आत्म संवर्धन कीजिए, पसीने को इत्र बनाइए

जोगिन्दर सिंह

नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। कर्म ही सफलता तक पहुंचने का मार्ग है। अत्यंत तीव्र इच्छा एवं उपयुक्त मानसिकता भी कर्म के अभाव में आपको मंजिल तक नहीं पहुंचा सकती है। ऐसा कहा जाता है 'ज्ञान ही शक्ति है'। लेकिन ज्ञान कर्मयोग की तीव्र इच्छा के बगैर बेकार भी है।

आपके पास ज्ञान का भंडार हो सकता है, मगर इसकी सार्थकता उसके समुचित उपयोग में ही है। जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए निर्मित ढेरों साहित्य एवं नुस्खे भरे पड़े हैं, लेकिन उन पर अमल किए बगैर जीवन में वहीं खड़े रहते हैं जहां हैं।

जैसे हर व्यक्ति में एक विशिष्टता होती है, उसी प्रकार उसकी योग्यता भी होती है जो कि व्यक्ति दर व्यक्ति भिन्न होती है। कुछ लोग किसी कार्य में दक्ष तो कुछ ढीले होते हैं। एक बात तो तय है कि पूर्ण विकास की तीव्र लालसा होनी चाहिए।

समुचित ज्ञान एवं क्षमता के साथ-साथ बार-बार अभ्यास ही सफलता का मंत्र है। सर्जन या डाक्टर अपने जीवन के उच्चतम शिखर पर इसी मंत्र के सहारे पहुंचते हैं।

सीखने का सबसे तीव्र एवं सर्वोत्तम माध्यम किसी सफल व्यक्ति का अनुकरण है।

घोड़ों की रेस में घोड़ा बिल्कुल थोड़े से ज्यादा प्रयास से जीत जाता है। उसी प्रकार पठन-पाठन के दौरान थोड़े ज्यादा प्रयास से मैनेजमेंट संस्थान से पास कर आप स्वर्ण पदक या मोटी तन्ख्वाह पा सकते हैं।

विजयी लोगों के जीत का एक ही मंत्र है वो है काम। वे इस बात को भली-भांति जानते हैं कि कर्म के बगैर कुछ भी नहीं हो सकता है। जीवन में जो चीज मायने रखती है वह है लगन और अभ्यास। सौभाग्य इन्हीं खूबियों का दूसरा नाम है। एक पुरानी कहावत है कि भगवान हर मनुष्य एवं जीत के भोजन की व्यवस्था कर देता है, मगर ध्यान रहे कि वह किसी के मुंह में नहीं खिलाता है।

शब्दकोश के अलावा सफलता शब्द कहीं भी कर्म के पहले नहीं आता। कठिन परिश्रम का मतलब है कि जब अन्य आधी रात के समय सो रहे होते हैं, तब आप लालटेन तले काम करते रहे होते हैं। खुद कष्ट सहकर एवं परेशानियां झेलकर आप कई लोगों के कष्टों एवं परेशानियों को खत्म कर सकते हैं।

पसीने आपकी उपलब्धियों के इत्र हैं। लक्ष्य साधने के लिए लगातार कष्ट सहने की क्षमता कई प्रकार की परेशानियों को समाप्त करती है। आप यद्यपि पूर्णत: कुशल नहीं हैं, फिर भी अथक परिश्रम अपको मंजिल तक पहुंचा सकता है।

यदि आप सफलता प्राप्ति के लिए प्रति दृढ़ संकल्प हैं तो कठिन परिश्रम जरूरी ही नहीं, बल्कि परम आवश्यक है। पूछो उस श्रमिक से जिसे अपने जीवनकोपार्जन के लिए खराब मौसम में भी काम करना पड़ता है। पाकेट में हाथ डालकर खड़े होकर कोई सफलता नहीं प्राप्त कर सकता है। जरूरी यह नहीं है कि आप किस तेजी से सफलता की ओर बढ़ रहे हैं, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आप लगातार बढ़ रह हैं न कि खड़े हैं। जड़ता असफलता का द्वार खोलती है।

जीवन में सकारात्मक सोच की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। हम कई तरह के लोगों से मिलते हैं जो चीजों को तुरंत एवं अपने तरीके से करवाना चाहते हैं। सबकी बातों को मानना संभव नहीं है, लेकिन सभी की बातों पर गौर किया ही जा सकता है। जैसे किसी अन्य व्यक्ति को समझाने के लिए आप अपने तरीके से बातों को रखते हैं, उसी प्रकार हमें लोगों की चीजों को उन्हीं के तरीके में प्रस्तुत करना चाहिए और चीजों को उनके नजरिए से देखना चाहिए।

आइडिया बेचना एवं दूसरों को समझाना समान बेचने से बिल्कुल भिन्न है। जब आप सामान बेचते हैं तो लोग उस उत्पाद को देखते हैं। आइडिया बेचते समय ऐसी स्थिति नहीं होती है। यहां आपको वाजिब तर्को से लोगों को समझाना होता है।

यदि आपका आइडिया सही नहीं है तो कोई न तो उसे खरीदेगा, न ही आपके तर्को को मान्यता देगा। नीति-निर्धारक किसी भी आइडिया को अपने अनुसार परखते हैं एवं इस बात का ख्याल रखते हैं कि यह उनकी आवश्यकताओं के हिसाब से सटीक है जो कि किसी विशेष सामान या उद्देश्य को प्रचारित करते हों। साथ ही अपने संस्थान के वित्तीय स्वास्थ्य का भी ख्याल रखते हों। दुनिया में हालांकि सबसे आसान है अपने जैसा होना एवं सबसे मुश्किल है दूसरों के हिसाब से खुद को ढालना।

कभी भी ऐसा वादा न करें जिसे पूरा कर पाना आपको मुश्किल लगता हो। तभी आप एक अच्छे संस्था के लिए आप एक धरोहर साबित होंगे। यदि आप खुद का काम करते हैं तो भी इन गुणों के आधार पर आपकी उन्नति का मार्ग पर प्रशस्त होगा।

(लेखक पूर्व सीबीआई निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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