खुद से करें बात, बनें 'वर्तमान विचारक'
सरश्री तेजपारखी
नई दिल्ली, 13 नवम्बर (आईएएनएस)। आपके घर में अगर मेहमान आ गए तो अपके अंदर का 'वर्तमान विचारक' अपने आपको व्यवहार करते हुए देख पाएगा। 'देखा! मेहमान के सामने मैं कैसे व्यवहार कर रहा हूं।' वह वर्तमान विचारक हैं, वह सिर्फ मेहमान को ही नहीं देख रहा है बल्कि मेहमान को देखकर अपने अंदर क्या हो रहा है, वह भी देख रहा है। वह वहां सिकुड़ रहा है और कहां खुल रहा है, ये सभी बातें भी वह देख सकता है।
वर्तमान विचारक स्वयं को देखने के साथ-साथ यह भी देखता है कि सामने नौकर है तो मैं कैसे बात कर रहा हूं, बीवी है तो कैसे बात कर रहा हूं, पति है तो कैसे बात कर रही हूं, बॉस के सामने गए तो कैसे बात कर रहा हूं, पड़ोसी के सामने गए तो कैसे बात कर रहा हूं, सब्जी खरीदते वक्त कैसे बात कर रहा हूं। जब आम बेचनेवाला आपसे कह रहा है कि 'दस रुपये में चार आम ही मिलेंगे' तो आप उसे किस तरह जवाब दे रहे हैं कि 'चार नहीं, आठ आम चाहिए, कम से कम छह आम तो दे ही दो।' उसके साथ आप कैसे तिकड़म कर रहे हैं। यह अपने आपको करते हुए देखेंगे तो आपको मजा आएगा और आप में प्रज्ञा (समझ) जगेगी।
अपने साथ ईमानदारी से रहें : जब आप वर्तमान विचारक नहीं है तब सब आधा-आधा चलता है। सामनेवाला यदि आपसे कुछ गलत व्यवहार कर रहा है तो उस वक्त आपके साथ क्या हो रहा है, यह आपको पता नहीं चलता, मगर अगर आपने प्रेजेंट माइंडेडनेस का अभ्यास किया होगा तो आप साथ में यह भी देखेंगे कि आप पर क्या असर होता है और ईमानदारी से यह सब आप खुद को बताएंगे। कई लोग अपने आपको सत्य बताने से डरते हैं। अपने आपको भी ऐसे जवाब देते हैं, जैसे दूसरों को देते हैं। ऐसे लोग अपने आप से भी झूठ बोलते हैं।
कम से कम अपने आप से ईमानदारी से बात की जाए। अपने आपको कहा जाए, 'देखो तुम ऐसे क्यों व्यवहार कर रहे हो? सामने वाले ने तुम्हें काम' दिया तो तुमने नहीं किया और दूसरे ने कहा तो वह काम तुमने कर दिया क्योंकि एक इंसान तुम्हारे अहंकार को चोट पहुंचाता है और दूसरा तुम्हारे अहंकार को पुष्टि देता है, तारीफ करता है इसलिए जो तारीफ करता है उसका काम तुमने जल्दी कर दिया। हमेशा अपने आप से पूछें, 'मैंने उसका काम क्यों किया? इसका क्यों नहीं किया? इसके पीछे क्या कारण था?'
जब आप ईमानदारी से देखेंगे तो वर्तमान विचारक होते जाएंगे कि इसे देखकर यह विचार उठ रहा है, उसे देखकर यह विचार उठा। यहां यह घटना हुई तो नकारात्मक विचार उठा, वहां वह घटना हुई तो सकारात्मक विचार उठा। जब आप उसकी गहराई में जाएंगे तब उसके कारण भी जान पाएंगे और उन सबके पीछे जो सत्य झांक रहा है, उसे प्रकट कर पाएंगे।
मनन करें :
* आज तक ध्यान की जो भी विधियां बनाई गई हैं, उनमें पहला लक्ष्य यही था कि इंसान के मन को वर्तमन बनाया जाए।
* जब सभी इंद्रियां एक साथ कार्य करती हैं और मन के विचार भी एक साथ देखे जाते हैं तब उसे वर्तमान विचारक (प्रेजेंट माइंडेड) कहा जाता है।
* जब आप वर्तमान विचारक बनते हैं तब अपने आप से ईमानदारी से सभी बातें बता पाते हैं वरना सभी बातें आधी-आधी होती हैं।
* नमन और अब्सेंट माइंडेड में फर्क होता है। नमन में मन नहीं होता है और अब्सेंट माइंडेड में मन होता है मगर वह कहीं और भटकता है। जब भी आप किसी का काम करें तो अपने आप से यह सवाल जरूर पूछें कि 'उस काम को करने के पीछे मेरी भावना क्या थी?'
* कोई भी काम करने के पीछे की भावना जानने से आप ज्यादातर वर्तमान में रहेंगे और हर इंसान को देखने के बाद आपको कौन से विचार आते हैं, यह आपको पता चलेगा।
* कम से कम अपने आप से ईमानदारी से बात की जाए, अपने आपको अपना सच बताया जाए।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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