खुद को परखें और आगे बढ़ें

नई दिल्ली, 7 नवम्बर (आईएएनएस)। अक्सर जब मैं ग्राहकों को समाधान सुझाती हूं- किसी मामले को सुलझाने या किसी व्यक्ति को माफ करने का एक नया तरीका, तो मैं देखती हूं कि उसके जबड़े कस जाते हैं, बांहें सीने पर सख्ती से कस जाती हैं। हो सकता है, मुट्ठियां भी बंध जाएं। प्रतिरोध उभर रहा होता है और मैं जानती हूं कि हमने ठीक वही काम किया है, जो करने की आवश्यकता थी।

हम सबके पास सीखने के लिए सबक होते हैं। केवल अपने लिए चुने गए सबक ही हमारे लिए मुश्किल होते हैं। वे बातें आसान होती हैं, जो सबक नहीं होतीं, क्योंकि वे बातें हम पहले से जानते हैं।

जागरूकता होने से सबक सीखे जा सकते हैं। यदि आप किसी ऐसी चीजे के बारे में सोचते हैं, जो करना आपके लिए सबसे कठिन है और आप उसका कितना प्रतिरोध करते हैं तो आप उस पल के अपने सबसे बड़े सबक को देख रहे हैं।

झुकना, प्रतिरोध छोड़ देना और अपने आपको वह सबक के लिए प्रेरित करना, जो सीखना हमारे लिए आवश्यक है, अगले कदम को और आसान बना देगा। अपने प्रतिरोध को परिवर्तन करने से रोकने न दें। हम दो स्तरों पर काम कर सकते हैं- प्रतिरोध को देखना और फिर भी अपने मन-मस्तिष्क में परिवर्तन लाना। खुद को परखें, देखें कि आप कैसे प्रतिरोध करते हैं और फिर आगे बढ़ें।

गैर-शाब्दिक संकेत-हमारी क्रियाएं अक्सर हमारा प्रतिरोध व्यक्त करती हैं। उदाहरण के लिए-विषय बदलना, कमरा छोड़ कर चले जाना, बाथरूम जाना, देर से आना, बीमार हो जाना निम्नलिखित करते हुए टाल-मटोल करना, कुछ और करने लग जाना, किसी कार्य में व्यस्त हो जाना, समय व्यर्थ करना, अलग देखना या खिड़की के बाहर देखना, कोई पत्रिका पलटना, ध्यान न देना, खाना पीना या सिगरेट पीना, कोई रिश्ता बनाना या तोड़ना, कुछ चीज खराब होना- कारें, उपकरण, प्लंबिंग आदि।

कल्पनाएं : हम अक्सर अपने प्रतिरोध को उचित ठहराने के लिए दूसरों के बारे में कल्पना करते हैं। हम इस प्रकार की बातें करते हैं-इससे कुछ ठीक नहीं होगा। मेरा पति/पत्नी नहीं समझेगा। मुझे अपना पूरा व्यक्तित्व बदलना होगा। केवल पागल लोग (चिकित्सक) थेरेपिस्ट के पास जाते हैं। वे मेरी समस्या में मदद नहीं कर सके। वे मेरे गुस्से को संभाल नहीं पाए। मेरा मामला अलग है। मैं उन्हें परेशान नहीं करना चाहता। यह कार्य स्वत: ही हो जाएगा। कोई और ऐसा नहीं करता।

धारणाएं : हम कुछ ऐसी धारणाओं के साथ बड़े होते हैं जो बदलने में हमारा प्रतिरोध बन जाती हैं। हमारी कुछ ऐसी धारणाएं हैं- ऐसा नहीं हुआ, यह बिलकुल ही ठीक नहीं है, मेरे लिए ऐसा करना सही नहीं है। वह आध्यात्मिक नहीं होगा। आध्यात्मिक लोग गुस्सा नहीं करते। पुरुष/महिलाएं ऐसा नहीं करते, मेरे परिवार ने कभी ऐसा नहीं किया। प्रेम मेरे लिए नहीं है। गाड़ी चलाने के लिए यह दूरी बहुत ज्यादा है। यह काम बहुत ज्यादा है। यह काफी महंगा है। इसमें काफी समय लगेगा, मैं इसमें विश्वास नहीं करता, मैं उस प्रकार का व्यक्ति नहीं हूं।

दूसरे लोग : हम अपनी शक्ति दूसरों को दे देते हैं और उस बहाने को अपने बदलने के प्रति प्रतिरोध के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हम इस प्रकार के विचार रखते हैं-भगवान ऐसा नहीं चाहता, मैं ग्रहों के अपने पक्ष में होने का इंतजार कर रहा हूं। यह सही वातावरण नहीं है। वे मुझे बदलने नहीं देंगे। मेरे पास सही गुरु/पुस्तक/कक्षा/उपकरण नहीं है।

मेरा डॉक्टर नहीं चाहता कि मैं ऐसा करूं। मुझे काम से फुरसत नहीं मिलती। मैं उनके प्रभाव में नहीं रहना चाहता। यह सब उनकी गलती है। पहले उन्हें बदलना होगा। जैसे ही मुझे.. मिलेगा, मैं कर लूंगा। आप/ वे नहीं समझते। मैं उन्हें चोट नहीं पहुंचाना चाहता। यह मेरे संस्कारों, धर्म, दर्शन के खिलाफ है।

(प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'यू कैन हील योर लाइफ' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+