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विचार करते हैं चुम्बक का काम

तरुण इंजीनियर

नई दिल्ली, 4 दिसम्बर (आईएएनएस)। कभी आपने सोचा है कि रामायण को धार्मिक ग्रंथ क्यों माना जाता है? जबकि महाभारत को एक महाकाव्य माना जाता है। रामायण में सीता मां बन गईं और राम श्रीराम बन गए। लेकिन अर्जुन, युधिष्ठिर या द्रौपदी को कभी देवता या देवी का दर्जा नहीं दिया गया, क्योंकि रामायण बेहद सरल कहानी है और इसमें जो अच्छा है, वह अच्छा है और जो बुरा है, वह बुरा है।

लेकिन महाभारत में ऐसा नहीं है, क्योंकि इसके चरित्र हमारे जैसे हैं, जिनमें ताकत है, तो कमजोरियों भी हैं। अच्छा पक्ष है, तो बुरे पहलू भी हैं। विश्वास है, तो संदेह भी है।

यही बात हमें असहज बनाती है, क्योंकि हम सोचते हैं कि भला उस व्यक्ति की पूजा कैसे की जा सकती है, जो हमारे जैसा है।

इसलिए महाभारत को धार्मिक ग्रंथ नहीं माना जाता है, क्योंकि यह कहीं भी स्पष्ट जवाब नहीं देता और हर कदम पर हमसे व्यक्तिगत और सामूहिक धर्म का पालन करने की अपेक्षा करता है।

इस बात को समझाने के लिए मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं। एक बहुत धनी व्यक्ति अपने सबसे छोटे लड़के को एक बार गांव दिखाने ले गया, ताकि वह जान सके कि गरीब लोग कैसे रहते हैं?

पिता-पुत्र दोनों ने शहर से कुछ दूर अपने फार्म हाउस में दो दिन बिताए। उनके फर्म हाउस के सामने एक गरीब परिवार रहता था, जो मेहनत मजदूरी करता था।

यात्रा से लौटते समय पिता ने अपने पुत्र से पूछा, "बेटा, यात्रा कैसी रही?"

"बहुत अच्छी, पापा।"

"तो तुमने देखा कि गरीब लोग कैसे रहते हैं?"

"हां।" बेटे ने कहा।

"तुमने यात्रा से क्या अनुभव लिया?" पिता ने बेटे से पूछा, क्योंकि पिता यह जानना चाहता था कि बेटा कितना होशियार और आज्ञाकारी है।

बेटे ने कहा, "मैंने देखा कि हमारे पास एक कुत्ता है, जबकि उनके पास चार कुत्ते हैं। हमारा स्वीमिंग पूल बहुत छोटा है, लेकिन वे बहुत बड़ी नहर में नहाते हैं। हमारे बगीचे में महंगी लालटेन लगी है, जबकि वे तारों भरे आकाश को देख सकते हैं।

हमारे घर से दूर तक नहीं दिखता, परंतु वे दूर की पहाड़ियां और घाटियां देख सकते हैं। हमारे नौकर हमारी देखभाल करते हैं, लेकिन वे सभी का ख्याल रखते हैं। हम अपना खाना खरीदते हैं, लेकिन वे अपना खाना खुद उगाते हैं। हमारे घर की रक्षा के लिए चारदीवारी है, लेकिन उनकी रक्षा के लिए ईश्वर है।"

सुनकर लड़के के पिता ने कहा, "बेटा तुमने मेरी आंखें खोल दीं, अब मैं समझ गया कि लोग अमीर दौलत से नहीं होते, बल्कि विचारों से होते हैं।"

इसलिए अपने विचारों को ऊंचा रखिए और नीचे लीखे गुरुमंत्रों पर ध्यान दीजिए :

* मन के बंधन यदि खुल जाएं, तो हर विचार को सहज तरीके से दिल में उतारा जा सकता है।

* आपके विचार आपकी फ्रीक्वेंसी तय करते हैं और आपकी भावनाएं आपको फौरन बता देती हैं कि आप किसी फ्रीक्वेंसी पर हैं।

* दुनिया की सारी दौलत एक विचार से पैदा हुई है, लेकिन उस विचार को हकीकत में बदलने के लिए कड़ी मेहनत की गई थी।

* बढ़िया विचार किसी भी दिशा में आ सकते हैं, लेकिन उसे कारगर बनाने के लिए प्रतिभाशाली नेतृत्व की आवश्यकता पड़ती है।

* महान विचारों को स्वीकार करने के लिए आप अपने मस्तिष्क पर जमी धूल, कीचड़ और ग्रीस को साफ कीजिए, ताकि आपके मस्तिष्क में सफलता पाने के विचार आ सकें।

* यह मत सोचिए कि देश की अर्थव्यवस्था कब समृद्ध होगी, बल्कि यह सोचिए कि आपकी अपनी अर्थव्यवस्था कैसे समृद्ध होगी?

* आपका विचार एक रहस्यमय शक्ति है और रहस्य आकर्षण का नियम है, जिसके द्वारा आप उस रहस्य को खोज पाते हैं, जो आपके विचारों में छिपा है।

* शक्ति के विचार को बल देने के बजाय विचारों की शक्ति पर बल दें, फिर आप अपने लक्ष्य पर जल्दी पहुंच जाएंगे।

* आपके विचार चुम्बक का काम करते हैं, इसलिए दूसरे व्यक्ति आपसे प्रभावित होते हैं। लेकिन जब आपके विचारों का चुम्बक खत्म हो जाता है, तब वही व्यक्ति आपके विचारों पर ध्यान देना बंद कर देते हैं।

* विचारों से धन कमाया जा सकता है, लेकिन धन से विचार नहीं खरीदे जा सकते, क्योंकि विचार समुद्र की लहरों की तरह होते हैं, जो सिर्फ चट्टानों से टकराते हैं।

* विचार तरंग है। विचार भाव है। विचार प्रेरणा है। विचार शक्ति है। विचार जादू है और इन सबका केंद्रबिंदु है, आपका मस्तिष्क। इसलिए आप अपने मस्तिष्क पर जोर डालिए और सोचिए कि आपको कितनी सफलता पानी है?

(डायमंड बुक्स प्रा.लि. से प्रकाशित पुस्तक 'सीक्रेट्स ऑफ सक्सेस' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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