जल्लाद के साक्षात्कार के प्रसारण पर रोक

जल्लाद के साक्षात्कार के प्रसारण पर रोक

सलीम मियाँ

बीबीसी संवाददाता, ढाका

बांग्लादेश में 411 लोगों को फाँसी की सज़ा हो चुकी है.

बांग्लादेश सरकार ने एक निजी टेलीविज़न चैनल को निर्देश दिया है कि वह देश के सबसे जानेमाने जल्लाद का साक्षात्कार प्रसारित न करे

सरकार का कहना है कि जल्लाद का साक्षात्कार दिखाने से बच्चे डर सकते है.

ये साक्षात्कार तीन भागों में प्रसारित किया जाना था और इसका एक भाग प्रसारित किया जा चुका है.

इस जल्लाद ने कैदियों को फाँसी देने का काम सात पहले शुरू किया था. इस जल्लाद को स्वयं हत्या का दोषी पाया गया था और उसे 16 साल की उम्र में तीस साल की कैद सुनाई गई थी.

इसी दौरान इस जल्लाद को फाँसी देने का प्रशिक्षण दिया गया था. अपनी 21 साल की कैद के दौरान वह नौ लोगों को फाँसी दे चुका है.

अपनी पहचान छिपाने की शर्त पर इस जल्लाद ने बीबीसी को बताया है कि उन्होंने निजी चैनल बांग्लाविज़न को ये साक्षात्कार दिया था और इसमें उनके रहन-सहन के तरीकों पर बातचीत की गई थी.

जेल प्रशासन ने बांग्लाविज़न चैनल को एक पत्र लिखकर इस जल्लाद का साक्षात्कार प्रसारित न करने का आग्रह किया है.

उनका कहना है, ''इस साक्षात्कार के प्रसारण से मासूम बच्चों और अधिकतर बड़े लोगों की भावनाएँ प्रभावित हो सकती हैं. ''

इस चिट्ठी में जेल अधिकारियों का कहना है कि जनहित को ध्यान में रखकर साक्षात्कार का प्रसारण नहीं किया जाना चाहिए.

बांग्लाविज़न चैनल पर बांग्ला भाषा में कार्यक्रम होते है जो यूरोप, मध्यपूर्व और अमरीका में भी प्रसारित होते हैं.

टीवी चैनल में समाचार विभाग के प्रमुख मुस्तफ़ा फिरोज़ का कहना है, ''हमारे कार्यक्रम का मक़सद फाँसी की सज़ा के ख़िलाफ़ प्रचार करना नहीं था और न ही उसका समर्थन करना था .''

मुस्तफ़ा फिरोज़ का कहना था, ''ये जेल के अंदर एक जल्लाद के जीवन पर कहानी थी. ये रोजमर्रा की कहानी से अलग थी. मुझे नहीं समझ में आ रहा है ये कहानी जेल की संहिता का कैसे उल्लघंन कर सकती है.''

उनका कहना था, ''जेल से बरी हुए आदमी को मीडिया से बातचीत के लिए कैसे रोका जा सकता है. ये तो मीडिया की आज़ादी और आज़ादी के अधिकार के ख़िलाफ़ है.''

जल्लाद को इसी साल के अगस्त महीने की शुरूआत में रिहा किया गया है.

जल्लाद का काम करने के लिए उनकी 18 महीने की सज़ा कम कर दी गई थी.

बांग्लादेश को वर्ष 1971 में आज़ादी मिली थी.उसके बाद अब तक वहां 411 लोगों को फाँसी की सज़ा हो चुकी है.

यहां जेल में सभी जल्लाद कैदी है और कैद के दौरान ही उन्होंने फाँसी देने का प्रशिक्षण लिया है.

इस जल्लाद का कहना था कि उसने भी अपनी सज़ा कम करने के लिए जल्लाद का काम किया था.

उसका कहना था, ''मुझे किसी को फाँसी देना अच्छा नहीं लगता था लेकिन अपनी सज़ा को कम करने के लिए मैंने ये काम किया. हर बार फाँसी देने के लिए मेरी 30 साल की कैद में से दो महीने कम कर दिए गए. ''

इस जल्लाद का कहना है कि बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख़ मुजीबुर रहमान के हत्यारों को फाँसी की सज़ा देना उनके जीवन का सबसे यादगार लम्हा था.

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