खुद करें अपने कार्य की जांच

जोगिन्दर सिंह

नई दिल्ली, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। जो कल तुम्हारे लिए ठीक या सही था, आज वह अनुकूल नहीं रह गया है। न केवल सिद्धांत और धारणा, बल्कि तकनीक भी पुरानी एवं प्रचलन से बाहर हो गई है। रेलगाड़ी का भाप इंजन भी डीजल इंजन और अब इलेक्ट्रिक इंजन के द्वारा बदला जा चुका है।

पुराने और प्राचीन टेलीफोन सेट भी अब न केवल सूबसूरत मॉडल, बल्कि मोबाइल फोन जिसमें कि अविश्वसनीय एवं अकल्पनीय सुविधाएं जैसे रेडियो, कैमरा, रिकार्डर और एमपी 3 व 4 मूवी प्लेयर और ईमेल इत्यादि सेवाएं मौजूद हैं। तेज कम्प्यूटर ने टाइपराइटर को पुराना और चलन से बाहर कर दिया है।

मेरे पास घर में तीन टाइपराइटर हैं जो कि मैं विदेश से लाया था वह भी चार दशक पहले। लैपटॉप के आ जाने से कई सुविधाएं हो गई हैं। इससे जीवन सरल और आसान हो गया है। कुछ भी लिखें और चाहें तो इसे सुधार लें या शब्दकोश में देख लें या चित्र में इस्तेमाल कर लें सबकुछ उसमें मौजूद है।

हमें पुरानी विचारधाराओं को तोड़ना जिससे के हम विकास के प्रति घनिष्ठ और सुकून में है। हमें बदलते आज का सामना करना है। जो अर्थहीन है उसे रखकर कोई फायदा नहीं। यदि हमें आगे बढ़ना है तो हमारे लिए वर्तमान जरूरी है। हम सबको यह अधिकार है कि हम जिस दिशा में चाहें आगे बढ़ें। हरेक क्षेत्र में बहुत संख्या में विशेषज्ञ हैं चाहे वह एॅरोनाटिकल का क्षेत्र हो या तेज-तर्रार काम करने का या नई चीज बनाने का या यांत्रिक कार्य का।

मध्यकाल में रेफ्रीजरेटर या ठंडा या गर्म वातानुकूलक नहीं होता था। मुगल गर्मी में खुद को ठंडा रखने के लिए कश्मीर की पहाड़ियों के बर्फ का प्रयोग करते थे। यह प्राचीन व बेवकूफी भरा लग सकता है पर दूसरा कोई रास्ता नहीं था। इसलिए बदलाव हमेशा नकारात्मक नहीं होता, हां ये है कि हम सब समय-समय पर बदलाव का विरोध करते हैं।

यहां तक कि हम भूत को दिमाग में रखकर ही वर्तमान में जीते हैं या भविष्य के बारे में सोचते हैं। हमें निरंतर अपने कार्य का आत्मनिरीक्षण एवं जांच करनी चाहिए कि दिन के अंत तक हमने क्या विकास किया है। चाहे हम इसे पसंद करें या न करें परिवर्तन का नियम परस्पर चलता रहता है। केवल वे जो परिवर्तन को अपना लेते हैं वो इस संसार में ताकतवर व बुद्धिमान होते हैं।

दुनिया में जो अपना गुजारा करता है या बुद्धिमान है सबसे मजबूत है पर वो जो बदलाव को अपना लेता है। यदि हम कोई उद्देश्य अपने लिए पाना चाहते हैं तो हमें जो बनना है उसके लिए जो है उसका त्याग करने के लिए इच्छा होनी चाहिए। किसी विद्यार्थी की इच्छा पढ़ाई में अच्छा करने की होती है। लेकिन यदि वह अपना सारा समय सिनेमा देखने और बात करने में बिताता है तो वह अपना समय बेकार के कामों में व्यर्थ करेगा न कि पढ़ाई में। जीवन में प्रयोग कर सकते हैं चाहे तो किसी खास घटना या कार्य पर यह सब पर प्रयोगात्मक है कि आप क्या पाना चाहते हैं।

जीवन में बहुत से लोग अपना समय समाजसेवा में बिताते हैं। वास्तव में यह समाज सेवा नहीं है बल्कि यह एक तरीका है समय काटने का। एक मेरे अमीर मित्र मदन लाल अग्रवाल ने एक बार मुझसे यह शिकायत की कि उनके पास ज्यादा कुछ काम करने के लिए नहीं है एवं समय काटने के लिए भी कोई रास्ता नहीं है। मैंने उनसे पूछा कि आप पिछले सप्ताह अपना समय कैसे काटे, उन्होंने कहा पिछले सप्ताह सोहन लाल की मृत्यु हो गई थी। इसलिए उनका दाह संस्कार और अन्य कार्यक्रमों ने पूरा सप्ताह ले लिया।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि. से प्रकाशित उनकी पस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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