जो भी करें, उत्साह से करें
नई दिल्ली, 5 जनवरी (आईएएनएस)। हम सभी किसी को नेता तभी मानते हैं, जब वह स्वयं उदाहरण प्रस्तुत कर लोगों का नेतृत्व करता है। इसका इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि वह दूसरों से ऐसी अपेक्षा करता है या नहीं। वह अपनी गलतियों को सही साबित करने में अपना समय नहीं गंवाता है।
हम जो भी काम कर रहे हैं, उसके प्रति हमें उत्साहित रहना चाहिए और अपनी उत्सुकता एवं जुनून का एक-एक बूंद उस पर लुटा देना चाहिए। आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देने से पूर्व रुकना नहीं चाहिए। जीवन में उन्नति का यही सही तरीका है।
कभी-कभी हमारा पहला प्रयास नाकाफी होता है। एक छात्र के रूप में मैंने अपनी कीमत पर इसे सीखा है। मैंने पाया कि उत्तरों में स्पेलिंग की छोटी-छोटी गलतियां मुझे मेरे रैंक से नीचे ले आती थीं। ऐसा इसलिए था कि परीक्षा के अंतिम क्षणों तक मैं जवाब लिखता रहता था और दोहराने के लिए कभी समय नहीं बचता था।
जब मुझे यह ज्ञात हुआ कि अपना श्रेष्ठ करने का अर्थ यह नहीं है कि अंतिम क्षण तक काम किया जाए तब मैंने यह निश्चय किया कि परिणाम के अंतिम दस मिनट मैं उसे दोहराऊंगा। इसका परिणाम यह हुआ कि उत्तर पुस्तिका की छोटी-छोटी गलतियों को मैंने सुधार लिया।
यह तरीका मैंने पहली प्रतियोगिता परीक्षा जो कि भारतीय पुलिस सेवा की परीक्षा थी, में भी अपनाया और अपने पहले ही प्रयास में मैं अव्वल आया। तब से लेकर आज तक मैंने जो कुछ भी किया या करता हूं, सब में यही तरीका अपनाता हूं।
सुनहरे भविष्य की तैयारी के लिए जरूरी है कि हम आज अपना सर्वश्रेष्ठ दें। अपने श्रेष्ठ से कम पर कार्य न करें। जीवन के रास्ते कभी चिकने नहीं होते हैं। हर समस्या हालांकि हमें अपना सर्वोत्तम करने का मौका जरूर देती है। यदि हम अपना काम दूसरों से करवाते हैं तो इसका अर्थ है कि हम उस व्यक्ति के कौशल को पहचानते हैं।
यह मूल सत्य है कि आप महारत तभी हासिल कर सकते हैं, जब आप उन चीजों को करने में आनंदित हों जो आपको अच्छे लगते हैं। यह संभव नहीं है कि आपको जो काम करने में मजा नहीं आता है आप उसमें महारत हासिल कर लें।
कोई भी कार्य रचनात्मक तभी होता है, जब आप इसे करते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि यह अच्छे से हो। हमें कभी न खत्म होने वाली आत्मा-विकास की प्रक्रिया का आदी हो जाना चाहिए। हमारा प्रयास इस दिशा में नहीं होना चाहिए कि हमें अपने पूर्वजों या समकालीनों से अच्छा करना है, बल्कि हमें खुद से अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए।
हमारा प्रयास होना चाहिए कि किसी भी समय में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करें। जो भी आपके लिए महत्वपूर्ण है आपको उस निमित्त प्रयास करना है और उसे हासिल करना है। इसका एकमात्र रास्ता है कि आप जो भी करते हैं उसमें अपना श्रेष्ठ दें। लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि हम अपना श्रेष्ठ तभी कर सकते हैं जब हमने श्रेष्ठ विकल्पों को चुना हो।
जो भी आवश्यक है उससे ज्यादा करें। आपके संस्था एवं आपकी व्यक्तिगत सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपने लक्ष्य एवं मूल्यों को किस प्रकार परिभाषित करते हैं और उनके साथ जीते हैं। आपकी संस्था एवं आपका व्यक्तिगत लक्ष्य एक समान होने चाहिए। आपके अपने एवं संस्था एवं उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए कि आपको क्या करना है? यह आपकी क्षमताओं एवं आपकी संस्था को आकार एवं दिशा प्रदान करने वाला होना चाहिए।
यदि आप किसी और के लिए भी काम करते हैं तो भी इस सिद्धांत का अनुसरण कीजिए। केवल उतना ही मत कीजिए जिससे आपकी नौकरी बरकरार रहे। अच्छे काम करने वालों की तारीफ में उदारता बरतें। ये उनको और अच्छा करने को प्रेरित करेगी।
यदि लोग कड़ी मेहनत करें फिर भी तारीफ न मिले तो उनमें एक प्रकार की उदासीनता आ जाती है। यह नीचे से होकर ऊपर तक सब जगह लागू होता है। मगर प्रशंसा वास्तविक होनी चाहिए।
दूसरों के लिए काम करते हुए लोग उसी प्रकार का प्रयास करते हैं जिस प्रकार उनके साथ व्यवहार किया जाता है। इसलिए लोगों को अच्छी तरह निर्देशित करने के साथ-साथ अच्छा व्यवहार भी करना चाहिए, क्योंकि जिन लोगों का अपमान किया जाता है वे इसका हिसाब चुकता करने की कोशिश करते हैं। जब कोई काम हो जाता है तो उस व्यक्ति एवं उसके प्रदर्शन के साथ-साथ उसके प्रति हमारे अपने रवैये पर भी ध्यान देना चाहिए।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि. से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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