हंसिए और रहिए तनाव मुक्त
डा. रमेश पोखरियाल 'निशंक'
नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। मदर टरेसा ने कहा है कि तनाव समस्याएं उत्पन्न करता है, समाधान नहीं देता। तनाव को अपने मस्तिष्क में रखना ही व्यर्थ है। वस्तुत: तनाव एक वैयक्तिक प्रतिक्रिया है। कोई घटना किसी व्यक्ति में सकारात्मक भाव पैदा करती है, तो किसी के मन में नकारात्मक और घातक भाव पैदा करती है।
यदि इसके सकारात्मक पक्ष को लें तो कोई छात्र परीक्षा की घड़ी निकट होने पर बहुत बढ़िया ढंग से तैयारी कर लेता है, लेकिन बहुत अधिक मानसिक दबाव हानिकारक भी होता है।
तेजी से भागती हुई जिंदगी में हम रोज ही किसी न किसी तनाव में अपना समय गुजारते हैं, हम तनाव को रोक तो नहीं सकते लेकिन उस पर नियंत्रण किया जा सकता है। यदि आप दबाव से निपटना नहीं सीखेंगे तो अनावश्यक रूप से विफलता, अस्वस्थता और अकाल-मृत्यु तक को न्योता देंगे।
हमारे पास नियंत्रण क्षमता का होना आवश्यक है। इसके सहारे हम तनाव से घिरे रहने पर भी अपना जीवन संतोषजनक ढंग से बिता सकते हैं। आपके नियंत्रण से जो चीज बाहर हो, उसकी ओर ध्यान न देना सीखें। जिन चीजों को नियंत्रण में रख सकते हैं उन्हें नियंत्रण में रखना जानें। महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके जीवन की अधिकांश घटनाएं आपके नियंत्रण में होती हैं।
तनाव के प्रतिकार के लिए नीचे दिए गए उपायों पर अमल करें, जो आपकी तनाव नियंत्रण व्यवस्था को आधार उपलब्ध कराने में समर्थ हैं। आप इन्हें इस तरह से अपना लें कि ये आपका स्वभाव के अंग बन जाएं। आपने यह कर लिया तो आप दबाव के अधीन भी फल-फूल सकेंगे और तनाव का भी आनंद उठा सकेंगे।
हास्यबोध : शोध से यह सिद्ध हो गया है कि हंसने से दर्द निवारक एंडोरफिन नामक रासायनिक यौगिकों की मस्तिष्क में निस्सरण की मात्रा बढ़ जाती है। इससे 'पीड़ा में कमी' आती है और शरीर में रोग प्रतिरोध की क्षमता बढ़ जाती है। हंसने से आपको अपनी समस्याओं पर विचार करने की नई दृष्टि प्राप्त होती है। मुख्य रूप से तब, जबकि आप अपने आप पर भी हंस सकने का सामथ्र्य रखते हों।
उचित आहार : तनाव के विरुद्ध अच्छा भोजन वह होता है जो प्राकृतिक हो, जो आपको कैलोरी की सही मात्रा प्रदान कर आपके शरीर का वजन भी आदर्श बनाए रखता है।
अन्य गतिविधियां : तनाव से छुटकारा पाने का एक अच्छा तरीका यह है कि कोई अन्य काम कर लिया जाए जिसमें कम से कम तनाव की संभावना हो और जिसमें मस्तिष्क तथा शक्तियों का कम प्रयोग हो।
यथार्थपरक लक्ष्य : यह अत्यंत आवश्यक है कि आप अपने लिए स्पष्ट तथा यथार्थपरक लक्ष्य निर्धारित करें। उचित लक्ष्य निर्धारण के लिए अपने आपको जानें। आपको लोगों से संपर्क बढ़ाना अच्छा लगता है तो आपको अकेले बैठकर किए जाने वाले कार्य सुख नहीं दे सकते।
कार्य कौशल : आपको अपना सही काम मिल जाए तो आपको उसके लिए आवश्यक कौशल सहित अच्छी कार्यकुशलता का परिचय देना चाहिए। अपने काम के लिए पूरी तरह तैयार रहने से आपको अपने काम से कहीं अधिक संतोष प्राप्त होगा। इससे भी तनाव के स्तर में कमी आएगी।
सामाजिक संघर्ष : आप अपना यथेष्ट समय और शक्ति व्यय करके उचित संख्या में मित्र बनाए रखें और परिवार से भी सहयोग प्राप्त करें तो इससे भी दिन-भर में उपजे आपके तनाव में व्यापक कमी आएगी।
विश्राम : क्या आप दबाव की स्थिति में चैन और विश्रांति का अनुभव कर सकते हैं? यदि नहीं तो कुछ दिनों के लिए अवकाश पर जाएं। प्रकृति के प्रत्येक रूप को निहारें, चाहे वह आसमान में छिटकी चांदनी हो या बहता हुआ झरना। ये सब बातें आपके तनाव में कमी लाएंगी।
इस तरह तनाव के विरुद्ध आप अपने आपको सुदृढ़ बना सकते हैं। तनाव से मुक्ति की क्षमता के मामले में सजग रहकर आप लंबा जीवन जी सकते हैं। भविष्य को उदासीनता से न लें। आशावादी बनें और अपने जीवन के सुप्रबंध में सक्रिय भूमिका निभाएं। ऐसा करेंगे तो निश्चित रूप से तनाव से मुक्त हो सकेंगे।
(लेखक उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता के अचूक मंत्र' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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