लक्ष्य पर रहे ध्यान तो मिलेगी सफलता

जोगिन्दर सिंह

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। इस संसार में 'पेपर वर्क' से बचा नहीं जा सकता, चाहे आप खुद के लिए काम कर रहे हों या फिर किसी संस्था के लिए। रिकार्ड को सही एवं समयानुसार रखना, किसी भी धाराप्रवाह कार्य के लिए आवश्यक है। आमदनी व स्रोत का अकाउंट कैसे रखा जाए, ये किसी भी कार्य के लिए जरूरी है।

कोई भी कार्य तब तक पूर्ण नहीं होगा, जब तक आपने पेपर वर्क नहीं किया हो। एक ही समय में कार्य व समय में संतुलन आवश्यक है। हम हमेशा अच्छे कार्य एवं तेजी से करने का उपाय यह देखकर खोज सकते हैं कि अन्य सफल व्यक्तियों ने कैसे ऐसी ही परेशानी का सामना किया है। हमें हमेशा दूसरों से सीखना चाहिए, न कि खुद गलती करते रहना चाहिए।

किसी भी परिस्थिति में गलतियों को सफलता के रास्ते में एक घुमावदार मार्ग के रूप में लेना चाहिए। जीवन एक बैग के समान है। इसमें सामान जैसे स्वास्थ्य, स्वाध्याय व हमारी क्षमता, कार्यो को ठीक ढंग से करने के लिए है। हम जहां भी हैं अपनी सोच व विश्वास की बदौलत हैं। हमारे पास दो विकल्प होते हैं या तो हम फिर से हारे हुए पथ को चुनें या कोई नया पथ बनाएं।

यदि हम कदम नहीं बढ़ाते हैं तो हम वहीं रह जाते हैं। जो कुछ भी हम देखते हैं, उसके अंत व परिणाम पर ध्यान देना चाहिए अंत में।

अधिकतर लोग बहुत कुछ चाहते हैं, पर केवल चाहना ही पर्याप्त नहीं है। आपको उसे बुरी तरह चाहना होगा एवं अपनी सारी क्षमता व स्रोत उसे पाने में लगाना होगा, यही जीवन में कुछ पाने का एकमात्र रास्ता है। किसी कार्य को ठीक ढंग से करने के लिए सारी चीजों को छोड़कर पूरे मन से मेहनत जरूरी होता है। परेशानी की बात यह है कि हम सब लोग चाहते बहुत कुछ हैं पर बिना किसी मेहनत व आवश्यक लगन के।

मेरे साथ काम करने वाले एक मित्र जो भारतीय प्रबंधक सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेखक बनना चाहते थे। उन्होंने मुझसे पूछा, "मुझे ऐसा क्या करना चाहिए ताकि मेरा नाम देश के प्रमुख लेखकों में शुमार हो सके।" मैंने कहा कि आपको कम से कम कम्प्यूटर व स्टेनोग्राफर की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उनके पास समय नहीं है।

वह किसी को ढूंढ़ रहे थे जो कि उनके बदले लिख दे और वह सिर्फ अपना हस्ताक्षर करना चाहते थे जैसे कि उन्होंने सर्विस में किया था। मैंने उनसे कहा कि यदि स्टेनोग्राफर या कलर्क अच्छा लिख सकता तो वह नीचे पद पर काम नहीं करता। ये उम्मीद करना कि एक इंसान जिसने अपना सारा जीवन टाइपिंग में बिता दिया, वो किसी के लिए एक महान लेखक बन जाएगा यह चमत्कार से ज्यादा कुछ नहीं।

जाहिर सी बात है कि मेरा सहकर्मी पूरे मन से लेखक नहीं बनना चाहता था। आपको किसी भी चीज को पाने के लिए बुरी तरह चाहना होगा। आप अपने समय को ऐसे कार्य को करने में व्यर्थ न करें जिसे पहली बार नहीं किया जाना चाहिए।

ये आपके लक्ष्य प्राप्ति में समय ले सकता है, लेकिन यदि आप अपने लक्ष्य के प्रति सख्त व जुड़े हुए रहते हैं तो अंत में आपको सफलता अवश्य मिलेगी। हमारी रफ्तार धीमी हो सकती है परंतु हम आगे बढ़ते हैं और स्थिर खड़े नहीं होते हम लक्ष्य के तरफ बढ़ते जाते हैं और हमें लक्ष्य का अहसास होता है।

याद रखिए, जीवन में समस्याओं का समाधान ही कााफी नहीं है। ठीक उसी तरह जैसे पहाड़ और व्यवधान के बाद एक और व्यवधान है। यह महत्वपूर्ण व जरूरी है कि आप भरोसेमंद प्रतिष्ठा स्थापित करें। यदि आप प्रतिज्ञा करते हैं तो आपको इसका ध्यान रखना चाहिए एवं अनुसरण करना चाहिए।

मैंने देश में कई जगहों से कई प्रोग्राम में उपस्थित होने के लिए निवेदन पाया। मैंने निवेदन करने का अपना एक तरीका बनाया कि पत्र लिखित में मुझे भेजें, ताकि मैं अपनी समय-सारिणी को देखकर कोई प्रोग्राम स्वीकार कर सकूं। एक बार यदि मैंने हां कह दी तो यह बात मेरे लिए प्रतिष्ठा की हो जाती थी।

मैंने कठोरता के साथ इस चीज को सीखा था। एक बार एक परिचित ने मुझसे एक प्रोग्राम की स्वीकृति हेतु निवेदन किया। मैंने भी तुरंत हां कह दिया। फिर मैंने अपना कार्यक्रम विवरण देखा तो पाया कि ठीक वही समय, मैं किसी और के लिए निर्धारित कर चुका हूं। मुझे अपने दूसरे कार्यक्रम को स्थगित करने के लिए खेद व्यक्त करना पड़ा।

मूल्यों के लिए जरूरी है कि आप सभी वचनों के प्रति वचनबद्ध हों। इसलिए आपको अपनी प्रतिष्ठा के लिए बार-बार समीक्षा करनी चाहिए कि आपने अपने वचनों को पूरा किया है या नहीं। किसी से संवाद के लिए इसे अपना एक स्पष्ट पक्ष बनाएं।

पारदर्शी संवाद की कमी दोनों अकेले व संस्था के लिए हानिकारक है। आपको दोनों को देखना है न सिर्फ खुद बल्कि संस्था की भलाई के लिए आपको अपने सपनों व उद्देश्यों से आगे जाना है तो आपको खुद से वफादार होना चाहिए, क्योंकि आप नहीं हैं तो यह उद्घाटित हो जाएगा। सफलता बहुत हद तक दूसरे से मेल-मिलाप, संबंध व नजरिए से जुड़ी हैं। इसमें वो गलत चीजें एवं गलत प्रश्न भी शामिल हैं जो आप फायदे के लिए हमेशा पूछते रहते हैं।

यह दोनों हो सकता है वरदान या अभिशाप। यह एक मनोधारणा है जिसे हर वह व्यक्ति अपनाता है जो व्यवसाय से जुड़ा है। यह सामान्यत: हमारी प्रकृति व संस्कृति से जुड़ी होती है। सोच व रुख का यह अर्थ हो सकता है कि इन लोगों, रिश्तों एवं मौकों को छोड़ दिया जाए जो देखने में हानिकारक लगते हों।

मैंने इस बात पर गौर किया है कि बहुत सारे लोग उन्हीं लोगों से मिलते हैं जिनसे वर्तमान में कोई फायदा हो या बाद में। अन्य उनके लिए मायने नहीं रखते। अन्य शब्दों में कुछ कहा जाए तो वह निवेश पर कुछ फायदा चाहते हैं एवं दूसरों से भी यही आशा करते हैं।

एक परिचित व्यवसायी ने मुझसे एक बार जिक्र किया कि बिजनेस कम्युनिटी हमेशा हरेक लेन-देन के पीछे फायदा देखती है। वह सही थे। एक सहकर्मी ने सरकारी नौकरी से रिटायरमेंटके बाद मुझसे कहा कि उनका एक व्यवसायी मित्र जो बहुत करीबी मित्र था, ने न केवल इन्हें टेलीफोन करना और मिलना छोड़ दिया, बल्कि उनका फोन तक उठाना छोड़ दिया।

ऐसे में सिवाय समझौता करने के कुछ नहीं होता। इसलिए हमें खुद को दूसरों से उम्मीद रखने से दूर रखना चाहिए।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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