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झूठी प्रशंसा से बचने में ही भलाई

नई दिल्ली, 18 नजवरी (आईएएनएस)। हमें हमेशा नया विवेक एवं योग्यता सीखने का प्रयास करना चाहिए। ये गुण हमेशा हमारे साथ रहेगा और ये कोई हमसे ले नहीं सकता। वास्तव में चुनौतीपूर्ण स्थितियां एवं परिस्थितियां आएंगी और आपकी योग्यता सारी परेशानियों को सुलझाने के लिए अपर्याप्त हो सकती है। लेकिन ये हमें अच्छी शुरुआत करने के योग्य बना सकता है।

हमारी विशेषज्ञता हमारा संसाधन है और ये हम पर निर्भर है कि हम इसका बेहतर उपयोग करें। जब हम सपने देखते हैं तो हमारे अंदर की बाधाएं इसे मानने से इंकार कर देती हैं एवं हमारा शक हमें पीछे घसीट लेता है।

एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि कि आप लोगों की मदद क्यों लेते हैं तो मैंने जवाब दिया कि इससे मेरे समय की बचत होती है। बचे हुए समय में मैं लेख लिखता हूं जो अंग्रेजी व स्थानीय समाचार पत्रों में छपते हैं। मैं यह सब नहीं कर सकता था यदि मैं सारे काम खुद से करने पर जोर देता तो थकाने के सिवा मेरे पास खुद को और दूसरों को अपनी असफलता दिखाने के सिवाय कुछ भी नहीं होता। कुछ लोग जरूरी काम दूसरों को सौंप कर खुद को आजाद महसूस करते हैं। लेकिन हमें अपने खाली समय को और अधिक फायदेमंद कामों में लगाना चाहिए।

आपको अंदर एवं बाहर दोनों बाधाओं से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बाहर आना होगा। हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम खुद पर विश्वास ही नहीं करते कि हम इंसान हो सकते हैं।

इसके बावजूद हम जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, अभी भी हमारा एक पांव झाड़ी पर है। हमारा डर एवं असफलता की आशंका ही मनोबल गिराने वाला व ऊर्जा क्षय करने वाला होता है। यह हमें हमारी इच्छाओं से पीछे रखता है। हम जिसे पहाड़ समझते हैं, वो केवल मिट्टी का ढेर है, बस। सफलता के लिए जरूरी है कि हमारा खुद पर विश्वास एवं आस्था हो।

मौलिक रूप से, आप जितना खुद में एवं अपनी मंजिल पर भरोसा करेंगे यह उतना ही वास्तविक होता जाएगा। एक चीज है जो आपको आपकी सफलता से अलग रखती है वो है झूठी प्रशंसा जो कि आपके पहुंच के बाहर है। आपको अपने दिमाग की अयोग्यता को सकारात्मक विचार से बदलना चाहिए। आप अपनी सोच को बदलें तो समाधान के लिए सबसे अच्छे फिजिशियन साबित होंगे।

समय बहुत जल्दी पार हो रहा है और यही समय आपको नौकरी-पेशा या जीवन के विकास तक ले जाता है। घटनाएं एवं परिस्थितियों का कोई गुण-दोष नहीं होता जब तक कि हम उसे कोई महत्व या मूल्य नहीं प्रदान करते। यह महत्वपूर्ण है कि हम जीवन को कैसे देखते हैं। नकारात्मक भावना तनाव का मुख्य कारण है।

आपको जरूरत है खुद को लगातार प्रोत्साहित एवं अपने लगन को बढ़ाने की। सर्वश्रेष्ठ परिणाम के लिए आपको अपने वातावरण से तालमेल बिठाना होगा, संतुलित, प्रचुर एवं खुशी भरे जीवन के लिए।

हमें अपने महत्वपूर्ण रिश्तों को परिवार में या मित्रों को या कार्यस्थल पर सहकर्मियों को केवल इस साधारण से कारण से गंवाना नहीं चाहिए कि हम अपने गुस्से और व्यवहार पर काबू नहीं पा सकते। यदि आप अपने गुस्से पर काबू नहीं पा सकते तो आप चुप रहें या चले जाएं उस आदमी या कारण से दूर जो आपको गुस्सा दिला रहा हो।

गुस्सा किसी परिस्थिति को न ही सुधारता है न ही संतुष्टि प्रदान करता है। कुछ लोग गुस्सा दूसरों को नीचा दिखाने के लिए करते हैं, ताकि वो उन पर नियंत्रण पा सकें एवं इसका प्रयोग कभी अपनी जिम्मेवारी से मुंह मोड़ने या परिस्थिति से यह हमारे कर्म व्यवहार पर निर्भर करता है।

आपको सतर्क रहना चाहिए एवं बुद्धिमानी से काम लेने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि आप दूसरे के खास प्रकार के व्यवहार को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। दूसरा व्यक्ति भी आपके लक्ष्य प्राप्ति में सहायक हो सकता है। अगर आप अपने समय को अधिक महत्वपूर्ण काय्र में लगाना चाहते हैं तो मामूली काम किसी को दे देना होगा। यह जो तरीका है कार्य को सुपुर्द करने का या कार्य खुद से न करने का, यह कार्य सौंपने वाले के समय को आजाद रखने के लिए है, ताकि वह रूटीन काम के बजाय और महत्वपूर्ण कार्य करे।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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