क्रोध को पीना सीखिए, रहेंगे खुशहाल
तरुण इन्जीनियर
नई दिल्ली, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। एक गाड़ी वाला जंगल से लकड़ियां भरकर घर की ओर लौट रहा था। रास्ते में उसे एक नाला पार करना था, लेकिन नाले में कीचड़ होने के कारण गाड़ी का पहिया उसमें फंस गया।
गाड़ी वाला क्रोधित होकर बैलों को मारने-पीटने लगा, लेकिन पहिया कीचड़ से बाहर नहीं निकला। गाड़ी वाला सहायता के लिए इधर-उधर देखने लगा, पर उसे घने जंगल में उसे कोई दिखाई नहीं दिया।
आखिर में वह अपने देवता को पुकारने लगा, "हे भगवान! मेरी सहायता करो और मेरी गाड़ी कीचड़ से बाहर निकाल दो। मैं तुम्हें प्रसाद चढ़ाऊंगा।"
देवता ने गाड़ी वाले की पुकार सुन ली और तुरंत उसके सामने आकर बोले, "क्या चाहते हो, बोलो?"
गाड़ी वाले ने कहा, "भगवान मेरी कीचड़ में फंसी गाड़ी निकाल दो, मैं आपको प्रसाद चढ़ाऊंगा।"
देवता हंसकर बोले, "लेकिन बैलों को क्यों मार रहे हो? खुद पहिये पर जोर लगाओ और बैलों को भी ललकारों, फिर देखों गाड़ी कीचड़ से बाहर निकलती है या नहीं।"
यह सुनते ही गाड़ी वाला ने पहिये पर जोर लगाया और बैलों को भी ललकारा, फिर गाड़ी बाहर आ गई। गाड़ी वाला खुश होकर बोला, "भगवान, आपने मेरी गाड़ी कीचड़ से निकाल दी, मैं अभी आपको प्रसाद चढ़ाता हूं।"
तब देवता ने कहा, "मुझे प्रसाद की जरूरत नहीं है, क्योंकि मैंने तुम्हारी गाड़ी नहीं निकाली, तुमने खुद ही अपनी गाड़ी निकाली। अब तुम सिर्फ अपने क्रोध पर कंट्रोल रखो। क्योंकि मैं उसकी सहायता करता हूं, जो अपने आप को संयम में रखता है।"
इसलिए क्रोध को दूर भगाईए और संयम में रहना सीखिए। फिर नीचे लिखे गुरुमंत्रों को दिल में उतारिए :
* क्रोध ऐसा जहर है, जिसे पीने के बाद तरक्की के मार्ग खुलते हैं, फिर आप वहीं बन जाते हैं, जो आप बनना चाहते हैं।
* क्रोध, चिड़चिड़ापन और संकुचित दृष्टिकोण से मानसिक शक्तियां नष्ट हो सकती हैं। इसलिए अपने व्यक्तित्व में गंभीरता लाइए और भावनाओं पर नियंत्रण रखना सीखिए।
* जब किसी व्यक्ति को आप पर क्रोध आता हो, तब आप उसके सामने से तुरंत हट जाओ। फिर उसका क्रोध धीरे-धीरे कम होता चला जाएगा।
* क्रोध मनुष्य को लक्ष्य से भटकाता है, लेकिन जब आप लक्ष्य प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प लेते हैं, तब क्रोध कमजोर पड़ जाता है।
* जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए धर्य की आवश्यकता होती है क्रोध की नहीं, क्योंकि महान वही बनते हैं, जिन्हें हमेशा मुस्कराते रहने की आदत आती है।
* कोई भी व्यक्ति नाराज हो सकता है, क्योंकि यह आसान है। लेकिन सही व्यक्ति से, सही मात्रा में, सही समय पर, सही काम करवाने के लिए, संतुलन में नाराज या क्रोधित होना बहुत जरूरी है।
* सुबह से शाम तक व्यक्ति काम करके इतना नहीं थकता, जितना कि क्रोध या चिंता से एक घंटे में थक जाता है।
* जब किसी व्यक्ति का क्रोध बढ़ रहा हो, तब उसका विरोध करने के बजाय शांत रहना होगा, फिर उसका क्रोध खुद खत्म हो जाएगा।
* आलोचना करने वाला व्यक्ति एक ऐसा व्यक्ति होता है, जो किसी भी व्यक्ति की अच्छाई कभी नहीं देखता, लेकिन उसकी बुराई देखने में कभी नहीं चूकता।
* अपने आपको क्रोध से दूर रखने के लिए अच्छा भोजन करिए और दूसरों को खुश करने के लिए अच्छे कपड़े पहनिए।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'सीकेट्र्स ऑफ सक्सेस' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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