सघन एकाग्रता बनाती है मेधावी

जोगिन्दर सिंह

नई दिल्ली, 23 दिसम्बर (आईएएनएस)। एकाग्रता एवं समर्पण से ही कोई व्यक्ति मेधावी बनता है। मेधावी बनने के लिए सघन एकाग्रता की आवश्यकता होती है। न्यूटन ने कहा था, "यदि मैंने विज्ञान के क्षेत्र में कुछ भी हासिल किया है तो इसका सबसे ज्यादा श्रेय धर्यपूर्ण एकाग्रता को जाता है।"

एकाग्रता सफलता का एक रहस्य है। दुनिया की सारी उपलब्धियां चाहे वह कला, विज्ञान, साहित्य या सैन्य क्षेत्र में हों, ये सभी एकाग्रता की शक्ति पर आधारित हैं। एकाग्रता का मतलब है किसी व्यक्ति की सारी शारीरिक एवं मानसिक ऊर्जा का उस चीज पर टिक जाना जो उसे करना है या कर रहा है।

इसके लिए आवश्यक है कि आप उन चीजों को अपने दिमाग से बाहर रखें जिनसे आपका सरोकार नहीं है। इस तरह आप अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। एकाग्रता के बगैर पतली रस्सी पर चलना, शारीरिक करतब दिखाना एवं संतुलन के कारनामे करना संभव नहीं है। ऐसे कामों में उच्च कोटि की एकाग्रता की जरूरत होती है।

क्षणिक मानसिक भटकाव भी ऐसे कामों में असफलता के लिए काफी होते हैं। यहां तक कि हमारे प्रदर्शन भी एकाग्रता द्वारा नियंत्रित होते हैं। जो लोग जीवन में सफल हुए हैं उनके लिए एकाग्रता सबसे महत्वपूर्ण बौद्धिक चीज थी। एकाग्रता मूलत: सारे मानसिक शक्तियों एवं संकायों को एक साथ बिना क्षणिक भटकाव के एक विचित्र दिशा में एक निश्चित उद्देश्य के लिए अग्रसर करना है।

यदि हमें एकाग्रता को सीखनी है तो हमें यह बात माननी चाहिए कि हम उन्हीं चीजों पर ध्यान देंगे जो हमें करना है या करना चाहते हैं। हमें इस बात की आदत डालनी चाहिए कि हम एक बार में एक ही काम करें। आरामदायक अवस्था में रहना एकाग्रता में काफी सहायक होता है। तनावग्रस्त होकर हम अपनी ऊर्जा का क्षरण करते हैं।

विद्यार्थियों को भी परीक्षा से पूर्व पूरा आराम करने की सलाह दी गई है। कई बार किसी बड़े कार्य से पूर्व का आराम हमारी सफलता-असफलता निर्धारित करता है। बिना किसी आराम के लगातार तनावपूर्ण स्थिति में रहना क्रमिक थकान एवं मानसिक रोग का कारण बन सकते हैं। यदि ऐसा न भी हो तो हमारा काम निम्नस्तरीय एवं संतुष्टिदायक नहीं होता है।

हर व्यक्ति अलग-अलग तरह से आराम करते हैं। हरेक व्यक्ति का अंदाज एक-दूसरे से जुदा एवं अदभुत होता है। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए आराम करने के तरीकों में चुटकुले की किताब पढ़ना, अन्य हास्य व्यंग्य की किताब पढ़ना या फिर हास्य फिल्में देखना शामिल हैं।

यदि हमारा दिमाग जल्दबाजी, चिंता एवं भय से ग्रस्त है तो हम एकाग्र नहीं हो सकते हैं। ये विशिष्ट प्रकार के जहर एवं अपंगता लाने वाले तत्व हैं। न केवल ऐसी जहरीली चीजें, बल्कि ऐसे लोगों को जो आपको परेशान करते हैं उन्हें अपने जीवन से दूर करने की जरूरत है।

हमें शांत मानसिक अवस्था की आवश्यकता होती है, ताकि हम प्रतिदिन लिख सकें यद्यपि कुछ लोग ऐसी मानसिकता विकसित कर लेते हैं जहां वे शोरगुल, ट्रैफिक में भी काम कर सकते हैं।

किसी भी मुद्दे पर एकाग्रता को जितना संभव हो सके उसे हितकारी बनाना चाहिए। अच्छी परिस्थितियों में भी एकाग्रता मुश्किल होती है। लेकिन शोर-गुल, भटकावों एवं व्यवधानों से दूर एक शांत स्थान एकाग्रता के लिए उपयुक्त होता है। एक छात्र एवं सरकारी अधिकारी दोनों ही रूपों में मैंने महसूस किया कि यदि मुझे अपनी पढ़ाई या किसी समस्या पर एकाग्र होना होता तो एक शांत जगह बिल्कुल उपयुक्त होती थी, जो कि काफी सहायक भी होती थी।

न केवल नए लोगों के लिए, बल्कि अधिकांश लोगों के लिए उनके रचनात्मक कार्यो एवं सोच के लिए शांत एवं सुखद वातावरण की आवश्यकता होती है। उच्च कोटि की एकाग्रता ही अद्भुत चीजें पैदा कर सकती है या किसी विषय में सिद्धहस्त बना सकती है।

हर व्यक्ति की वातावरणीय आवश्यकताएं एक-दूसरे से भिन्न होती हैं। जैसे मुझे संतुलित तापमान में काम करना अच्छा लगता है जो कि 22 सेंटीग्रेट सेल्सियस के आसपास हो और अपने आराम कुर्सी या सोफे पर बैठा हूं तथा मेरा लैपटॉप मेरी गोद में। काम करते समय मैं टीवी, डीवीडी, मोबाइल आदि बंद कर देता हूं। उस समय के सारे कॉल ऑसरिंग मशीन पर निर्देशित कर देता हूं। जैसे लोग अपनी सुविधानुसार मुझसे बातें करते हैं।

कई हैं जो अपने बिस्तर पर बेड के नीचे बैठकर काम करना पसंद करते हैं। यह हम प्रत्येक पर निर्भर करता है कि एकाग्रता के लिए हमें कैसी जगह चाहिए। मगर साधारणत: सर्वश्रेष्ठ काम एकांत में ही किए जाते हैं।

एकाग्रता कायम करने के लिए आवश्यक है कि आप पहले से निर्धारित कर लें कि आपको किसी पर ध्यान केंद्रित करना है। यदि आप पूरी योजना के साथ कार्य प्रारंभ नहीं करते हैं तो संभव है कि आप फोन कॉल का जवाब देने, पेपर पत्रिका पढ़ने, ई-मेल देखने या स्नैक्स खाने आदि ऐसे कामों में अपना समय बर्बाद करेंगे।

कुछ लोग जिनके पास कुछ करने को नहीं होता है या फिर कोई निर्धारित लक्ष्य नहीं होता है, किसी भी दिन की शुरुआत करने से पहले ये निर्धारित करें कि दिन भर क्या-क्या करना है और उनमें से किन सबसे महत्वपूर्ण चीजों पर विशेष ध्यान देना है। सबसे पहले अपनी योजना तैयार करें।

किसी निश्चित उद्देश्य या लक्ष्य के बगैर आप अपनी पूरी ऊर्जा एवं समय लगाने के बावजूद आपको कई प्रकार के भटकाव को झेलना पड़ेगा।

सही कार्य योजना तैयार करने से आपको पता होता है कि आपको अपनी मानसिक ऊर्जा कहां खर्च करनी है जो आपको इसके अपव्यय से बचाती है। हमारा दैनिक कार्यक्रम हमें किसी एक सबसे महत्वपूर्ण कार्य पर ध्यान केंद्रित करने में मददगार होता है और हम अपने कामों को उनके महत्व के आधार पर क्रमश: करते जाते हैं। यह किसी प्रकार के संदेह या भटकाव से बचाता है। एक कार्य योजना तैयार कर उसके अनुरूप कार्य करना जो कि हमारे लिए महत्वपूर्ण है, हमारी एकाग्रता के लिए वरदान है।

किसी भी कार्य की गुणवत्ता एवं उत्पादकता न केवल हमारी मेहनत पर निर्भर करता है, बल्कि उसके साथ हमारे एकाग्र होने की क्षमता भी मायने रखती है। हम चाहे जितनी भी मेहनत कर लें पर जब तक हम उसमें एकाग्रता को शामिल नहीं करेंगे, उसमें महारत हासिल नहीं कर सकते हैं।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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