चीन के उत्थान और पतन की दास्तान से रूबरू कराता लोयांग (आकर्षक चीनी शहर-1)

एशियाई खेलों को आधिकारिक रूप से एशियाड के नाम से जाना जाता है। चार वर्ष के उपरांत आयोजित होने वाले इस खेल का 16वां संस्करण चीन के शहर गुआंगझोउ में 12 नवंबर से होने जा रहा है। इस संदर्भ में चीन के प्रमुख शहरों से रूबरू कराने वाली एक श्रृंखला शुरू की जा रही है। : - संपादक

रीता कपूर

नई दिल्ली, 9 नवंबर (आईएएनएस)। चीन में यह प्रचलित है कि यदि आप चीन के उत्थान और पतन की दास्तान से रूबरू होना चाहते हैं तो एक बार लोयांग शहर का रुख अवश्य कीजिए। चीन के हनान प्रांत के पश्चिमी हिस्से और पीली नदी के दक्षिणी तट पर बसे इस शहर की स्थापना ईसापूर्व 12 वीं सदी में हुई थी और यह चीन की आठ बड़ी प्रचीन राजधानियों में से एक है।

चीनी इतिहास का यह इकलौता ऐसा शहर है जिसे देवता की राजधानी के नाम से अभिहित किया गया है। लोयांग 13 राजवंशों की राजधानी रहा है यानी इस शहर को 1500 साल तक राजधानी होने का गौरव मिला है। लोयांग चीनी सभ्यता के अहम जन्मस्थानों में से एक रहा है। यहीं पर माओवाद और कंफ्यूशियसवाद का जन्म हुआ।

यह शहर चीन के शीर्ष पर्यटनस्थलों में से है जहां के चप्पे-चप्पे पर सांस्कृतिक धरोहरें बिखरी पड़ी हैं। गौरतलब है कि चाइना रेडियो इंटरनेशनल की हिंदी सेवा द्वारा चीन के आकर्षक शहरों को चुनने के लिए लिए चल रही ऑनलाइन प्रतियोगिता में लोयांग भी शामिल है। इस प्रतियोगिता में अपनी पसंद के सबसे आकर्षक चीनी शहरों के लिए दुनिया भर के नेटिजन सीआरआई द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में ऑनलाइन मतदान में हिस्सा ले रहे हैं।

यहां मौजूद प्राचीन राजधानी के अवशेष, मंदिर, गुफाएं, मकबरे इसकी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाते हैं। लुंगमन गुफा यहां मौजूद धरोहरों में सबसे खास है। इस गुफा स्थल को पहले 'यी नदी का द्वार' कहा जाता था। बाद में इसे लुगमन या ड्रैगन द्वार कहा जाने लगा।

इन बौद्ध गुफाओं पर कारीगरों ने उस समय काम करना शुरू किया जब उत्तरी वेइ के सम्राट ने दातोंग की जगह लोयांग को अपनी राजधानी बनाया। यहां मौजूद कारीगरी दातोंग की कारीगरी का ही विस्तार है। लुंगमेन में काम सात राजवंशों के कार्यकाल तक चला। यहां 1300 से ज्यादा गुफाएं, 40 छोटे पगोड़ा और करीब 100,000 बौद्ध प्रतिमाएं हैं जिनका ऊंचाई एक इंच से लेकर 57 फुट तक है। इन्हें चीन में बौद्ध संस्कृति की उत्कृष्ट धरोहर माना जाता है।

पईमा मंदिर चीन का प्रथम सरकारी बौद्ध मठ है जिसका निर्माण वहां बौद्ध धर्म की शुरुआत के बाद आधिकारिक तौर पर किया गया। इस शहर में रंग-बिरंगे पीयोनी या चंद्रपुष्प खिलते हैं और इसे पुष्प का साम्राज्य भी कहा जाता है। यह पुष्प शांति और समृद्धि के प्रतीक हैं। हर साल जब 15 अप्रैल से आठ मई तक चंद्रपुष्पों के पुष्पित-पल्लिवत होने का मौसम चरम पर होता है तो शहर में चंद्रपुष्प मेले का आयोजन होता है। विश्वप्रसिद्ध रेशम मार्ग यहीं से होकर गुजरता था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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