'भारतीय शास्त्रीय संगीत का सूर्य अस्त हो गया'
संगीत से जुड़े अन्य कलाकारों का यह भी कहना है कि उनके संगीत को लोग पीढ़ीयों तक याद करेंगे।
पंडित जसराज ने कहा, "जब मैने सुना तो ऐसा लगा कि सुबह-सुबह सूर्य अस्त हो गया है। भारत का संगीत का सूरज डूब गया है।" उन्होंने कहा, "मैं जोशी को एक भाई और गुरु के तौर पर याद करूंगा।"
जोशी का सोमवार सुबह पुणे के अस्पताल में निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे।
81 वर्षीय गायक एम. बालामुरलीकृष्णा ने कहा कि यह सिर्फ व्यावसायिक क्षति ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत क्षति भी है। पंडित जोशी ने बालामुरलीकृष्णा के साथ कई बार युगलबंदी की थी।
बालामुरलीकृष्णा ने कहा, "निश्चित रूप से यह अपूर्णीय क्षति है। वह एक ऐसे शख्स थे जो न केवल हिस्दुस्तानी संगीत बल्कि भारतीय संगीत भी गाते थे।"
जोशी के साथ जुगलबंदी के बारे में बालामुरलीकृष्णा ने कहा कि 12 साल पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल के अनुरोध पर यह शुरू हुआ था।
उन्होंने कहा, "मैरे अनुभव के मुताबिक जब भी मैं उनके साथ जुगलबंदी करता था वह कभी न भूलने वाला एहसास होता था। हम भारतीय संगीत की रचना करते थे। जब वह हिन्दी में गाना शुरू करते थे तब मैं दक्षिण भारतीय भाषा में गाना शुरू कर देता था। तब वह अपना शब्द भूलकर मेरा शब्द ही गाने लगते थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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