वार्ताकारों के 'मिशन कश्मीर' से जगी उम्मीदें

वार्ताकारों के लोगों से मिलने और उनसे बेहिचक बातचीत करने से यह संकेत मिलता है कि यह दल गत 63 वर्षो से चले आ रहे कश्मीर विवाद के हल को लेकर कितना गंभीर है। वार्ताकार दिलीप पडगांवकर, राधा कुमार और एम. एम. अंसारी इस सिलसिले में शनिवार को यहां पहुंचे। तीनों स्थानीय लोगों से वार्ता कर रहे हैं, जेलों को दौरा कर रहे हैं और नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। वार्ताकारों ने अपने मिशन कश्मीर की सफलता के लिए प्रसिद्ध हजरत बल दरगाह पर चादर भी चढ़ाई।
ज्ञात हो कि वार्ताकारों का नेतृत्व कर रहे पडगांवकर ने कश्मीर समस्या को 'विवाद' कहकर राजनीतिक दलों को बोलने का मौका दे दिया है। वरिष्ठ पत्रकार रियाज मसरूर ने आईएएनएस को बताया, "पडगांवकर द्वारा कश्मीर समस्या को विवाद बताया जाना केंद्र सरकार व राष्ट्रीय नेताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले सामान्य संदर्भो से न सिर्फ जुदा है बल्कि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी से मिलता जुलता है।"
उन्होंने कहा कि पडगांवकर का यह कहना कि इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए पाकिस्तान को साथ लेकर चलना जरूरी है, संकेत करता है कि वार्ताकारों ने इस समस्या को अंतर्राष्ट्रीय दिशा देना स्वीकार कर लिया है।
ज्ञात हो कि गिलानी ने जम्मू एवं कश्मीर पर वार्ता के लिए केंद्र सरकार के समक्ष जो पांच सूत्रीय मांगें रखी थी उसमें सबसे पहला यही था कि भारत को कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय विवाद स्वीकार कर लेना चाहिए। यहां के एक स्थानीय कॉलेज के प्रोफेसर मुजफ्फर अहमद का मानना है, "समय आ गया है कि कश्मीर को विवाद के रूप में स्वीकार कर लिया जाए और बगैर वक्त जाया किए इसके समाधान करना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "यदि वार्ताकारों का मिशन असफल रहता है तो इसके समाधान की उम्मीदें हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी।"












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