खुद में डालिए जीतने की आदत
जोगिन्दर सिंह
नई दिल्ली, 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। नकारात्मक सोच एवं असंतुष्टि का भाव आपको कुछ भी हासिल नहीं करने देगा। आप सदैव और अच्छा करने का प्रयास करें, मगर इस प्रयास में यह भी संभव है कि कहीं आप अपने खिलाफ न चले जाएं। इसलिए अपने आप के पक्षधर बनें एवं अपने प्रति ईमानदार रहें। हम सबों में कुछ न कुछ कमियां होती हैं। चीजें बिल्कुल बर्बाद हो जाएं उससे पूर्व हमें कुछ करना चाहिए। समाधान मुसीबतों पर विजय पाने में है, न कि खुद को कोसने में।
यदि आप किसी समस्या का हल नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं तो उसे और अच्छे से कीजिए। सोच के जिस स्तर एवं तरीके से कोई समस्या उत्पन्न हुई है, उसका समाधान उस स्तर पर नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो यदि आपका तरीका समाधान नहीं ढूंढ़ पा रहा है तो आपका तरीका गलत है। समस्या के समाधान का एक तरीका यह भी है कि समस्या के संभावित समाधान एवं श्रेष्ठ सामधान को लिख लिया जाए। हर संभव समाधान पर विचार करें, जिससे आप सही रास्ते तक पहुंच जाएंगे। जब तक किसी बीमारी का सही परीक्षण न हो उसका सही इलाज संभव नहीं है।
यही बात समस्या-समाधान पर भी लागू होती है। समस्या के मूल कारण तक पहुंचना समाधान की पहली सीढ़ी है। केवल उचित समाधान पर ध्यान केंद्रित करना काफी नहीं है। आपकी पूरी गतिविधि इस प्रकार निर्देशित हो कि वह आपको आपके लक्ष्य की ओर ले जाए। एक बार आपने समस्या के मूल को पहचान लिया, फिर मनचाहा परिणाम के लिए क्या करना है यह सुनिश्चित कर तुरंत उस पर अमल करना चाहिए।
आपकी हर गतिविधि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हो। यह तरीका आपको सकारात्मक एवं आत्मविश्वास से लबरेज करेगा। अपने लक्ष्य तक पहुंचने में अच्छा महसूस करना बहुत बड़ा कारक है। यदि हम असहज महसूस करते हैं और दिमाग को बिल्कुल खाली रखते हैं तो कुछ अन्य विचार आपके दिमाग में आएंगे जो जरूरी नहीं है कि आपको मदद ही करेंगे।
एक चीज हमेशा याद रखना चाहिए कि आपके लिए क्या अच्छा है यह आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। अपने आप के आप सबसे बड़े विशेषज्ञ हैं। सभी मुश्किलें और उसके हल आप में ही हैं। मुश्किलों से निजात पाने का एक रास्ता है उन चीजों से किनारा कर लेना जो आपके लिए कठिनाइयां उत्पन्न करती हों। समस्याओं को साथ लेकर चलना ऐसा ही मानो सिर पर किसी मृतप्राय चीज रखकर हर समय घूमना। यदि आप अपनी मान्यताओं एवं पूर्व निर्धारित लक्ष्य के हिसाब से काम करते हैं तो इस बात को भूल जाइए कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं। अपनी आकांक्षाओं की ओर तब तक बढ़ते रहिए जब तक आप उसे पा न लें।
जब आप दूसरे स्थान पर रह जाते हैं तो आपकी पत्नी, परिवारजन एवं मित्र ही केवल आपको याद रहते हैं। जीतने की आदत डालिए न कि हारने की। इस प्रतिस्पर्धी युग और श्रेष्ठ के अस्तित्व के दौर में एक विजेता ही सफल हो सकता है। किसी भी चीज में हमारी सफलता उसमें हमारे टिके रहने की क्षमता पर निर्भर करती है। किसी भी सफलता को प्राप्त करना ही मायने रखता है। व्यक्ति जीवन में चाहे कहीं भी हो इसी चीज के लिए मेहनत करता है। आपको अपनी विशिष्टताओं को सहेजकर आगे बढ़ना होगा। अपनी जेब में हाथ डालकर आप सफल नहीं हो सकते हैं। सफलता के लिए नये दरवाजे खोलना जरूरी है। यह समझ लीजिए कि कोई और आपके लिए ये नहीं करने जा रहा है।
हम जो भी करते हैं, उसमें परिणाम काफी महत्व रखता है जो कि कर्म का प्रतिफल होता है। आपको अपनी सोच अपना तरीका आदि अपने लक्ष्य के हिसाब से बदलना होगा। भाग्य के सहारे कुछ नहीं होता है। आप मिट्टी को यूं ही इस उम्मीद पर नहीं छोड़ सकते कि खुद व खुद बर्तन बन जाएंगे। लक्ष्य की ओर अपनी धीमी चाल से नहीं लेकिन अपने जड़त्व से डरना चाहिए। आप जीवन में वो सब कुछ पा सकते हैं जिसे आप बुरी तरह चाहते हैं। आपका प्रयास आपके पसंदीदा क्षेत्र में विश्वस्तरीय एवं सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए। आप जो भी करते हैं उसका उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। हर काम के पीछे एक मिशन होना चाहिए।
आपका प्रयास होना चाहिए कि आपका प्रदर्शन उम्मीद से भी अच्छा हो। हमेशा अपने दिमाग में रखें कि आप जितना विश्वास करते हैं इससे ज्यादा वीर हैं, जितना दिखते हैं उससे ज्यादा ताकतवर हैं और जितना समझते हैं उससे ज्यादा स्मार्ट हैं। सपनों के बारे में सोचने के बजाय जीवन को पूरी तरह जिएं। याद रहे आप चमत्कार कर सकते हैं। आप में यह क्षमता है बशर्ते आप उसे ठान लें।
ये जान लीजिए कि आप जो भी करते हैं उसमें आपका निर्धारण परिणाम के हिसाब से होगा। हममें से ज्यादातर जिस स्थिति में होते हैं, उससे खुश होते हैं। जिस क्षण हम दूसरों से ज्यादा खुश होने की चेष्टा करते हैं, अपनी खुशियों को हम खोने लगते हैं।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा. लि. नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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