खोजिए अपनी ऊर्जा के स्रोत

जोगिन्दर सिंह

नई दिल्ली, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। युवावस्था में भी काम करने के लिए कठिन परिश्रम की आवश्यकता होती है, ताकि हम मनचाहा फल पा सकें। हममें से ज्यादातर लोग इस बात पर विचार नहीं करते कि ये ऊर्जा उनमें कहां से आती है।

हम अपनी ऊर्जा एवं एकाग्रता आदि को यूं ही लेते हैं। यह तब तक चलता रहता है जब तक हम बीमार न पड़ जाएं या किसी मानसिक रोग से ग्रस्त न हो जाएं और फिर ऐसा महसूस करें कि अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए अब ऊर्जा शेष नहीं है।

जब तक हम किसी चीज को खोजते नहीं हैं, तब तक हम उसके महत्व को नहीं समझते हैं। जब तक डायरिया से पीड़ित नहीं हुआ, तब तक मैंने भी नहीं सोचा था कि ऊर्जा आती कहां से है। वास्तव में ऊर्जा प्राप्ति के लिए आपको कुछ चीजें करने एवं कुछ छोड़ने की जरूरत है। मगर कुछ करने से पूर्व चूंकि हम सभी अपने आप में विशिष्ट हैं, इसलिए हमें उन चीजों को खोजना चाहिए जो हमारे लिए ऊर्जा के स्रोत हो सकते हैं और क्या नहीं हो सकते हैं।

हमें इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि आपको अपने आप को कब रिचार्ज करना है। ये चीजें व्यक्ति से व्यक्ति तक बदलती हैं। इसके लिए कोई निर्धारित नियम नहीं है कि क्या आपको ऊर्जावान बना सकता है या क्या आपके हित में नहीं है। यह बिजली के बोर्ड में प्लग लगाने जैसा बड़ा है। उसमें समय लगता है, पर आप उन पर विचार कर सकते हैं। आपको पुराने नुस्खे आजमाने होंगे। कुछ समय में आप समझ जाएंगे कि क्या आपको ऊर्जावान बनाती है और क्या ऊर्जा विहीन।

कोई भी चीज आपको नीचे की और ले जाती है या अपमानित सा महसूस कराती है तो यह एक प्रकार का ऊर्जा क्षरण है। किसी भी ऊर्जादायक गतिविधि की पहचान यह है कि ये आपको अच्छा महसूस कराती है और आप इसे आनंदपूर्वक करते हैं। किसी भी काम का मजा उठाने के लिए जरूरी है कि आप उसे करने में अच्छे हों।

अलग-अलग गतिविधियां अलग-अलग लोगों को अलग-अलग समय पर ऊर्जा प्रदान कराती हैं। मेरे जैसे कुछ लोग हैं जिन्हें हास्य-विनोद की किताबें पढ़ना एवं फिल्म देखना अच्छा लगता है। कई लोगों को आराम के लिहाज से, इधर-उधर की बातें करना, पेंटिंग करना आदि अच्छा लगता है तो कई ध्यान करना, टहलना, दौड़ना, नाचना-गाना, संगीत सुनना या प्रकृति को निहारना पसंद करते हैं।

सबसे अच्छा है कि आप इन चीजों को लिखें जिनसे आपको काफी आराम मिलता है और उनको करें तथा अधिक बेहतर बनाने की कोशिश करें। एक बार जब आप जान जाते हैं कि आपको कौन सी चीज ऊर्जा देती है उसके बाद की चीज है कि आप रिचार्ज होने के प्रति जागरूक रहें। हम सब को रिचार्ज होने में अलग-अलग समय लगता है। केवल थोड़ा आराम करने एवं पानी पीने में मुझे 14 मिनट लगते हैं। मगर साथ ही साथ याद रहे कि हमारे विश्वास का स्तर हमेशा ऊंचा रहना चाहिए।

अपनी महत्वाकांक्षा को संभालना आवश्यक है। यह एक सच्चाई है कि ज्यादा वजन मिलने के लिए हम कड़ी मेहनत करते हैं। एक प्रकार की अनियंत्रित महत्वाकांक्षा आपको ज्यादा काम करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है, मगर साथ ही साथ यह घातक भी है। उस सफलता का क्या महत्व जिसका आप जश्न नहीं मना सकते हैं, क्योंकि या तो आप बीमार होते हैं या फिर आप में इतनी शारीरिक क्षमता नहीं होती कि आप खुशी मना सकें।

अपने प्रयासों में संतुलन बनाइए। समय-समय पर इस बात की पड़ताल कीजिए कि क्या निर्धारित समय सीमा में अपेक्षित परिणाम आपने पाया है? काम को बांटिए, मगर उससे भागिए मत। दोनों में स्पष्ट अंतर है, क्योंकि यह जिम्मेवारी अंतत: बॉस की ही होती है। किसी उद्देश्य की प्राप्ति के साथ-साथ उसमें लगे लोगों के मार्गदर्शन एवं देखभाल की जिम्मेवारी भी उसी की होती है।

हम सर्वज्ञ नहीं हो सकते हैं। यदि हम किसी चीज को नहीं जानते तो अच्छा ये है कि हम ऐसे आदमी को खोजें जो उसे अच्छे से कर सकता है। या तो आप उनसे काम करवा लें या फिर इस बात को सीखने की कोशिश करें कि उन्होंने इसमें महारत कैसे हासिल की। उसके बाद उन उपायों को आजमाइए। अक्सर हम अपनी दिनचर्या को इतना व्यस्त कर देते हैं कि अपने कौशल में और सुधार लाने के लिए हमारे पास समय ही नहीं होता है।

1961 में जब मैं भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुआ था तो अफसरों के लिए अपने पत्र स्वयं टाइप करना उनकी शान के खिलाफ समझा जाता था। ये सारे काम अलिखित कानून थे कि अफसर केवल डिक्टेट करेगा और कोई अन्य उसे टाइप करेगा। टाइप करना एक निम्नस्तरीय लिपिक का काम समझा जाता था। मेरे साथ-साथ सभी अफसरों को टाइप नहीं आता था। यह सिलसिला अगले तीन दशकों तक चलता रहा, जब तक कि देश में कम्प्यूटर एवं लैपटॉप नहीं आ गए। अब अफसरों के कम्प्यूटर सीखने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

मुझे मेरे एक निजी सचिव ने टाइपिंग सीखने के लिए तकरीबन बाध्य किया था, क्योंकि मैं खुद अपनी लिखावट को पढ़ नहीं पाता था। इस चीज ने मुझे लेखक एवं कम्प्यूटर का जानकार बना दिया। मूल बात यह है कि हमें खुले दिमाग का होना चाहिए।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि. से प्रकाशित उनकी पस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+