आपका व्यवहार ही सफलता का प्रतिबिम्ब
तरुण इन्जीनियर
नई दिल्ली, 14 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्राचीन यूनान में डायोजीनस को महान दार्शनिक के रूप में जाना जाता था और विश्व विजेता सिकंदर उन्हें अपना गुरु मानता था। कहते हैं कि सिकंदर किसी भी विजय अभियान पर निकलने से पहले अपने गुरु के पास जाता था और उनका आशीर्वाद लेता था।
डायोजीनस आशीर्वाद तो देता था, लेकिन जीत का नहीं, बल्कि उस समय की किसी घटना या स्थिति को सुलझाने के लिए प्रेरित करता था।
सिकंदर काफी हद तक उसका पालन भी करता था। डायोजीनस की विशेषता यह थी कि उन्होंने अपने लिए कुछ भी इकट्ठा नहीं किया था। यहां तक की कपड़े भी नहीं, क्योंकि वे पूरी तरह दिगम्बर यानी नागे थे और समुद्र के तट पर पत्थर के एक टब में बैठकर दिनभर चिंतन-मनन करते थे।
सिकंदर ने कुछ ही सालों में यूनान और आसपास के अधिकतर क्षेत्रों को जीत लिया था, जिसकी वजह से उसे अपने नेतृत्व, शौर्य, युद्ध कला और पराक्रम पर गर्व होने लगा था। इसलिए वह डायोजीनस से मिलने में कतराता था।
एक दिन सिकंदर ने सोचा कि अभियान पर निकलने से पहले वह डायोजीनस का आशीर्वाद लेगा। फिर वह उस जगह पर गया, जहां डायोजीनस पानी भरे टब में नग्न अवस्था में लेटे थे।
उनके पास जाकर सिकंदर ने कहा, "मैं यूनान का राजकुमार सिकंदर हूं और मैं पूरे विश्व को जीतने के लिए जा रहा हूं। मेरा अभिवादन स्वीकार करो और बताओ, मैं कौन-सी रणनीति अपनाऊं।"
डायोजीनस ने उसकी बात अनसुनी कर दी। सिकंदर आश्चर्य चकित था। क्योंकि आज तक किसी ने उसकी ऐसी अवहेलना नहीं की थी। डायोजीनस ने गंभीर मुद्रा में उसकी ओर देखा, परंतु चुप रहे।
सिकंदर को डायोजीनस की चुप्पी पर हैरानी हुई। उसने अपनी बात फिर से दोहराई।
डायोजीनस ने लेटे-लेटे एक बार फिर देखा और बोले, "कौन सिकंदर? सामने से हट जाओ और धूप आने दो।"
डायोजीनस की बात सुनकर सिकंदर वहां से वापस चला गया और महल में जाकर अपने मंत्री से बोला, "काश! मेरा व्यवहार अच्छा होता, तो आज गुरुजी से अपमान नहीं सहना पड़ता।"
इसलिए अपने व्यवहार को अच्छा रखिए और नीचे लिखे गुरुमंत्रों को दोहराइए :
* आपका व्यवहार आपके जीवन की नींव है, इसलिए अपने व्यवहार को ऊंचा रखिए, क्योंकि आपका लक्ष्य भी इसी नींव पर टिका हुआ है।
* किसी भी व्यक्ति को अपने व्यवहार में भोलापन नहीं दिखाना चाहिए, क्योंकि जंगल में सबसे सीधे दिखने वाले पेड़ पहले काटे जाते हैं और भोले लोगों को सबसे पहले निशाना बनाया जाता है।
* आप कैसा सोचते हैं, कैसा महसूस करते हैं? यह आपके व्यवहार पर निर्भर करता है, क्योंकि हर व्यक्ति की मानसिक संरचना अलग होती है।
* आपका व्यवहार आपके शब्दों और कार्यो से अधिक ऊंचे स्वर में बोलता है, क्योंकि आपका व्यवहार आपकी सफलता का प्रतिबिम्ब होता है और प्रतिबिम्ब कभी झूठ नहीं बोलता।
* आपका व्यवहार आपके कामों से बड़ा है। इसलिए आपके शब्द व्यवहार के सामने छोटे पड़ जाते हैं।
* ज्ञान आपका मस्तिष्क है, दर्शन आपका हृदय है और व्यवहार आपके हाथ पैर हैं। फिर जब ये तीनों एक लय में काम करते हैं, तब आप सफल हो जाते हैं।
* जीवन में देना सीखो, लेकिन लेना भूल जाओ। देकर कभी मत जताओ। लेने के लिए कभी मत सताओ। कम बोलो धीरे बोलो, परंतु सटीक बोलो। जल्दी सोचो अच्छा सोचो, मगर कुछ सोचो। ज्यादा सुनो, सबकी सुनो, लेकिन मन की करो।
* गरीबी का मतलब कुछ भी हो, लेकिन उसे हमेशा नजरअंदाज करना चाहिए। इसीलिए मैं आपसे कहता हूं, लगे रहो मुन्नाभाई! क्योंकि कहावत है कि बारह साल बाद तो कूड़ी यानि कूड़े के ढेर के भी भाग्य जाग जाते हैं।
* मैंने ऐसा गधा कभी नहीं देखा है, जो मनुष्य की तरह बातें करता हो, लेकिन ऐसे तमाम लोगों से मैं मिला हूं, जो गधों की तरह बातें करते हैं।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'सीकेट्र्स ऑफ सक्सेस' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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