पूर्व का मास्को कहलाता है हारपीन (आकर्षक चीनी शहर -2)
रीता कपूर
नई दिल्ली, 10 नवंबर (आईएएनएस)। चीन के पूर्वोत्तर में हेलोंगच्यांग प्रांत की राजधानी हारपीन 'पूर्व के मास्को' या 'पूर्व के छोटे पेरिस' के रूप में विख्यात है।
यह पूर्वोत्तर चीन के उत्तरी हिस्से का सबसे बड़ा राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है। यह प्राचीन लेकिन फैशनेबुल शहर है। शहर की इमारतों और जीवन पर यूरोपीय प्रभाव साफ परिलक्षित होता है।
हेलीच्यांग प्रांत चीन के मानचित्र पर हंस की गर्दन जैसा दिखाई पड़ता है और हारपीन को हंस के गले के मोती सदृश माना जाता है।
यह शहर जिन और क्विं ग राजवंशों का जन्मस्थली रहा है। जिनमें से क्विं ग का आधुनिक चीन के इतिहास पर गहरा असर रहा। 19वीं सदी के आखिर में रूस ने यहां मध्य-पूर्व रेलवे टर्मिनस शुरू किया।
बाद में 33 देशों के रहने वाले 1,60,000 से ज्यादा लोग हारपीन चले आए और उन्होंने शहर के विकास में योगदान दिया। उस दौर में इस शहर की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में अभूतपूर्व सम्पन्नता आई और देखते ही देखते यह शहर प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक केंद्र बन गया।
बाहरी संस्कृति के प्रभाव की वजह से हारपीन में अनूठे और आकर्षक स्थल पनपे। यहां के सेंट सोफिया ऑर्थोडॉक्स चर्च और झोंगयेंग दाजी पर यूरोपीय शैली की छाप देखने को मिलती है।
हारपीन शहर के चार ऋतुकाल होते हैं। उसकी प्राकृतिक छटा निराली है। सुंगह्न्च्यांग नदी इससे होकर गुजरती है। हारपीन 'बर्फ के शहर' के नाम से भी मशहूर है। हर साल सर्दियों में यहां अंतर्राष्ट्रीय हिमोत्सव आयोजित होता है। इस उत्सव में संस्कृति, खेल, कला, व्यापार व पर्यटन की बहुरंगी गतिविधियां होती हैं।
हारपीन का अंतर्राष्ट्रीय हिमोत्सव, कनाडा के शीतकालीन कार्निवाल, जापान के सापोरो हिमोत्सव और नार्वे के स्कींग उत्सव विश्व के चार अंतर्राष्ट्रीय शीतकालीन उत्सवों में से है।
गौरतलब है कि चाइना रेडियो इंटरनेशनल की हिंदी सेवा द्वारा चीन के आकर्षक शहरों को चुनने के लिए लिए चल रही ऑनलाइन प्रतियोगिता में हारपीन भी शामिल है। अपनी पसंद के सबसे आकर्षक चीनी शहरों के लिए दुनिया भर के नेटिजन सीआरआई द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में ऑनलाइन मतदान में हिस्सा ले रहे हैं।
यहां का समर संगीत समारोह, चीन के तीन सबसे बड़े संगीत समारोहों में से है, जिसका इतिहास 40 साल से ज्यादा पुराना है। इसे उत्तर का मशहूर संगीत शहर भी कहा जाता है। यहां के लोगों ने अपनी विलक्षण खाद्य संस्कृति विकसित की है।
यहां के भोजन पर रूसी शैली की छाप है। यहां की बेकरी में मिलने वाली ब्रैड जिसे स्थानीय लोग लिया-बा कहते हैं। इस शब्द की उत्पत्ति रूसी भाषा के खलेब से हुई है। यहां के सॉसेज पर भी चीन की जगह यूरोपीय शैली की ही छाप है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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