सही आदत करेगी सपना साकार
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। अपने सपने को हकीकत बनाने का सबसे आसान तरीका है कि हम अपनी उन हरकतों को अपनी आदत बना लें, जिससे हमें सफलता की प्राप्ति हो सकती है। बात केवल सही आदत के विकास की है। एथलिट या खिलाड़ी चाहे ओलंपिक या अन्य मुकाबले के लिए लगातार एवं निरंतर अभ्यास करते हैं, ताकि यह उनका दूसरा स्वभाव बन जाए।
हम परिवर्तन में सामान्यत: अपनी दुनिया के आराम क्षेत्र से बाहर निकलने को शामिल करते हैं, जहां हम अपने कार्य एवं जीवन को अच्छा एवं महफूज महसूस करते हैं। यदि हम काम पर एक ही रास्ते से जाते हैं, तो हम सामान्यत: आराम क्षेत्र में एक ही परिणाम पाते हैं। आराम हमें वहीं रोके रखता है, जहां हम हैं।
यह एक प्रकार का हमारे लिए खुद का सोने का पिंजरा होता है। आपको खुद समय दर समय अपने आप से पूछना चाहिए कि आपका रवैया आपके विकास एवं जीवन को आगे बढ़ाने में सहायक है या बाधक। आराम में रह कर किसी महत्वपूर्ण चीज को प्राप्त नहीं किया जा सकता।
एक किसान को परिणाम मिलने से पूर्व कड़ी धूप या ठंडी के मौसम में बीज डालने एवं खेत में पानी पटाने जाना पड़ता है। यदि वह अपने घर पर ही मौसम के प्रकोप से बचने के लिए रुक जाता है तो वह बीज नहीं डाल पाएगा एवं इसीलिए वह फसल भी नहीं पा सकेगा। यदि वह खेत में काम नहीं करेगा तो वह खुद एवं अपने परिवार को भी नहीं चला पाएगा।
आराम से जीना एवं अपने और अपने परिवार को देखना उसके लिए मनोबल का काम करता है। आराम क्षेत्र से निकलने में टाल-मटोल करने का मुख्य कारण यह है कि अधिकतर लोग इस क्षेत्र से बाहर नहीं आना चाहते और इसी कारण वे जीवन के जिस पड़ाव पर हैं, उससे आगे बढ़ने के योग्य नहीं बन पाते।
इस पृथ्वी पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसने गलती न की हो। वे पिछड़े या बड़े हो भी सकते हैं। लेकिन गलती सभी के जिस्म का एक अंग है। गलती न करने का एक ही रास्ता है कि कुछ न करें।
यह हमारी गलती हमारी प्रतिक्रिया होती है जो बहुत महत्वपूर्ण होती है। मजबूत एवं बलवान व्यक्ति भी बहुत सारी गलती करते हैं जैसा कि निम्न स्तर पर जैसे हम-आप करते हैं। हमें अपनी गलतियों से सीख लेनी चाहिए। हमें अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए एवं अपने रवैये एवं विचार में बदलाव लाकर उसे ठीक करना चाहिए। जो ऐसा नहीं करते हैं वे आज उतने ही बुद्धिमान होते हैं जितना कि कल बेवकूफ रहे होंगे।
हमारी चूक इस बात को उजागर करती है कि हमें जीवन को सुधारने के लिए क्या चाहिए। बिना गलती के हम यह भी नहीं जान पाएंगे कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। हमें अपनी गलतियों को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए, बल्कि उस पर हंसकर आगे बढ़ना चाहिए। हमें उसे नए अवसर में बदलने के लिए चिंतन करना चाहिए।
असफलता, गलती करना नहीं है, बल्कि एक ही गलती की पुनरावृत्ति करना है। किसी भी रणनीति का प्रयास आखिरी परिणाम है जिसे हम पाना चाहते हैं। यह बात हमें अपने दिमाग में हमेशा रखना चाहिए। यह ध्यान में रखिए कि कुशलताएं जो एक व्यक्ति के लिए कारगर साबित हो गई, वह अन्य के लिए भी हो जाएगी, जैसा कि हम सब एक अनोखे प्रकार के हैं एवं अलग गुण के साथ प्रयास करते हैं।
हमें अपने काम एवं प्रयास से अपने आसपास की दुनिया को बदलने का प्रयास करना चाहिए। हमें निराशा एवं दुर्भाग्य को न बोलने के प्रति सतर्क रहना चाहिए। हमें हमेशा चमकते रहना चाहिए एवं आशा के दीये को जलाए रखना चाहिए और सभी जगह जागरूक रहना चाहिए। यह मुस्कुराकर एवं अपने समय का अपनी कुशलताओं को बढ़ाए रखने में बिताकर किया जा सकता है।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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