सीखने वाला ही बढ़ता है आगे
जोगिन्दर सिंह
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। जब आप घर में काम करते हैं तो आपको खुद ही ऐसा व्यवहार करना चाहिए कि आप ऑफिस में काम कर रहे हैं। मैं यह जरूर बताना चाहूंगा कि मैं घर पर जब काम करता हूं तो मैं बहुत आराम से करना चाहता हूं। इसका मतलब है कि ज्यादातर काम मैं साधारण वेशभूषा में करता हूं। मैं अपने पांव को खींच कर सामने के टेबल या बिस्तर पर रखना भी पसंद करता हूं और लैपटॉप को गोद में।
मेरा सीधा तर्क है कि मेरे पास साधारण वेश पहनने के लिए बहुत थोड़ा सा समय है जो काम में बिता सकता हूं। मैंने यह जोड़ रखा है कि जब मुझे घर से बाहर जाना होता है या किसी कार्यक्रम में या किसी से मिलने जाना होता है तो तैयार होने में कम से कम बीस-तीस मिनट लग जाते हैं।
इतना करने के बाद भी यह जरूरी है कि प्रतिदिन मैं अपने प्रत्येक मिनट का इस्तेमाल करूं, ताकि मैं सही राह पर बना रह सकूं एवं सफलता प्राप्त कर सकूं। इस बदलती और बढ़ती दुनिया में सीमित सीखना चाहिए और बेहतर तरीके से इसे बांटना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लक्ष्य की प्राप्ति हो सके। इस बदलते समय में जो सीखेगा और अपने स्तर को ऊंचा करेगा वही आगे बढ़ सकता है।
इंटरनेट को ही ले लीजिए। मैं इसे एक जानकारी प्राप्त करने के लिए विशाल पुस्तकालय के रूप में इस्तेमाल करता हूं। जब इंटरनेट का आविष्कार नहीं हुआ था, तब मुझे पुस्तकालय जाना पड़ता था, पुस्तक ढूंढ़ो जिसके बारे में पढ़ना व लिखना था उसे लो, फिर उससे निष्कर्ष या आइडिया लिखो फिर वापस करो।
अब माडल क्लिक करते ही मैं जानकारी पा सकता हूं। यदि हम बदलाव का विरोध करेंगे तो हम पीछे रह जाएंगे, न केवल तकनीकी के लिए, बल्कि हमें बहुत समय भी बिताना होगा।
मैंने एक चिरपरिचित व्यक्ति से पूछा, "पिछले सप्ताह आपने क्या किया?" उन्होंने कहा कि रात उनके बेटे की शादी थी। लड़की देखने से लेकर सामान खरीदने, सगाई, शादी और प्रीतिभोज में उनका समय बीता। उसके बाद हनीमून के लिए विदाई में शिरकत किए और इसमें करीब दो सप्ताह का समय लगा।
उन्होंने बताया कि एक सप्ताह बनारसी लाल के बेटे के जन्मदिन मनाने में बीत गया। पूरे सप्ताह पूजा-पाठ एवं गरीबों के लिए लंगर व लोगों से सामान्य मिलने में लग गया।
उन्होंने कहा कि इस सप्ताह न तो कोई मरा है न किसी का जन्म हुआ है या शादी हुई है। इसलिए वह बोर महसूस कर रहे हैं, समय काटना मुश्किल हो रहा है।
यह अधिकार किसी को नहीं कि वह दूसरे को कहे कि तुम्हें अपना जीवन व समय कैसे बिताना चाहिए। लेकिन दूसरों को धोखा देकर या बात करके कोई जीवन में लंबे समय तक प्रसन्न नहीं रह सकता। जीवन में और अपने क्षेत्र में निशान बनाना महत्वपूर्ण चीज है। यह ज्यादा संतोषजनक है किसी और चीज के मुकाबले। ऐसी बात नहीं है कि समाज में समस्याओं की कमी है। इसमें से प्रत्येक लोग जीवन में अपना नाम बना सकते हैं।
हमारे चारों ओर संघर्ष है। यह उचित है कि यदि हमारे पास समय हो तो मदद का हाथ किसी भी समस्या के समाधान के लिए बढ़ाएं। हमें अपने चारों ओर यह देखना चाहिए कि कैसे हम दूसरों की मदद कर सकते हैं यदि समय व संसाधन उपलब्ध हैं। कहना चाहिए कि परिवर्तन को हम रोक नहीं सकते और हमें जरूर इसे मानना चाहिए।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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