सामरिक विश्लेषक के. सुब्रह्मण्यम का निधन (लीड-2)
पिछले बुधवार को सांस में समस्या होने पर सुब्रह्मण्यम को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था। कैंसर की बीमारी से निजात पाने के बाद वह फेफड़े और दिल की बीमारी की चपेट में आ गए थे, जिससे वह ठीक नहीं हो पाए।
वग वैश्विक सामरिक घटनाक्रमों पर प्रधानमंत्री के कार्य बल के अध्यक्ष थे। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के संयोजक भी थे।
'इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज एंड एनासिस' (आईडीएसए) के पूर्व निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय सामरिक और सुरक्षा मामलों के प्रख्यात जानकार सुब्रह्मण्यम भारतीय रणनीतिक समुदाय के अगुआ थे। साथ ही वह हर सरकार को विदेश नीति व अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर सलाह देते थे।
सुब्रह्मण्यम कारगिल समीक्षा समिति के अध्यक्ष भी थे और उन्होंने वर्ष 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध के दौरान तमाम सुरक्षा खामियों व समाधान से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी।
सुब्रह्मण्यम के परिवार में पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी है। उनके मझले बेटे एस. जयशंकर चीन में भारत के राजदूत हैं।
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपने शोक संदेश में कहा, "सुब्रह्मण्यम देश की सुरक्षा नीतियों के मुख्य निर्माणकर्ता थे।"
उन्होंने कहा, "सुब्रह्मण्यम ने सुरक्षा और सामरिक नीतियों को तैयार करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। साथ ही उन्होंने नीतियों के मसौदे को तैयार करने में काफी मदद की थी।"
'नेशनल मैरीटाइम फांउडेशन' के अध्यक्ष उदय भास्कर ने कहा,"सुब्रह्मण्यम का निधन देश के लिए एक बड़ी क्षति है। वह राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जागरुकता फैलाने के मामले में पथ प्रदर्शक थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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