स्वर्णिम अवसर को भुनाएं
जोगिन्दर सिंह
नई दिल्ली, 14 नवंबर (आईएएनएस)। ऐसी कोई चीज नहीं है, जिसे हम सैद्धांतिक रूप से जानते हों, लेकिन या तो प्रयुक्त नहीं करते या फिर करते भी हैं तो आधे-अधूरे मन से। जैसे, हम सभी जानते हैं कि जब हम अपना श्रेष्ठ नहीं कर पाते या थकान महसूस करते हैं तो हमें विराम लेना चाहिए या आराम करना चाहिए। फिर भी लोग इस चमत्कारिक विश्वास या आशा के साथ काम करते रहते हैं कि मुकाम पर पहुंचकर उनका काम अवश्य खत्म हो जाएगा।
हम सभी के पास सर्वश्रेष्ठ काम करने का श्रेष्ठ समय होता है। यदि हम उस खास समय का सदुपयोग अपने महत्वपूर्ण कार्यो के लिए करें तो परिणाम बेहद अच्छे हो सकते हैं। बाकी शरीर की ऊर्जा पर निर्भर है। यह हमारी ज्ञानेन्द्रियों को और प्रखर बनाती है। जिस समय आपको आराम करना चाहिए और आप नहीं करते हैं तो आप काम करते रहने पर भी अपने श्रेष्ठ स्तर तक नहीं पहुंच पाएंगे।
यदि आप मानसिक तौर पर थके हुए हैं तो आप न यहां हैं, न वहां। यह बात सही है कि हमें ज्यादा प्राप्ति के लिए और ज्यादा प्रयास करना चाहिए, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम और ज्यादा के चक्कर में शरीर को आराम भी न दें और यह पूरी प्रक्रिया दण्ड स्वरूप हो जाए। हम में से कोई भी इसके लिए बाध्य नहीं है कि वह दूसरों की खातिर अपनी आवश्यकताओं पर ध्यान न दे।
एक समय में मैं भी ऐसा करता था। ज्यादा से ज्यादा चीजों में व्यस्त रहता और शाम तक अपने आप को काफी थका देता। दूसरों को खुश करने के लिए खुद को कष्टकारी स्थिति में पहुंचा देना कोई बुद्धिमानी नहीं है।
अचानक मुझे महसूस हुआ कि यह न केवल अहितकारी है, बल्कि मैं ऐसी स्थिति में पहुंच गया था जहां मैं अपना श्रेष्ठ नहीं दे सकता था। हमें यह सीखना चाहिए कि जो ज्यादा जरूरी है उस पर समय बिताया जाए। केवल दूसरों को खुश करने के लिए हमें इससे समझौता करना चाहिए।
लोगों के आराम करने के तरीके जुदा हो सकते हैं। मैं खुद सोने से पूर्व चुटकुलों की किताब या फिर ऐसी किताब जो मुझे खुश कर दे पढ़ना चाहता हूं। मैं ऐसे लोगों को भी नजरअंदाज करता हूं जो मुझे मायूस करती है।
यदि खुद से सर्वश्रेष्ठ करवाना चाहते हो या दूसरों को श्रेष्ठ देना चाहते हैं तो आपको हमेशा अच्छा महसूस करना होगा। केवल इसी तरह से आप अपने स्वर्णिम भविष्य की गाथा लिख सकते हैं। हमें जीवन को ऐसे-वैसे नहीं जीना चाहिए। यह एक अच्छा तरीका हो सकता है कि हम अपने आप को लिखित रूप में याद दिलाते रहें कि अगले एक दो, तीन या पांच-दस सालों में आपको जीवन में क्या करना है। समय-समय पर आप अपनी उपलब्धियों को अपने सपनों या लक्ष्य से तुलना करते रहेंगे जो आपको प्राप्त करना है। आप अपने आप को एक पत्र लिख सकते हैं कि किसी खास तिथि या साल तक आप कहां पहुंचना चाहते हैं।
यह मात्र एक नसीहत है इस बात की जांच का कि आपका कॅरियर या जीवन उसी प्रकार आगे बढ़ा है जैसा आपने सोचा था, आप उससे आगे या आप जीवन में कुछ रह गए। किसी काम को करते समय सदैव अच्छा महसूस करना चाहिए। यदि आप किसी काम को करते समय उदास या निरूत्साहित महसूस करते हैं तो आप प्रगति नहीं कर सकते हैं।
अच्छा महसूस करना अपने लक्ष्य से जुड़े रहने की सर्वश्रेष्ठ विधि है। हर चीज की एक कीमत चुकानी होती है और अच्छी सोच व भावनाएं उसमें शामिल हैं।
अच्छा महसूस करने की हमारी परिभाषा व्यक्तिगत है। वह कभी विशेषज्ञ द्वारा प्रतिपादित हो ऐसा आवश्यक नहीं है। आप नारकीय मार्गो पर चलकर स्वर्ग तक नहीं पहुंच सकते हैं। यह जानने के लिए कि आपको कौन-सी चीज अच्छा महसूस कराती है, आप अपने आंतरिक सोच का अनुसरण करें। आप के बारे में आप से अच्छा कोई विशेषज्ञ हो नहीं सकता है।
अच्छा महसूस करने की प्रक्रिया में यह भी शामिल है कि आप जीवन से उन चीजों को बाहर कर दें जो आपको अच्छा महसूस करने से रोकती है। यह कुछ भी हो सकता है। अपने आप को खुश रखने का एक अच्छा तरीका है अपने आपको मुस्कराने एवं खुश रहने के लिए बाध्य करना। आप का लक्ष्य न केवल स्वयं को खुश करना होना चाहिए अपितु दूसरों के जीवन में भी खुशियां लानी चाहिए। आप इस बात से बिल्कुल बेफिक्र हो जाइए कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं? यह सोचकर आप कभी भी अच्छा महसूस नहीं करेंगे। इस बात की चिंता करना या फिर हर बात के लिए दूसरों से मान्यता लेना, ये चीजें आपके मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं।
ऐसा मान लीजिए कि ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो मीन-मेख निकालते रहते हैं चाहे आप जो भी करें। ऐसा नहीं है कि आपके पास ही आपको बनाएंगे कि अच्छा कैसे बनें, बल्कि आपके आस-पास ज्यादातर लोग बिना वेतन के सलाहकार के रूप में आपको हर बात पर सलाह देते रहेंगे चाहे बात कुछ भी हो। यह सोचना कि दूसरे क्या सोचेंगे, कभी भी अच्छा नहीं है जब तब कि आप अपना काम सही ढंग से कर रहे हैं। ऐसा सोचना सबसे बड़ी अपंगता है। यह हमारा काम नहीं कि हम सबको खुश रखें। प्रत्येक व्यक्ति अपनी खुशियों के लिए स्वयं जिम्मेदार है।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि. से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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