प्रयोगशाला में विकसित रक्त वाहिनियां ला सकती हैं क्रांति
शोधकर्ताओं ने मानव रक्त वाहिनियों का निर्माण किया है, इन्हें एक साल तक के लिए कोल्ड स्टोरेज में संग्रहित किया जा सकता है।
'साइंस ट्रांसलेशनल मेडीसिन जर्नल' के मुताबिक मानव के मांसपेशीय ऊत्तक से इन रक्त वाहिनियों को बनाया गया। इससे डाइलिसिस पर निर्भर गुर्दे की बीमारी के मरीजों को भी मदद मिल सकती है।
समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्दी ही किसी शल्य चिकित्सा के दौरान इस तरह से बनाई गई रक्त वाहिनियों का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। अब तक चिकित्सा के दौरान मरीज के शरीर में मौजूद रक्त वाहिनियों का ही इस्तेमाल किया जाता था।
अमेरिका के ईस्ट कैरोलिना विश्वविद्यालय के ब्रूडी स्कूल ऑफ मेडीसिन के एलेन किप्सन कहते हैं, "इन नई जैवअभियांत्रिकीय रक्त वाहिनियों को अस्पतालों में संग्रहित करके रखना आसान है इसलिए वे आवश्यकतानुसार शल्य चिकित्सकों को उपलब्ध हो सकती हैं।"
पहले वैज्ञानिक मरीज की ही कोशिकाओं से रक्त वाहिनियों का निर्माण करते थे, इस प्रक्रिया में कम से कम नौ महीने का समय लगता था और ज्यादातर लोग शल्य चिकित्सा के लिए इतने लम्बे समय तक इंतजार नहीं कर सकते।
शोधकर्ताओं का कहना है कि एक साल तक संग्रहित रखने के बावजूद इन रक्त वाहिनियां में मजबूती, तन्यता बनी रहती है और वे खून को प्रवाहित कर सकती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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