.
एक महीने से ज़्यादा से चल रही अनिश्चितता के बाद भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल के व्यापार के लिए यूरो मुद्रा के इस्तेमाल के लिए समझौता हो गया.
भारत अब ईरान को कच्चे तेल की कीमत जर्मनी के एक बैंक के ज़रिए मुहैया करवाएगा.
सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है. भारत में ईरान से हर महीने एक करोड़ बीस लाख बैरल तेल का आयात होता है.
ये अनिश्चितता की स्थिति तब बनी जब भारतीय रिज़र्व बैंक ने एशियन क्लीयरिंग यूनियन नामक उस वित्तीय संगठन पर रोक लगा दी जिसके ज़रिए अब तक भुगतान होता था.
लेकिन अमरीका का मानना है कि इस संगठन का इस्तेमाल ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए कर रहा है.
मीडिया को दिए बयान में अधिकारियों का कहना है कि नए समझौते के तहत भारतीय तेल कंपनियों को अब जर्मनी में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की शाखा में पैसे जमा करवाने होंगे.
स्टेट बैंक उस पैसे को जर्मनी के ईआईएच बैंक में ट्रांसफ़र करेगा और फिर ये पैसा ईरान को मिलेगा.
रिज़र्व बैंक ने एशियन क्लीयरिंग यूनियन पर प्रतिबंध लगा दिया था.
वैसे ईआईएच भी उन बैंकों में से है जिनपर अमरीका ने ईरान के साथ व्यापार करने की वजह से प्रतिबंध लगा रखा है. अमरीका का आरोप है कि ये बैंक उन ईरानी कंपनियों की सहायता कर है जो ग़ैरकानूनी हथियारों के प्रसार में लगी हुई हैं.
लेकिन इस बैंक पर संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ का प्रतिबंध नहीं है. आशंका जताई जा रही है कि वाशिंगटन और दिल्ली के बीच इसे लेकर खटास पैदा हो सकती है.
वॉल स्ट्रीट जनरल अख़बार का कहना है कि न्यूयॉर्क, वाशिंगटन, शिकागो और लॉस एंजेलेस में स्थिति भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं पर भी अमरीकी क़ानून के तहत प्रतिबंध लगने का ख़तरा पैदा हो गया है.
भारतीय रिज़र्व बैंक ने जब एशियन क्लीयरिंग यूनियन पर प्रतिबंध लगाया तब ईरान का अरबों डॉलर भारत पर बकाया था. इसके बावजूद ईरान ने उधार पर भारत को तेल का निर्यात जारी रखा.
अब इस नए समझौते से भारतीय कंपनियां यूरो मुद्रा में भुगतान शुरू कर देंगी.
ईरान पर संयुक्त राष्ट्र ने वैसे तो कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं लेकिन तेल के आयात पर प्रतिबंध नहीं है.












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