नया लक्ष्य बनाएं, जिंदगी को दें नई दिशा
नई दिल्ली, 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। बेकन ने कहा है, "बुद्धिमान व्यक्ति को जितने अवसर मिलते हैं, उससे अधिक तो वह स्वयं उत्पन्न करता है।" दृष्टिकोण आपके समूचे जीवन को निर्धारित करता है। आप आगे क्या बनेंगे, यह इस पर निर्भर करता है कि आज आप क्या सोचते हैं।
मनोविज्ञान कहता है कि हमारा मस्तिष्क हमारे शरीर को नियंत्रित करता है। इसीलिए अपने मस्तिष्क को स्वस्थ रखना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर आप खुश नहीं हैं, आपको जिंदगी से ढेरों शिकायतें हैं, साथ ही आपके सपने भी पूरे नहीं हो पाए तो सप्ताह के हर दिन एक नया लक्ष्य बनाएं और उसे शाम तक पूरा करने की कोशिश करें। आप अपने भीतर बदलाव महसूस करेंगे और अपनी जिंदगी को नई दिशा प्रदान कर सकेंगे।
1. कार्य करें पूरे उत्साह से
पहला दिन : रविवार की छुट्टी के बाद एक ताजा दिन की शुरुआत जल्दी उठकर करें। मार्निग वॉक, स्ट्रेचिंग करें या लॉन में टहलकर सुबह की ऑक्सीजन को सांसों में भरें। सोचें - आज दफ्तर की ढेरों, जिम्मेदारियां पूरी करनी हैं, क्योंकि मैं महत्वपूर्ण व्यक्ति हूं। मेरा कार्य ही सिद्ध करेगा कि मैं कैसा दिन बिता रहा हूं। दफ्तर पहुंचते ही समस्याएं, आरंभ-कम्प्यूटर में तकनीकी खराबी के कारण कार्य में देरी, तब सिस्टम ठीक होने तक कुछ ऐसे कार्य कर लें, जिन्हें काम के दबाव के चलते नहीं कर पाते।
कार्यो की सूची तैयार करें, जरूरी फोन करें, कार्य संबंधी सामग्री पढ़ें। हो सकता है आप आधे या एक घंटे की देरी से काम शुरू कर पाएं, लेकिन दबाव अनुभव करने से बचें। धर्य से कार्य शुरू करें, इस विचार के साथ कि आप समय प्रबंधन कर सकते हैं, देरी के बावजूद निश्चित कार्यो को निर्धारित समय पर पूरा कर लेंगे। खाली समय में कार्यो का मूल्यांकन करें, कार्य संबधी नई जानकारियां हासिल करें। हर दिन कुछ नया सीखना-करना आगे बढ़ने का हौसला देता है।
शाम को घर लौटकर कुछ देर अच्छी-सी पुस्तक पढ़ें, संगीत सुनें, माता-पिता, बच्चों से बातें करें। डायरी में ऐसे कुछ कार्यो के बारे में अवश्य लिखें, जो आज आपने किए। सोने से पहले ईश्वर को धन्यवाद देना न भूलें कि आप दिन-भर के लिए तय किए गए कार्य कर सकें।
2. खुद के बारे में रहें आशावादी
दूसरा दिन : बीते दिन की सफलताओं को याद रखें, विफलताओं को भूल जाएं। एक नई सोच के साथ दिन की शुरुआत करें, मैं आत्मविश्वासी हूं, समर्थ हूं। गलतियों से सबक लेना और खुद पर हंसना सीखें। जो खुद पर नहीं हंस सकते, वे न सिर्फ ज्यादा नकारात्मक होते हैं, बल्कि उन्हें स्ट्रोक, कैंसर, दिल्ली संबंधी रोगों की आशंका भी बढ़ जाती है। सोचें कि जीवन प्रयोगशाला है, जिसमें कभी अच्छे तो कभी बुरे प्रयोग होते हैं। इसके लिए मैं एक उदाहरण देता हूं।
मोहन ने बी.टेक. किया है, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिल पा रही है। कारण है- आत्मविश्वास की कमी। इंटरव्यू से पहले ही वह सोच लेता है कि नौकरी नहीं मिलेगी, लिहाजा टालू रवैये के साथ देरी से साक्षात्कार वाली जगह पहुंचता है। इतने दबाव में होता है कि कई बार सही जवाब मालूम होने के बावजूद नहीं दे पाता।
ये तमाम चीजें सामने वाले पर नकारात्मक असर डालती हैं और उसका चयन नहीं होता। जबकि मोहन का दोस्त इंटरव्यू के लिए पहले दिन से ही तैयारी करता है। जल्दी सोता है, अलार्म लगाकर जल्दी उठता है। ब्रेकफास्ट करता है, खुद को सज्जा-संवारकर आत्मविश्वास के साथ इंटरव्यू देता है। उसे विश्वास है कि नौकरी मिलेगी। कोई अचंभा नहीं कि इसी सोच के कारण उसे नौकरी मिलती भी है, मंगलवार का एक दिन खुद पर भरोसा रखने का है, इसे जगाने की हर संभव कोशिश करें।
3. दूसरों के बारे में बदलें अपनी राय
तीसरा दिन : मन से मिटाएं बैरभाव। पूर्वाग्रह को मन-मस्तिष्क में न आने दें। मित्रों, संबंधियों, सहकर्मियों के गुणों के बारे में सोचें। हो सकता है, किसी की मुस्कुराहट आपको भाती हो तो किसी की कार्यशैली। सभी में कोई गुण अवश्य होता है, उन्हें सराहें। इस अभ्यास का फायदा तब होता है, जब किसी मुश्किल व्यक्ति से सामना होता है। ऐसे लोगों के सामने आपके धर्य की परीक्षा होती है, आप विपरीत स्थितियों से निबटना सीखते हैं। दूसरों के बारे में अपनी राय और अपने बारे में दूसरों की राय बदलने का एक उदाहरण है।
सुप्रसिद्ध लेखिका कमला दास के पास एक किशोरी आई, जो जीवन से निराश थी, आत्महत्या करना चाहती थी, उसे लगता था कि उसकी छवि बुरी लड़की की है। कमला ने उससे कहा, "तुम जिन पांच बातों से सर्वाधिक घृणा करती हो, बताओ और वे पांच बातें बताओ जिनसे तुम्हें खुशी मिलती है।" लड़की ने कहा, "मुझे सिंदूरी आम बेहद पसंद है।" कमला ने फिर कहा, "आत्महत्या करने से पहले सिर्फ मेरी एक बात मान लो। कल सुबह सिंदूरी आम लेकर आंटी के घर जाओ।" लड़की चिल्लाते हुए बोली, "मैं उनसे घृणा करती हूं, क्यों जाऊं?" कमला ने किसी तरह उसे इस बात पर राजी किया।
एक हफ्ते बाद लेखिका को वह लड़की साइकिल चलाती हुई नजर आई तो उन्होंने चौंकते हुए पूछा, "तुम!" लड़की ने झेंपकर जवाब दिया, "वाकई !! कमाल की तरकीब बताई आपने, आंटी से मिलने के बाद ही पता चला कि वह कितनी अच्छी हैं। हमने दो तीन घंटे साथ बिताए और आम उन्होंने बहुत पसंद किए हैं। उन्हें भी आश्चर्य हुआ कि वह मुझे क्यों पसंद नहीं करती थी।" यह सिर्फ उदाहरण है लेकिन क्या इसे व्यवहार में उतारना मुश्किल है?
4. बुरी स्थितियों से उबरें :
चौथा दिन : क्या आप बुरी स्थिति के बारे में सोचते रहते हैं? अगर खराब संबंधों, आर्थिक समस्याओं के कारण आपको तनाव घेरे तो यह अभ्यास करें, आंखें बंद करके नन्हें बच्चों का चेहरा याद करें।
पत्नी या गहरे, मित्र के साथ बिताए पल याद करें। लंबी सांस लें, हल्के हाथ से चेहरे की मालिश करें, ताकि तनाव की लकीरें कम हो जाएं।
हर स्थिति से उबरा जा सकता है, इस बात को बार-बार दोहराएं। पांच-दस मिनट के अभ्यास के बाद महसूस करेंगे कि कई नकारात्मक विचार मस्तिष्क जेहन से निकल चुके हैं। एक और उदाहरण मैं इस बात को समझने के लिए देता हूं कि दुर्घटना में पिता को खोने के बाद प्रभा अवसाद से घिर चुकी थी। सबसे छोटी होने के कारण वह पिता की लाडली थी। हॉस्टल में थी, किसी से दुख बांट नहीं पाती थी, उसे चारों अंधेरा नजर आ रहा था।
ऐसे में उसने पिता की चिट्ठियां पढ़ीं, बचपन की तस्वीरें देखीं और बुदबुदाई- आपकी उम्मीदों को मैं पूरा करूंगी..। इस एक अभ्यास ने कुछ ही मिनटों में उसे एक हताश और दु:खी लड़की से एक जिम्मेदार व्यक्ति में बदल दिया।
5. कुछ शब्दों को निकालें मन से :
पांचवा दिन : काश! ऐसा होता.. ऐसा न होता। यदि मेरी नौकरी बेहतर होती, यदि लोग मेरी सुनते..ऐसे कई विचार सभी के मन में उठते हैं। लेकिन इसी के साथ यह भी जान लीजिए कि संतुष्टि या खुशी सिर्फ भावना नहीं सफल जीवन का रास्ता भी है। आज का दिन खुशियों के नाम करें, आज में जिएं। खुशी मन-मस्तिष्क की स्थिति है।
हम दिल्ली में हैं और मुम्बई जाना चाहते हैं, तो इसके लिए ट्रेन या प्लेन की जानकारी हासिल करनी होगी। यही बात विचारों की ट्रेन के बारे में कहीं जा सकती है। यही ट्रेन नहीं चुन सकते, तो मुंबई यानी अपनी मंजिल तक पहुंचने का ख्वाब छोड़ देना चाहिए। सही ट्रेन का टिकट है - कृतज्ञता।
यह कृतज्ञता का भाव ही खुशी का रास्ता है। नकारात्मक शब्दों को जीवन के शब्दकोष से मिटा दें और कृतज्ञता, जैसे धन्यवाद आदि शब्दों को जगह दें। जीवन ईश्वर का अनमोल तोहफा है। उस अनाम ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हों। माता-पिता, परिवार और समाज के प्रति आभार जताएं, जिनके कारण आज आपका वजूद है।
6. माहौल को बनाएं खुशगवार :
छठा दिन : माहौल तभी अच्छा होता है, जब स्वास्थ्य अच्छा हो, परिवार-समाज में सब सही हो। शनिवार का दिन व्यायाम या योग से शुरू करें। यदि हफ्ते के पांच दिन आप कार्य करते हैं तो इस छुट्टी को स्वास्थ्य, रुचियों, खान-पान और फिटनेस के लिए रखें। आस-पास के लोगों में घुले-मिलें, मित्रों-संबंधियों या माता-पिता से मिलें, संगीत सुनें, पेंटिंग करें, अच्छी पुस्तकें पढ़ें, सामाजिक कार्य करें। अपने भाग्य के निर्माता आप खुद हैं। भाग्य अच्छा होता है, जब कार्य को ढंग से पूरा करें। कार्य तभी ढंग से होगा, जब उसमें आनंद लें।
चुनौतियों को स्वीकारते हुए आनंद के साथ अपने कार्य को करें। नेपोलियन बोनापार्ट का कहना था- असंभव कुछ नहीं होता। कई बार छोटे या व्यर्थ लगने वाले कार्य भी बड़े होते हैं। वैज्ञानिक अविष्कार नहीं कर पाते, यदि उन्हें कुछ असंभव या व्यर्थ लगता।
शनिवार का दिन छोटी-मोटी खुशियों में बिताएं, माहौल भी अच्छा हो जाएगा।
7. घर-परिवार से पाएं उत्साह :
सातवां दिन : सरदार भगत सिंह कहते थे कि जिंदगी का लक्ष्य और कुछ नहीं जीवन ही हुआ करता है। हम जो कुछ कर रहे हैं, वह इसलिए कि हम और हमारी भावी पीढ़ियां बेहतर जिंदगी बिता सकें। समस्त कार्यो का अंतिम उद्देश्य आत्मसंतुष्टि है। वह तभी मिलता है, जब हम परिवार और आस-पास के लोगों को सुखी देखते हैं।
रविवार को सारे काम भूल कर परिवार के हो जाएं। यही वह जगह है, जहां आपकी सारी थकान, अवसाद और तनाव खत्म होता है। सुबह लंबी वॉक पर जाएं, साथ बैठकर ब्रेकफास्ट और लंच करें, फिल्म देखें, बच्चों के साथ खेलें, उन्हें कहानियां सुनाएं, पार्क ले जाएं। मोबाइल-लैपटॉप छोड़ें और वह सब करें - जो सुकून दें। बच्चों जैसे काम करें। खूब हंसें, शॉपिंग करें, घूमें, खेलें।
बेहतर जिंदगी का एक सूत्रीय फार्मूला है - प्रसन्न रहें। इसी प्रकार अपने पूरे सप्ताह, महीने और पूरे वर्ष को सुख तथा तनावरहित ढंग से बिताने का संकल्प लें।
(लेखक उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता के अचूक मंत्र' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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