भारत में ताजे पानी की मछलियों को खतरा

Fish in water
नागोया (जापान), 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के सहायक सचिव और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के कार्यकारी निदेशक एकहिम स्टीनर ने कहा है कि भारत सहित दुनिया भर के देशों को ताजे पानी में पाई जाने वाली मछलियों के अस्तित्व को लेकर सचेत हो जाना चाहिए क्योंकि इनकी संख्या बड़ी तेजी से गिर रही है।

दुनिया भर के मछुआरे और रोजगार संबंधी नीतिनिर्धारक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि मछलियों से बहुतेरे समुद्री गढ़ों से मछलियां गायब हो चुकी हैं और अब यह खतरा भारत सहित दुनिया भर की ताजे पानी की मछलियों पर भी मंडराने लगा है।

स्टीनर ने कहा, "एक रिपोर्ट के माध्यम से यह बात सामने आई है कि स्वच्छ जल में रहने वाली मछलियों के अस्तित्व को गंभीर रूप से नजरअंदाज किया जा रहा है। समुद्री मछलियों की संख्या जहां तेजी से घट रही है वहीं स्वच्छ जल में रहने वाली मछलियों के विकास की दिशा में भी सकारात्मक काम नहीं हो रहा है।"

भारत में स्वच्छ जल की मछलियां पकड़ने के काम में 55 लाख लोग रोजगार पाते हैं। भारत, चीन, बांग्लादेश और म्यांमार स्वच्छ जल की मछलियों के सबसे बड़े उत्पादक हैं। आधिकारिक तौर पर दुनिया भर में प्रतिवर्ष 50 लाख टन स्वच्छ जल की मछलियों का उत्पादन होता है।

यूएनईपी और विश्व मछली केंद्र ने खानपान में स्वच्छ जल की मछलियों के महत्व को उजागर किया है। यह बच्चों के लिए खासतौर पर फायदेमंद रहता है क्योंकि यह प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत होता है।

खानपान के अलावा मछलियां पर्यावरण को साफ रखने में काफी मददगार साबित होती हैं। ये जल में पाई जाने वाली सड़ी-गली चीजों को खाकर उसे साफ बनाए रखती हैं। इनमें बड़ी संख्या में पौधे, कीड़े, दूसरी तरह की मछलियां और प्लैंकटॉन नाम के एक खास पौधा शामिल है। इससे नदी और तालाबों के जीवन चक्र में स्थायित्व बना रहता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+