साहस, पराक्रम और त्याग की प्रतिमूर्ति 'सोनिया गांधी'

आदर्श भारतीय बहू के नाम से विख्यात सोनिया गांधी का आज 65वां जन्मदिन है। वो जहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्रमुख है। वहीं वो रायबरेली, उत्तरप्रदेश से सांसद भी हैं और इसके साथ ही वे लोक सभा में यूपीए की भी प्रमुख है। 64 वर्षों की अपनी ज़िंदगी में उन्होंने हर मोड़ और मुकाम पर संघर्ष किया है। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनकी सास और उनके पति दोनो ही नापाक मंसूबों के शिकार हुए हैं। जिंदगी की इस कुठाराघाट को सहते हुए उन्होंने जब देश को गति देने की पहल की तो उन्हें अपने विदेशी मूल की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा।

व्यक्तिगत जीवन

सोनिया (एन्टोनिया मैनो) का जन्म वैनेतो, इटली के क्षेत्र में विसेन्ज़ा से 20 कि. मी दूर स्थित एक छोटे से गाँव लूसियाना में हुआ था। उनके पिता स्टेफ़िनो मायनो एक भवन निर्माण ठेकेदार थे और भूतपूर्व फासिस्ट सिपाही थे जिनका निधन 1983 में हुआ। उनकी दो बहने हैं। 1964 में वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में बेल शैक्षणिक निधि के भाषा विद्यालय में अंग्रेज़ी भाषा का अध्ययन करने गई जहाँ उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई जो कि उस समय ट्रिनिटी विद्यालय, कैम्ब्रिज में पढ़ते थे। 1968 में दोनों का विवाह हुआ जिसके बाद वे राजीव गांधी की माता, इंदिरा गांधी के साथ भारत में रहने लगीं। उनकी दो संताने हैं - पुत्र राहुल गांधी और पुत्री प्रियंका गांधी वड्रा जिनका विवाह रॉबर्ट वड्रा से हुआ है। राजीव गाँधी के साथ विवाह होने के काफी समय बाद उन्होंने1983 में भारतीय नागरिकता स्वीकार की।

राजनीतिक सफर

पति की हत्या होने के पश्चात कोंग्रेस के वरिष्ट नेताओं ने सोनिया से पूछे बिना उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा कर दी परंतु सोनिया ने इसे स्वीकार नहीं किया। सोनिया गांधी ने 1997 में कोलकाता के प्लेनरी सेशन में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और उसके 62 दिनों के अंदर 1998 में वो कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयीं। राजनीति में कदम रखने के बाद उनका विदेश में जन्म हुए होने का मुद्दा उठाया गया । उनकी कमज़ोर हिन्दी को भी मुद्दा बनाया गया।

सोनिया गांधी अक्टूबर 1999 में बेल्लारी, कर्नाटक से और साथ ही अपने दिवंगत पति के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी, उत्तर प्रदेश से लोकसभा के लिए चुनाव लड़ीं और करीब तीन लाख वोटों की विशाल बढत से विजयी हुईं। 1999 में 13वीं लोक सभा में वे विपक्ष की नेता चुनी गयी।16 मई 2004 को सोनिया गांधी 16-दलीय गंठबंधन की नेता चुनी गई जो वामपंथी दलों के सहयोग से सरकार बनाता जिसकी प्रधानमंत्री सोनिया गांधी बनती। सबको अपेक्षा थी की सोनिया गांधी ही प्रधान मंत्री बनेंगी लेकिन 18 मई को उन्होने पीएम की कुर्सी पर मनमोहन सिंह को बैठाकर पार्टी से उनका समर्थन करने की अपील की।

आलोचनाएं

सोनिया गांधी पर लाभ के पद पर होने के साथ लोकसभा का सदस्य होने का आक्षेप लगा जिसके फलस्वरूप 23 मार्च 2006 को उन्होंने राष्ट्रीय सुझाव समिति के अध्यक्ष के पद और लोकसभा का सदस्यता दोनों से त्यागपत्र दे दिया। मई 2006 में वे रायबरेली, उत्तरप्रदेश से पुन: सांसद चुनी गई और उन्होंने अपने समीपस्थ प्रतिद्वंदी को चार लाख से अधिक वोटों से हराया। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर यूपीए के लिए देश की जनता से वोट मांगा. एकबार फिर यूपीए ने जीत हासिल की और सोनिया यूपीए की अध्यक्ष चुनी गई।

लेखन

सोनिया गांधी ने अपने स्वर्गीय पति राजीव गांधी पर दो पुस्तकें लिखी हैं -जिनका नाम Rajiv और Rajiv's World है।
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और इन्दिरा गांधी के बीच 1922 से 1964 तक लिखे गये पत्रों के दो खण्डों का संपादन भी किया है - Freedom's Daughter, Two Alone, Two Together

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+