चंद्रबाबू नायडू आमरण अनशन पर

चंद्रबाबू आमरण अनशन पर
उमर फ़ारूक़

बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद

चंद्रबाबू नायडू ने किसानों के लिए कई मांगें रखी हैं. आंध्र प्रदेश में हाल की बारिश और बाढ़ से प्रभावित किसानों की समस्याएँ अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन गई हैं. एक और विपक्ष के नेता और तेलुगू देशम पार्टी के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है.

उनका आरोप है कि राज्य और केंद्र सरकारें तबाह हाल किसानों की सहायता करने में असफल हो गई हैं. दूसरी ओर कांग्रेस के बाग़ी नेता और पूर्व सांसद वाईएस जगन मोहन रेड्डी भी 21 और 22 दिसम्बर को 48 घंटों की भूख हड़ताल करने वाले हैं. घोषणा की गई है कि इस भूख हड़ताल में उनके साथ एक लाख समर्थक भी शामिल होंगे.

हैदराबाद में न्यू एमएलए क्वार्ट्स में आमरण अनशन पर बैठने से पहले चंद्रबाबू नायडू ने महात्मा गांधी और बीआर अंबेडकर की प्रतिमाओं पर फूल चढ़ाए और एनटीआर की समाधि पर भी गए. घर से निकलने से पहले उनकी पत्नी ने उन्हें आरती उतारकर विदा किया. भूख हड़ताल कैंप पर जमा अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वो किसानों के लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार हैं क्योंकि इस समय किसान बहुत ही ख़राब परिस्थितियों से गुज़र रहे हैं.

जगन मोहन ने भी भूख हड़ताल करने की घोषणा की है. चंद्रबाबू ने कहा की हाल के तूफानी बारिश और बाढ़ में लगभग 60 लाख एकड़ पर खड़ी फसल नष्ट हो गई और किसान पूरी तरह तबाह हो गए.

उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने फसल के लिए ऋण लिया था या जो दूसरों की भूमि पर खेती कर रहे थे उनके हालात तो इतने ख़राब हो गए हैं कि वो आत्महत्या कर रहे हैं. उनकी मांग है कि सरकार किसानों को धान की फसल के लिए दस हज़ार रुपये प्रति एकड़ और तंबाकू और मिर्च जैसी वाणिज्यिक फसलों के लिए पंद्रह हज़ार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवज़ा अदा करे.

उन्होंने कहा कि पानी में भीगने से ख़राब हुए धान को भी सरकार को ख़रीदना चाहिए. चंद्रबाबू ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र और राज्य सरकार किसानों की सहायता के लिए आगे नहीं आती हैं तो किसान रबी के मौसम में खेती नहीं कर सकेंगे. भूख हड़ताल के पहले दिन चंद्रबाबू के साथ उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी भूख हड़ताल पर बैठे. इसके अलावा उनके समर्थन में राज्य में तेलुगू देशम पार्टी के कार्यकर्ताओं और किसानों ने भूख हड़ताल की और प्रदर्शन किए.

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ नेता एबी बर्धन ने भी कैंप जाकर चंद्रबाबू का समर्थन जताया और कहा कि चंद्रबाबू अपने लिए नहीं बल्कि हज़ारों-लाखों किसानों के लिए आमरण अनशन पर बैठे हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी ने चंद्रबाबू के आमरण अनशन को राजनीति से प्रेरित बताया.

दो मंत्रियों कन्ना लक्ष्मी नारायण और डी श्रीधर बाबू ने कहा कि सरकार पहले ही किसानों के लिए एक पैकेज की घोषणा कर चुकी है और ख़राब धान ख़रीदने के लिए क़दम उठा रही है. कांग्रेस ने चंद्रबाबू से पूछा है कि जब वो नौ वर्ष तक राज्य के मुख्यमंत्री थे तब उन्हें किसानों की सहायता करने का ख़्याल क्यों नहीं आया. कांग्रेस ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों की दोस्त है और उनकी सहायता के लिए हमेशा तैयार है. लेकिन कांग्रेस को किसानों के विषय पर एक और दिशा से हमले का सामना करना पड़ रहा है.

कांग्रेस के बाग़ी नेता और पूर्व सांसद जगन मोहन रेड्डी ने भी कांग्रेस सरकार पर किसानों को अनदेखा करने का आरोप लगाया है. जगन पहले ही से तटीय आंध्र के उन ज़िलों का दौरा कर रहे हैं जहाँ किसानों को ज़्यादा नुक़सान पहुँचा है.

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