लक्ष्य के प्रति रहें सजग
जोगिदर सिंह
नई दिल्ली, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। यदि आप जीवन एवं पेशे में सफल होना चाहते हैं तो निश्चित रूप से जानें कि पेशेवर संतुष्टि क्या है और उसे पाने के लिए क्या करने की आवश्यकता है। किसी भी काम को करने के लिए उच्चस्तरीय शारीरिक क्षमता की आवश्यकता होती है। जैसा कि बिना शारीरिक क्षमता के कुछ भी नहीं किया जा सकता है, अत: स्वास्थ्य हमारी प्रमुख प्राथमिकताओं में होना चाहिए।
आप जो भी करना चाहते हैं, उस पर नियंत्रण रखना चाहिए न कि विपरीत परिस्थितियां देख रोना चाहिए। जीवन के किसी भी क्षण में आपके अपने अनुकूल परिस्थितियां नहीं होंगी, फिर भी आपको अपनी क्षमताओं का विकास निरंतर करते रहना चाहिए और परिस्थितियों के हिसाब से अपने अंदर बदलाव लाने चाहिए।
सबसे बड़ी समस्या है कि विपरीत परिस्थितियों में हमें बहुत जल्दी हार मान लेते हैं। कुछ समय पूर्व मैं दिल्ली में ट्रैफिक जाम में फंस गया। ड्राइवर ऐसे रूट से जाना चाहता था जो मेरी नजर में पहले से गाड़ियों से भरा था। चार पुलिस वाले सैकड़ों गाड़ियों की भीड़ से जूझ नहीं पा रहे थे। इसका फल यह हुआ कि चार घंटे जाम में फंसने के बाद हम अपने घर लौटे और सारी रात सड़क पर ही बितानी पड़ी।
यही हमारे जीवन पर भी लागू होता है। यदि एक नीति कारगर साबित नहीं होती है तो हमें दूसरी नीति अपनानी चाहिए। आपको खतरे के लिए तैयार रहना होगा। यह तभी संभव है जब आप अपनी क्षमताओं एवं उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करें। वे लोग ही समस्याओं से जूझ सकते हैं जो लचीले, सतत प्रयासरत एवं बदलावों को समाहित करने वाले होते हैं।
विभिन्न समस्याओं से जूझने के लिए रचनात्मकता ही आवश्यकता होती है। हर एक में कोई खास बात होती है। यहां महत्वपूर्ण यह है कि आप अन्य किसी को उसे बर्बाद न करने दें। कोई भी काम छोटा या महत्वहीन नहीं होता यदि उसे आप अपना सर्वश्रेष्ठ देने को तैयार हैं।
आपको सदैव इस बात के लिए प्रयास करना चाहिए कि जीवन में ऐसी स्थिति हो जाए जहां चीजें खुद ब खुद होती चली जाएं। वास्तव में मैंने अपनी जीवन इस स्वचालिकता को अंगीकार किया है जहां चाहे कसरत करना हो, सीखना हो या कोई अन्य कार्य करने हों, मुझे कुछ सोचना नहीं पड़ता है, चीजें खुद होती चली जाती हैं और ये चीजें अपने आप में श्रेष्ठ होती हैं।
ऐसा संभव है कि जब आपके अंदर काम के प्रति लगन एवं प्रेम हो। उन चीजों को करने में अपना जीवन बर्बाद मत कीजिए जो आपकी दु:खी करती है। हमेशा इस बात पर ध्यान दें कि आपके लिए क्या जरूरी है, क्योंकि आपका 80 प्रतिशत प्रतिफल आपके 20-20 प्रयास का फल होता है।
यहां परेशानी यह है कि हमारा ध्यान उन चीजों में बंट जाता है जो तुरंत हमारा ध्यान चाहते हैं या फिर हम दूसरों को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। पिछले महीने एक राजनीतिज्ञ द्वारा एक पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम था। मुझसे उपस्थित रहने का आग्रह किया गया था। जब मैंने वहां जाने एवं समय बिताने का कुल योग देखा तो मालूम पड़ा कि मेरा आधा दिन इसी में बर्बाद हो जाएगा। ऐसा भी नहीं था कि मेरे बगैर यह कार्यक्रम आयोजित नहीं होता।
दस कामों की सूची का अवलोकन कर मैं एक या ज्यादा से ज्यादा दो चीजों को प्राथमिकता देता हूं। मैंने एक आग्रहपूर्वक ई-मेल भेज दिया और इस समय की बर्बादी से खुद को बचा लिया। किसी ऐसे काम के लिए जिससे मुझसे या मेरे लक्ष्य से कोई सरोकार नहीं है, उसके लिए आधा दिन बिताना कोई बुद्धिमानी नहीं है। ज्यादा से ज्यादा लेखकों से मुस्कान का आदान-प्रदान होगा या हाथ मिलाया जाएगा।
लेकिन आप सदैव अपने लिए निर्धारित लक्ष्य के प्रति सजग रहें और उसका मूल्यांकन करते रहे। ये आपको अपने उद्देश्य, लक्ष्य, नीति एवं विशिष्ट योजनाएं बनाने का मौका देगा जो आपको लगातार सही दिशा में अग्रसर करेंगे। आपकी नीति एवं रूपरेखा ही आपकी सफलता के ब्लू प्रिंट हैं। ये आपके लक्ष्य तक पहुंचने का सर्वोत्तम मार्ग दिखाती हैं।
जैसे कि युद्ध में सेना प्रमुख स्रोत हासिल करने के लिए रणनीतिक बनाते हैं और उनके अनुसार काम करते हैं, उसी प्रकार के उपगमता की आवश्यकता व्यवसाय, उद्योग एवं व्यक्तिगत जीवन में है। सुझावों पर आधारित कन्सल्टेन्ट का पेशा काफी आकर्षक है, जहां किसी परिस्थिति से निजात पाने के लिए तकनीकों एवं अन्य चीजों से जुड़े सलाह दिए जाते हैं। हमें भी जीवन में ऐसा ही करना चाहिए। आप लगातार इस बात पर ध्यान देते रहे हैं कि आपके लिए क्या लाभकारी है और क्या नहीं और तब अपने लक्ष्य भेदन के लिए लाभकारी चीजों को अपनाएं।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेश हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि. से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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