पुराने को छोड़ें, नए विचारों को आने दें
लुइस एल. हे
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। ब्रह्मांड की बुद्धिमता हमेशा आपके विचारों और शब्दों के प्रति प्रतिक्रियाशीलता होती है। जब आप ऐसी बातें कहते हैं तो स्थितियों में निश्चित रूप से बदलाव आना शुरू हो जाता है।
मेरे विचारों पर अमल करना, बदलने का एकमात्र तरीका नहीं है। कई अन्य तरीके और भी हैं, जो काफी कारगर है। अभी कुछ पर विचार करें। यहां एक आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक दृष्टिकोण है। संपूर्ण उपचार में शरीर, मन और आत्मा शमिल होते हैं। आप इनमें से किसी एक से शुरुआत कर सकते हैं, यदि आप उसमें यथास्थित सभी को शामिल करते हैं। कुछ मानसिक दृष्टिकोण के साथ शुरुआत करते हैं और कार्यशालाएं या थेरेपी करते हैं। कुछ ध्यान या प्रार्थना के साथ आध्यात्मिक दृष्टिकोण अपनाते हैं।
जब आप अपने घर की सफाई शुरू करते हैं तो यह मायने नहीं रखता कि आप किस कमरे से सफाई की शुरुआत करते हैं। आपको ज्यादा आकर्षित करनेवाली जगह से आप शुरू कर सकते हैं। दूसरी जगहों पर सफाई खुद-ब-खुद हो जाएगी।
आध्यात्मिक स्तर पर शुरुआत करनेवाले लोग, जो जंक फूड खाते हैं, अक्सर पाते हैं कि वे पौष्टिक भोजन की ओर आकृष्ट हो रहे हैं। वे किसी मित्र से मिलते हैं या कोई पुस्तक खोजते हैं या किसी ऐसी कक्षा में जाते हैं, जो उनके अंदर यह समझ उत्पन्न करती है कि वे जो कुछ भी खाते हैं, उसका भारी असर इस बात पर पड़ता है कि वे कैसा महसूस करते हैं और कैसा दिखते हैं। एक स्तर हमेशा दूसरे की ओर ले जाएगा, जब तक विकसित होने और परिवर्तन की इच्छा मौजूद रहेगी।
मैं पोषण के बारे में बहुत कम सलाह देती हूं, क्योंकि मैंने पाया है कि सभी व्यवस्थाएं कुछ लोगों के लिए उपयोगी होती हैं। मेरे पास होलिस्टिक (संपूर्ण) क्षेत्र में अच्छे चिकित्सकों का एक स्थानीय तंत्र मौजूद है और जब मुझे ग्राहकों के लिए पोषण संबंधी जानकारी की आवश्यकता दिखती है तो मैं उन्हें इनके पास भेज देती हूं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां आपको अपना रास्ता स्वयं खोजना होगा या किसी विशेषज्ञ के पास जाना होगा, जो आपका परीक्षण कर सकता है।
पोषण पर बहुत-सी पुस्तकें ऐसे लोगों द्वारा लिखी गई हैं, जो काफी बीमार थे और उन्होंने अपने उपचार के लिए एक व्यवस्था तैयार की। फिर उन्होंने अपने तरीकों के बारे में और लोगों को बताने के लिए एक पुस्तक लिखी। हर कोई हालांकि एक जैसा नहीं होता।
जैसे-माइक्रोबायोटिक (जैविक प्रक्रिया से तैयार भोजन पदार्थ) और प्राकृतिक कच्चे खाद्य पदार्थो के आहार दो बिल्कुल भिन्न दृष्टिकोण हैं। कच्चा भोजन खानेवाले लोग कभी किसी पदार्थ को पकाते नहीं हैं, कभी-कभार ही ब्रेड या अनाज खाते हैं और इस बात का ध्यान रखते हैं कि एक ही समय पर फल और सब्जी न खाएं। और वे कभी नमक का इस्तेमाल नहीं करते। माइक्रोबायोटिक लोग लगभग सारा भोजन पकाते हैं, खाद्य पदार्थो को मिश्रित करने के भिन्न तरीके इस्तेमाल करते हैं और काफी नमक इस्तेमाल करते हैं। ये दोनों विधियां कारगर हैं। दोनों शरीर को स्वस्थ बनाती हैं। लेकिन इनमें से कोई भी विधि, सभी के लिए ठीक नहीं है।
पोषण के संबंध में मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण सरल हैं। यदि वह बढ़ता है तो उसे खाओ। यदि वह नहीं बढ़ता तो मत खाओ।
अपने भोजन के बारे में सतर्क रहो। यह अपने विचारों पर ध्यान देने के समान है। हम अपने शरीर पर और जब हम भिन्न तरीकों से खाते हैं तो हमें शरीर से जो संकेत मिलते हैं, उन पर ध्यान देना भी सीख सकते हैं।
जीवन भर नकारात्मक मानसिक विचारों में लिप्त रहने के बाद अपने मन-मस्तिष्क की सफाई करना ऐसा ही है, मानो जीवन जीवन भर जंक फूड करने के बाद पौष्टिक भोजन लेने की शुरुआत करना। ये दोनों ही बीमारियों के उपचार में समस्याएं पैदा कर सकते हैं। जब आप अपना शारीरिक आहार बदलना शुरू करते हैं, और जब ऐसा होता है तो आप एक-दो दिन के लिए स्वयं में सड़न-सी महसूस कर सकते हैं। ऐसा ही होता है जब आप अपनी मानसिक विचार-प्रक्रियाओं को बदलने का निर्णय लेते हैं, आपको कुछ समय के लिए परिस्थितियां बदतर महसूस होंगी।
एक पल के लिए किसी धन्यवादी (थैंक्सगिविंग) रात्रिभोज के अंत को याद कीजिए। भोजन समाप्त हो चुका है और अब बर्तन को साफ करने का समय है। बरतन पूरी तरह जला हुआ और पपड़ीदार है, इसलिए आप उसमें गरम पानी व साबुन डालते हैं और उसमें कुछ समय के लिए डूबा रहने देते हैं। फिर आप उस बर्तन को रगड़ना शुरू करते हैं।
यही स्थिति सूखे हुए पपड़ीदार मानसिक विचारों के साथ होती है। जब हम उसे नए विचारों में डुबाते हैं तो सारी गंदगी ऊपर आ जाती है और दिखने लगती है। बस नए विचारों पर दृढ़ रहें तो जल्द ही आप पुराने संकुचित विचार को पूरी तरह साफ कर देंगे।
अभ्यास : बदलने की इच्छा। तो हमने फैसला किया है कि हम बदलने के इच्छुक हैं और हम किसी भी या उन सभी विधियों को अपनाएंगे, जो हमारे लिए उपयोगी होंगी। आइए, मैं एक विधि के बारे में बताती हूं, जो कि मैं अपने लिए और दूसरों के लिए इस्तेमाल करती हूं। पहला-दर्पण में अपना चेहरा देखिए और अपने आपसे कहें, 'मैं बदलना चाहता हूं।'
ध्यान दें कि आप कैसा महसूस करते हैं। यदि आप हिचकिचाहट या अनिच्छुक महसूस करते हैं या परिवर्तन नहीं चाहते हैं तो खुद से उसका कारण पूछिए। आप किस पुराने विचार पर अड़े हूए हैं? कृपया अपने आप को फटकरारें नहीं। सिर्फ ध्यान दीजिए कि वह क्या हैं। मैं शर्त लगा सकती हूं कि वह विचार या विश्वास आपके लिए बहुत सी समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। मैं हैरान हूं कि वह कहां से आया। क्या आप जानते हैं?
चाहे हम यह जानते हैं या नहीं कि वह कहां से आया, चलिए, उसे अभी खत्म करने के लिए कुछ करें। फिर दर्पण से सामने जाएं और अपनी आंखों में गहराई से देखें, अपने कंठ को स्पर्श करें और दस बार जोर-जोर से कहें, 'मैं हर प्रतिरोध को छोड़ना चाहता हूं।'
दर्पण कार्य बहुत सशक्त होता है। एक बच्चे के रूप में हमने अपने अधिकांश नकारात्मक विचार दूसरों द्वारा अपनी आंखों में देखते हुए या शायद हम पर उंगली उठाते हुए ग्रहण किए हैं। आज हम जब भी दर्पण में देखते हैं, हममें से अधिकतर अपने आपसे कुछ नकारातमक चीजें कहेंगे। हम किसी भी बात के लिए अपनी आलोचना करते हैं या अपना कम मूल्यांकन करते हैं। सीधे अपनी आंखों में देखना और अपने बारे में एक सकारात्मक घोषणा करना मेरी राय में, दृढ़ निश्चय सहित एक मजबूत समाधान का सबसे तेज तरीका है।
(प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'यू कैन हील योर लाइफ' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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