आप भी बन बन सकते हैं चमत्कारों के निर्माता

बी. के. चंद्रशेखर

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। स्व-उपचार का चमत्कार तब होता है जब आंतरिक रोगी आंतरिक चिकित्सक को उत्पन्न करता है। आइए, एक कहानी से जानें कि आप चमत्कारों के निर्माता कैसे बन सकते हैं।

एक छोटी बच्ची, कविता अपने बेडरूम में गई और आलमारी स्थल से एक जार को बाहर खींचा, जहां वह उसे छुपाकर रखा करती थी। उसने उसमें से रेजगारी को फर्श पर उड़ेला और उसे सावधानीपूर्वक तीन-तीन बार गिना। सिक्कों को वापस जार में सावधानीपूर्वक रखकर और उसके ढक्कन को बंद कर वह पिछले दरवाजे से निकली और अगली गली में मेडिकल की दुकान पर गई। उसने फार्मासिस्ट का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट होने का धर्यपूर्वक इंतजार किया, लेकिन वह किसी से बात करने में काफी व्यस्त था।

कविता ने एक आवाज उत्पन्न करने के लिए अपने पांवों को मोड़ लिया, फिर भी कुछ नहीं हुआ। उसने अति घृणित ध्वनि के साथ अपना गला साफ किया। फिर भी कुछ फायदा नहीं हुआ। अंतत: उसने अपने जार से एक सिक्का लिया और उसे शीशे के काउंटर पर पटक दिया। इस बार सिक्के ने काम किया।

"तुम क्या चाहती हो?" फार्मासिस्ट ने ऊंची आवाज में पूछा, फिर कहा, "मैं लंदन में रहने वाले अपने भाई से बात कर रहा हूं जिसे मैंने काफी लंबे समय से नहीं देखा है।" फार्मासिस्ट ने अपने प्रश्न के बदले मिलने वाले उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना कहा।

"ओह, तो मैं भी आपसे अपने भाई के बारे में बात करना चाहती हूं।" कविता ने फिर खीझते हुए कहा, "वह सचमुच में बीमार है.. और मैं एक चमत्कार खरीदना चाहती हूं।"

"मैं क्षमा चाहता हूं।" फार्मासिस्ट ने कहा।

"उसका नाम संदीप है और उसके सिर में कुछ परेशानी है और डैडी कहते हैं कि अब एक चमत्कार ही उसे बचा सकता है। इसलिए आप मुझे एक चमत्कार की कीमत बताएंगे?"

"छोटी बच्ची, हम यहां चमत्कार नहीं बेचते। मैं तुमसे माफी चाहता हूं, लेकिन मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूं।" फार्मासिस्ट ने थोड़ नरमी के साथ कहा।

"सुनो, मेरे पास उसे खरीदने के लिए पैसे हैं, यदि यह काफी नहीं हैं, तो मैं और भी ले आऊंगी; मुझे बस यह बताओ कि इसकी कीमत क्या है?"

फार्मासिस्ट का भाई एक अच्छा आदमी था। वह नीचे झुका और छोटी बच्ची से पूछा, "तुम्हारे भाई को किस तरह की चमत्कार की जरूरत है?"

"मैं नहीं जानती।" अपने गालों पर आंसू लुढ़काते हुए उसने उत्तर दिया। "मैं बस यह जानती हूं कि वह वास्तव में बीमार है और मां कहती है कि उसे ऑपरेशन की सख्त जरूरत है, लेकिन डैडी के पास उसके इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। इसलिए मैं अपने पैसे खर्च करना चाहती हूं।"

"तुम्हारे पास कितना पैसा है?" लंदन वाले आदमी ने पूछा। "पच्चीस रुपये" कविता फुसफुसाई। "मेरे पास इतने ही पैसे हैं, लेकिन यदि थोड़े और चाहिए तो मैं इकट्ठा कर सकती हूं।"

"अच्छा, कितने संयोग की बात है, तुम्हारे भाई को जिस चमत्कार की जरूरत है उसके लिए पूरे पच्चीस रुपये ही चाहिए" आदमी मुस्कुरा कर बोला। उसने एक हाथ में उसके पैसे और दूसरे हाथ से उसका हाथ पकड़ते हुए कहा, "तुम जहां रहती हो मुझे ले चलो, मैं तुम्हारे पिता और भाई से मिलना चाहता हूं। चलो देखें कि मेरे पास तुम्हारे काम आने वाला चमत्कार है या नहीं।"

वह भला आदमी एक न्यूरोसर्जन था। उसने बिना फीस लिए ऑपरेशन किया और जल्द ही संदीप अस्पताल से घर लौट आया और ठीक हो रहा था। कविता के मम्मी और डैडी खुशी-खुशी उन घटनाओं के बारे में बता रहे थे जो उन्हें उस स्थिति तक ले आई थीं। "वह सर्जरी" मम्मी फुसफुसाई। "यह तो वास्तव में एक चमत्कार थी। मैं तो सोच भी नहीं सकती, उसकी कीमत कितनी होगी?"

कविता मुस्कुराई, क्योंकि वही एक अकेली ठीक-ठीक जानती थी कि उस चमत्कार की कीमत कितनी थी। सिर्फ पच्चीस रुपये और एक छोटे बच्चे का दृढ़विश्वास।

एक चमत्कार सार्वभौमिक नियम का संचालन है। यहां उस छोटी बच्ची के अंदर रहने वाले अदृश्य डॉक्टर से निकली उपचार करने वाली मजबूत तरंगों ने ही इस घटनाओं को अंजाम दिया, जिसके परिणाम स्वरूप चमत्कार घटित हुआ। ये तरंगेंीि इन सभी घटनाओं की तरफ ले गई और चमत्कार हुआ। चमत्कार तब होते हैं, जब हमारा आंतरिक अदृश्य डॉक्टर सार्वभौमिक नियम के साथ उपचार में पूर्व विश्वास के साथ जग जाता है।

(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. से प्रकाशित पुस्तक 'इनविजिबल डॉक्टर' से साभार।)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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