26/11: कई देशों ने ख़ुद को अलग रखा

इन दस्तावेज़ों में दिसंबर, 2008 में भेजे गए संदेशों के विवरण हैं.उल्लेखनीय है कि मुंबई में 26/11 को हुए हमलों में 183 लोग मारे गए थे और बहुत से लोग घायल हुए थे. इनमें कई विदेशी नागरिक भी थे.इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में एक बार फिर तनाव पैदा हो गया था और भारत ने शांति वार्ता की प्रक्रिया रोक दी थी.अख़बार ने दस्तावेज़ों के हवाले से कहा है कि मुंबई में हुए हमलों के बाद न्यूज़ीलैंड, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा के राजनयिकों ने एक बैठक की थी.
विकीलीक्स पर प्रकाशित हो रहे दस्तावेज़ों से दुनिया भर में हलचल मच गई हैइस बैठक में तय किया गया था कि वे भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहे 'आरोप-प्रत्यारोप में फँसने' से बचेंगे.इस बैठक में यह भी तय किया गया था कि भारत को किसी भी तरह की सहायता देने का प्रस्ताव भी सावधानी पूर्वक देंगे क्योंकि इसे राजनीति से प्रेरित माना जा सकता है.
दस्तावेज़ों के अनुसार इससे पहले उन्होंने यह भी फ़ैसला किया था कि हमलों के लिए 'भारत के ख़ुफ़िया तंत्र की भारी विफलता' को ज़िम्मेदार ठहराने की बजाय वे सहानुभूति का संदेश भेजेंगे.विकीलीक्स के दस्तावेज़ों के अनुसार भारत में अमरीका के तत्कालीन राजदूत डेविड मलफ़र्ड ने क़यास लगाए थे कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी का हाथ हो सकता है.
'मिलियन डॉलर क्वेश्चन' शीर्षक से भेजे गए संदेश में उन्होंने कहा है कि ये हमले पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी और चरमपंथी गुट लश्करे तैबा के बीच गठजोड़ का परिणाम भी हो सकता है.लेकिन उन्होंने कहा है, "अभी इस बात के सबूत नहीं हैं कि हमलों के निर्देश आईएसआई ने दिए या उसकी तैयारियों में कोई भूमिका निभाई."












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