जितनी खुशी लुटाएंगे, उतनी ही पास आएगी
नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। स्वामी रामेश्वर जब अपने आपको बादशाह कहते थे, तब लोग उन्हें हैरानी से देखते थे। एक बार वह अमेरिका गए, तब उनके पास कुछ भी नहीं था और अपनी खुद की चीजों के नाम पर बस दो लंगोटियां थीं।
एक फक्कड़ को बादशाह कहते सुन किसी विदेशी ने आश्चर्य से पूछा, "स्वामी जी, आप किस तरह के बादशाह हैं? कौन-सी दौलत है आपके पास? कौन सा राज्य है आपका? जहां तक मुझे पता चला है, आपके पास कुछ भी तो नहीं है, सिर्फ दो लंगोटियों के अलावा।"
हंसते हुए स्वामी रामेश्वर ने जवाब दिया, "अभी थोड़ी-सी कमी रह गई है, मेरे राज्य में। यदि दो लंगोटियां भी छूट जाएं, तो मेरा राज्य पूरा हो जाए।"
इतना कहकर स्वामी जी ने वे दो लंगोटिया भी दूर फेंक दीं। विदेशी हैरानी से उन्हें देखता रहा। स्वामी जी ने नग्न अवस्था में कहा, "अब मैं सचमुच का बादशाह हूं, क्योंकि मेरे पास खोने को कुछ नहीं है और इस हॉल में भी बहुत खुश हूं।"
इसलिए खुश रहने की आदत डालिए और नीचे लिखे गुरुमंत्रों का उच्चारण कीजिए :
* खुशी का प्रदर्शन ही हंसी है और जहां हंसी है, वहां प्रसन्नता और सफलता है, क्योंकि हंसना ही आपकी आंतरिक प्रसन्नता को उजागर करता है।
* खुशी कोई अपने आप आने वाली चीज नहीं है, इसके लिए आपको लगातार कोशिश करनी पड़ेगी, क्योंकि जब आप अपने लक्ष्य में सफलता प्राप्त करने लगते हैं, तब आपके चेहरे पर खुशी खुद ही प्रगट हो जाती है।
* आपकी खुशी आनंद, जुड़ाव और औचित्य जैसे तत्वों पर निर्भर करती है। इसलिए तुरंत चेक कीजिए कि क्या इन तीनों का उचित अनुपात आपके जीवन में मौजूद हैं।
* खुशी को आप जितनी अधिक लुटाएंगे, उतनी ही वह आपके पास अधिक आएगी। कभी पैसे के रूप में, तो कभी सफलता के रूप में।
* जिंदगी में खुश रहने के दो तरीके हैं। पहला, सब लोगों पर यकीन करना और दूसरा, सब लोगों पर संदेह करना। ये दोनों तरीके ही आपको तनाव से बचाएंगे।
* जिंदगी को खुशियों और उपलब्धियों के उजाले से रोशन करने के लिए, आपको अपने भीतर आत्मविश्वास का दीपक जलाना होगा।
* खुशी कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसका आप अनुभव कर सकें। लेकिन उसे याद आवश्य कर सकते हैं, क्योंकि खुशी हमेशा यादों के झरोखों से आपके दिल में प्रवेश करती है।
* बड़ी खुशी और कामयाबी तब मिलती है, जब आप अपनी आंतरिक योग्यताओं को पहचान लेते हैं और फिर उन्हें आधार बनाकर आगे बढ़ते जाते हैं।
* अपने काम को आप जितने बेहतर तरीके से कर सकें, उतना ही अच्छा। लेकिन उसी काम को यदि खुशी के साथ करेंगे, तो निश्चित रूप से आपको जिंदगी के सफर में खुशियां मिलती रहेंगी। खुश रहना एक मंत्र है और खुश रहने के लिए मुस्कुराना मूलमंत्र है।
आप खुश हैं तो मानिए संसार खुशियों से भरा है और खुश रहने वाले के लिए संसार में हर मौसम हरा है। दुनिया में कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है, परंतु खुशियां पाने के लिए सिर्फ खुश रहना होता है। इसलिए खुश रहने वाला सारे अवगुण त्याग देता है और देवताओं के समान स्वर्ग की खुशियां पा लेता है।
* जिस तरह नदियां अपने जल को समुद्र में बहाकर ले जाती हैं, वैसे ही प्रसन्नता मनुष्य को वहां पर पहुंचा देती है, जहां से खुशियां शुरू होती हैं।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'सीकेट्र्स ऑफ सक्सेस' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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