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'लेकिन' शब्द का उठाइए फायदा

सरश्री तेजपारखी

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। अस्पताल में गंभीर मरीजों को दूसरों से अलग रखा जाता है, क्योंकि पहले उन मरीजों को स्वस्थ करना जरूरी होता है, जो गंभीर हैं।

अस्पताल की भूमिका होती है कि जो नकारात्मक हैं, उन्हें पहले सकारात्मक प्लस (+) करें। अस्पताल में प्लस की साइन होती है। मरीज प्लस यानी सकारात्मक। स्वस्थ हो जाएंगे तो उनके चेहरे पर रौनक आ जाएगी। इसलिए प्लस करने के लिए, उनका इलाज किया जाता है।

'लेकिन' शब्द का प्रयोग करें : इसी मन को जो अविश्वास करता है, हमें निमित्त बनाना है। इसके लिए सबसे पहले उसे सकारात्मक विचारक (प्लस माइंडेड) बनाना होगा। सकारात्मक विचार मन को 'नमन' करने के लिए रास्ता बनाएंगे। मन को 'नमन' होने के लिए आपको कुछ कदम उठाने पड़ेंगे।

'मन' न-मन कैसे होगा? बीच-बीच में मन की अलग-अलग स्थितियां होंगी। ऐसी स्थिति में मन में नकारात्मक विचार आने पर आपको कहना है, 'नकारात्मक विचार तो आ रहे हैं, मगर मुझे सकारात्मक विचार ही रखने हैं।'

मन में नकारात्मक पंक्ति आई तो तुरंत उसे सकारात्मक पंक्ति में बदलें। आपके मन में इस तरह की नकारात्मक पंक्ति आ सकती है कि 'मैं बीमार हूं', 'मैं यह काम नहीं कर सकता हूं', 'यह पढ़ाई बहुत कठिन है' इत्यादि। जब भी आपको ऐसे नकारात्मक विचार आए तो उसके साथ 'लेकिन' शब्द जोड़ें। जैसे ही नकारात्मक विचार आए कि 'यह काम बहुत कठिन है' तब वहां 'लेकिन' शब्द जोड़ें। लेकिन शब्द के बाद अगली पंक्ति सकारात्मक ही जुड़ेगी। जैसे 'यह काम बहुत कठिन है, लेकिन ईश्वर की सहायता से यह कार्य संभव है।' 'मेरे लिए यह कठिन होगा लेकिन मैं और ईश्वर दोनों मिलकर करेंगे तो यह कार्य जरूर पूरा होगा।' क्योंकि अकेले इंसान के लिए वह कार्य कठिन हो सकता है पर आप अकेले कहां हैं? आपके साथ विश्वास तथा विश्वदाता की शक्ति है!

इस तरह आप आपने लिए यह सोचें कि 'लेकिन' शब्द जोड़ने के बाद वह ऐसा कौन सा वाक्य जोड़ें, ताकि उसे सकारात्मक शक्ति महसूस हो। जैसे आपने जब कहा, 'ईश्वर और मैं एक बड़ी आर्मी (सेना) के समान हैं, दुनिया में इससे बड़ी टीम हो ही नहीं सकती, इस टीम से विश्व की हर जंग जीती जा सकती है।' तब आप अपने आप में सकारात्मक शक्ति महसूस करेंगे।

सुबह से लेकर रात तक आपके मन में अनेक नकारात्मक विचार आ सकते हैं। जैसे 'मैं यह वस्तु नहीं खरीद पाऊंगा, क्योंकि यह बहुत महंगी है।' इस तरह के नकारात्मक विचार के साथ हमेशा 'लेकिन' शब्द जोड़ें और कहें कि 'मैं यह वस्तु अभी नहीं खरीद पाऊंगा, लेकिन यदि मैं चाहूं तो थोड़े ही समय में पैसे की व्यवस्था कर सकता हूं।'

जब मन में रोग के कारण विचार बार-बार उठे कि 'मैं बीमार हूं, मैं बीमार हूं' तब आप 'लेकिन' शब्द का इस्तेमाल इस तरह करें, 'मैं बीमार हूं, लेकिन स्वास्थ्य मेरे अंदर ही है। सिर्फ उसे प्रकट करना है।'

यदि आपके मन में यह पंक्ति आए कि 'मुझे बहुत बुरा लग रहा है, मैं बहुत परेशानी महसूस कर रहा हूं' तो इस वाक्य के बाद तुरंत कहें, 'लेकिन मैं इसे बदल सकता हूं।' यदि आपको बहुत बुरा अनुभव हो रहा हो तो कहें कि 'लेकिन' मैं इसका रूपांतरण (ट्रांसफर) कर सकता हूं, इसकी ट्रान्सफॉर्मेशन हो सकती है। इस तरह अगर आप अपना थोड़ा-सा दृष्टिकोण बदलें तो आप सदा बहुत अच्छा महसूस कर सकते हैं।

'लेकिन' शब्द जोड़ने के बाद आपको पता चलेगा कि 'लेकिन' शब्द के बाद सकारात्मक वाक्य ही जुड़ता है। लेकिन शब्द जोड़ने के बाद नकारात्मक वाक्य जुड़ता ही नहीं। पहला वाक्य अगर नकारात्मक है तो बाद में सकारात्मक वाक्य ही जुड़ेगा। पहला वाक्य अगर सकारात्मक है तो उसके साथ आपको 'लेकिन' शब्द इस्तेमाल नहीं करना है।

यह बात ध्यान में रखें कि सिर्फ नकारात्मक विचार या वाक्य के साथ ही 'लेकिन' शब्द जोड़ना है। इसमें आपका ही फायदा है।

(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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