बनें अच्छे श्रोता, होंगे जीवन में सफल
नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। विंस्टन चर्चिल ने कहा है, 'यदि आप सिर्फ बोलना जानते हैं, तो कभी सफल नहीं हो सकते।' सुनना एक कला है, जिसे अपने भीतर विकसित किया जाए तो इससे जीवन में सफलता की सीढ़ियां आसान हो सकता है। जिस व्यक्ति में सुनने की कला या 'लिसनिंग स्किल' होती है। वह दूसरों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने में हमेशा सफल होता है।
सुनना एक जटिल संवाद प्रक्रिया है, जो ध्वनि तरंगों को सुन लेने मात्र से अधिक है। इस दौरान वक्ता और श्रोता को शारीरिक व मानसिक उपलब्धि, वक्ता द्वारा श्रोता तक संदेश का सही प्रतिपादन, श्रोता द्वारा संदेश को याद रखे जाने और उस पर श्रोता की प्रतिक्रिया आदि कुछ बातें अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शोधों से पता चला है कि एक सामान्य व्यक्ति दिन-भर में बोलने से दोगुना व लिखने या पढ़ने से पांच गुना अधिक बातें सुनता है। दिनभर के कार्य में औसतन हम 80 प्रतिशत समय संवाद में व्यतीत कर देते हैं। इसमें से भी 45 प्रतिशत समय मात्र सुनने में ही व्यतीत होता है।
अच्छे श्रोता होने के महत्व को जानने से पहले यह समझना जरूरी हैं कि हम दूसरों से बातें क्यों करते हैं। आइए जानते हैं मौखिक संवाद के चार मूल उद्देश्यों को -
1. अपना परिचय देने के लिए अथवा नया संबंध स्थापित करने के लिए।
2. अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए।
3. किसी को जानकारी प्रदान करने के लिए।
4. अपनी बात मनवाने के लिए।
आइए, अब देखते हैं कि अच्छे श्रोता में क्या गुण होना चाहिए।
* अच्छे श्रोता हमेशा वक्ता की बातों से अपनी काम की बात ग्रहण कर लेते हैं।
* अच्छे श्रोता वक्ता की रीति या शैली की जगह उसकी बातों में निहित संदेश और उसके अर्थ पर ध्यान देते हैं, जबकि सामान्यत: लोग वक्ता के बात करने के तरीके पर ध्यान देते हैं।
* अच्छे श्रोता वक्ता की बात पूर्ण होने तक उसे सुनते हैं जबकि सामान्य व्यक्ति बीच में ही अपनी बात करने लगते हैं।
* अच्छे श्रोता अपनी पुरानी जानकारी से वक्ता के संदेश को जोड़ने का प्रयास करते हैं जबकि सामान्य व्यक्ति सिर्फ सुनते भर हैं।
* एक अच्छा श्रोता न केवल बातें सुनता है बल्कि वक्ता के हाव-भाव और आवाज की तीव्रता पर भी ध्यान देता है।
* एक अच्छा श्रोता बात पूर्ण हो जाने के बाद उस पर विचार करता है और अपने काम की बातें याद रख लेता है।
इस तरह हमें सफल जीवन के लिए स्वयं के भीतर एक अच्छे श्रोता के गुण विकसित करने चाहिए। याद रखें, वक्ता भी एक अच्छे श्रोता से प्रभावित होता है और अपने मन में उसके प्रति सम्मान रखता है।
(लेखक उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता के अचूक मंत्र' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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