नेपाल से लौट रहा है संयुक्त राष्ट्र दल

नेपाल की शांति प्रक्रिया पर नज़र रखने के लिए गठित संयुक्त राष्ट्र दल शनिवार को वहां से वापस लौटने की तैयारी कर रहा है.
काठमांडू से बीबीसी संवाददाता जोएना जौली का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र दल लौट रहा है लेकिन वहां शांति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.
इसके अलावा नेपाल की राजनीतिक पार्टियों के बीच इस बात पर भी कोई समझौता नहीं हुआ है कि शांति प्रक्रिया पर नज़र रखने की जवाबदेही अब किसकी होगी.
शुक्रवार की शाम स्थानीय समय से पांच बजे अभियान दल संयुक्त राष्ट्र के झंडे को नीचे उतार लेगा.
लौट रहे दल की प्रमुख कैरिन लैंडग्रेन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि शायद आख़री क्षणों में ही कोई समझौता हो जाए जिससे निकरानी कार्यों का हस्तांतरण बिना किसी बाधा के हो सके.
उनका कहना था, “मुझे डर है कि यदि शनिवार तक भी कोई समझौता नहीं हो पाया तो जनता में एक घबराहट का माहौल पैदा हो सकता है.”
अभी भी 19,000 से ज़्यादा माओवादी सैनिक देश के अलग अलग हिस्सों में बने कैंपों में हैं और उनके हथियार संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि हथियारों पर निगरानी रखनेवाले उपकरणों को वो सरकार को तब तक नहीं सौंपेंगे जबतक राजनीतिक दलों के बीच इस पर कोई सहमति नहीं बन जाती.
साल 2006 में माओवादी विद्रोहियों और सरकार के बीच हुए समझौते के अनुसार उन्हें या तो सुरक्षा बलों में सम्मिलित किया जाएगा या उन्हें आम नागरिकों की तरह समाज में जगह दी जाएगी.
इसके अलावा नेपाल की सेना में भी बदलाव और सुधार के प्रस्ताव हैं.
संयुक्त राष्ट्र इन सभी प्रस्तावों के लागू होने से पहले ही लौट रहा है क्योंकि मिशन का कार्यकाल 15 जनवरी की मध्यरात्रि को खत्म हो रहा है.
माओवादी चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र का ये दल अभी नेपाल में मौजूद रहे लेकिन दूसरे राजनीतिक दल उनकी वापसी के हक़ में हैं.
माओवादियों के उपाध्यक्ष बाबूराम भट्टाराय का कहना है, “संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी से सभी पक्षों पर शांति प्रक्रिया को जारी रखने का मनोवैज्ञानिक दबाव बना रहा है. इसके बिना समस्या पैदा हो सकती है.”
राजनीतिक दलों ने पिछले सितंबर में ही इसके बारे में एक प्रस्ताव पारित कर दिया था.


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