जीवन है बहुमुखी, हर पक्ष का रखें ध्यान
नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। मुश्किल रास्तों पर चलने के बजाय हमें अपना ईमानदारी से मूल्यांकन करते रहना चाहिए। इसके लिए हमें अपने आप से पूछना चाहिए कि वो कौन-सी पांच चीजें हैं, जिन्हें करना आपको सबसे ज्यादा पसंद है और वो पांच कौन सी चीजें हैं जो आप प्रतिदिन अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए करते हैं। हमारा जीवन बहुमुखी है और हमें हर पक्ष पर ध्यान की जरूरत होती है। इसमें शारीरिक, आध्यात्मिक, कार्य एवं कैरियर, पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, मानसिक एवं मनोरंजक चीजें शामिल हैं।
हर एक से जुड़ा एक महत्वपूर्ण लक्ष्य लिखें। इन पक्षों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। एक सुखद एवं संतुष्ट जीवन के लिए इसके बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए। किसी एक पक्ष पर विशेष ध्यान देने से किसी दूसरे पक्ष की उपेक्षा होगी जो तनाव पैदा करेगा। हमें एक बात याद रखनी चाहिए कि जीवन में हम सबकुछ एक साथ नहीं कर सकते हैं।
संतुलन बनाना सीखना एक सतत प्रक्रिया एवं सुखी जीवन की आवश्यकता है। यह हमारा प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। जीवन में जहां कहीं भी हों हर रोज ये हमारे सामने मुश्किलें खड़ी करती हैं। यदि हमें हताश-निराशा नहीं होना है तो अपने आप से वादा करना होगा और प्रयास करना होगा कि हम हम ही रहेंगे। हमारा लक्ष्य सतत सुधार होना चाहिए जो कि अचानक नहीं आता।
आपको अपनी विशेषताएं जाननी चाहिए और आप क्या दूसरों को अपने आप से फायदा उठाने का मौका देते या अपना मजाक उड़ाते हैं। कुछ घटनाएं हैं जहां लोग कुछ नहीं बोलते हैं। कदाचित उन्हें स्वाग्रही की जगह आक्रामक समझा जाए। इसलिए वे अपनी बात से पहले ये जोड़ देते हैं कि वे गलत हो सकते हैं।
कई लोग ऐसे भी होते हैं जो केवल शांति की प्राप्ति के लिए किसी बात पर हां कर देते हैं, जहां उन्हें ना कहना चाहिए। कई लोग ऐसे होते हैं जो ना कहने या किसी को वादा करने के बाद महसूस करते हैं कि ऐसा नहीं करना चाहिए था या उसे पूरा नहीं कर पाते हैं और बाद में पछतावा होता है। ऐसे कई लोग हैं जो बगैर सोचे समझे जल्दबाजी में उत्तर दे देते हैं या फिर किसी के गलत व्यवहार पर हायतौबा मचाते हैं या दूसरों से अपने बारे में बात करने के लिए तड़पते रहते हैं।
जब उनको गलत तरीके से आलोचना का शिकार होना पड़ता है या अपनी उपलब्धियों का श्रेय लेने में असहजता महसूस करते हैं या फिर किसी गलत चीज के विरुद्ध आवाज नहीं उठा सकते हैं। आपका खुद का आकलन यह निर्धारित करेगा कि आप किसी प्रकार के व्यक्ति हैं। यह आपके स्वाग्रही या उदासीनता के स्तर का खुलासा करेगा।
स्वाग्रही होने का मतलब यह नहीं है कि दूसरों को जो चाहे वो कहने व करने दें तभी जब आप इसके विरूद्ध हैं। स्वाग्रही होने का अर्थ है कि आप अपनी बातों, विचारों एवं सोच को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें। मेरे एक करीबी रिश्तेदार हद से ज्यादा विनम्र थे जिसका परिणाम यह होता था कि कोई भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेता था। उनकी शिष्टता एवं विनम्रता को उनकी कमजोरी समझा जाता था।
स्वाग्रही होना यह निश्चित करता है कि आपके व्यक्तिगत कौशल एवं सामथ्र्य का विकास अवश्य होगा। यह आपके आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है। स्वाग्रही का हालांकि तात्पर्य यह नहीं होना चाहिए कि व्यक्ति लगातार अपनी ही रट लगाये रहे और दूसरों को बोलने का मौका ही न दे।
कुछ लोग जिनमें चीखने-चिल्लाने एवं अपनी बात पर अड़े रहने की आदत होती है वे अपने सानिध्य में आने वाले हर व्यक्ति के लिए अप्रिय हो जाते हैं। जो भी लोग आपके सान्निध्य में आते हैं, उनके साथ सत्य एवं उचित व्यवहार करना चाहिए और उनका आदर भी प्राप्त करना चाहिए। अपने एवं अपनी क्षमताओं के लिए अच्छा महसूस करने का यह एक तरीका है।
स्वाग्रही होने के लिए मूल आवश्यकता है कि जब आप अपनी बात से पूर्णत: सहमत हैं तो आप उसके लिए खड़े हो सकें एवं अपने कामों के लिए स्वयं जिम्मेदारी लें। यदि आप स्वाग्रही किस्म के व्यक्ति हैं दूसरे समझ जाएंगे कि आपसे कैसे व्यवहार करना है, वे कहां तक जा सकते हैं और उनकी क्या सीमाएं हैं। आपके साथ कैसा व्यवहार किया जाए, इस बाबत कोई भी आशंका न छोड़े।
अपने बारे में कभी भी हीन भावना न रखें एवं समस्याओं से दो चार होने के लिए सदैव तैयार रहें। यदि आवश्यक हो तो उस बात के लिए ना कहने की क्षमता रखें, जिसके बारे में आप ऐसा महसूस करते हैं।
यद्यपि आपने किसी मसले पर नकारात्मक विचार प्रकट किए हैं फिर भी वह ढंग से किया जाना चाहिए। स्वाग्रहीता एवं अच्छा संवाद साथ-साथ चलते हैं। एक स्वाग्रही ढंग का अर्थ है किसी समस्या से जूझने के लिए अपने आप को सक्ष्म महसूस करना। अंतत: यह आपके हां या ना कहने की क्षमता को बढ़ाता है जो आपके हित में है।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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