सबसे जरूरी मन की सफाई

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। यह सही है कि हमने कुछ समझ लिया है और हमारे विचार में जो असली समस्या थी, उससे हम आगे बढ़ गए हैं। हम महसूस करते हैं कि हम उतने बेहतर नहीं हैं और हम अपने आपसे प्रेम नहीं करते। मैं जीवन के प्रति जो दृष्टिकोण रखती हूं, यदि उसमें कोई समस्या है तो यह सच है। इसलिए चलिए, देखते हैं कि यह विचार आया कहां से।

एक छोटा शिशु जो अपने आप में और जीवन के प्रति संपूर्ण होता है, हम ऐसे व्यक्ति कैसे बन जाते हैं, जो समस्याओं से घिरा होता है और किसी न-किसी रूप में अपने आपको तुच्छ व प्रेम के अयोग्य समझता है? जो लोग पहले ही खुद से प्रेम करते हैं, वे आगे भी खुद से कुछ अधिक प्रेम कर सकते हैं।

गुलाब के बारे में सोचिए, जो पहले एक छोटी-सी कली होती है। वह पूर्ण विकसित होकर फूल बनता है और अंतिम पंखुड़ी गिरने तक हमेशा खूबसूरत, हमेशा संपूर्ण रहता है। हम अपनी समझ, जागरूकता और ज्ञान के साथ श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं। जैसे-जैसे हम और अधिक समझ विकसित कर लेंगे, जागरूक होंगे और ज्ञान प्राप्त कर लेंगे तो हम अपने कार्यो को कुछ अलग प्रकार से करने लगेंगे।

मानसिक शुद्धीकरण : अब अपने अतीत के बारे में थोड़ा और परखने कर जरूरत है, ताकि हम उन सभी विश्वास पर नजर डाल सकें, जो हमें चला रहे हैं। कुछ लोगों को सफाई प्रक्रिया का यह हिस्सा बहुत पीड़ादायक लगता है, लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं। सफाई करने से पहले हमें देखना चाहिए कि अतीत में क्या है?

यदि आप किसी कमरे को अच्छी तरह साफ करना चाहते हैं तो आप उसमें मौजूद हर चीज को उठा-उठाकर देखेंगे। कुछ चीजों को आप प्यार से देखेंगे और उसकी सफाई करके तथा चमकाकर उसे एक नया और सुंदर बनाएंगे। कुछ चीजों को फिर से नया रूप देने या मरम्मत की जरूरत होगी और आप उन्हें ध्यान में रख लेंगे।

कुछ चीजें दोबारा कभी आपके काम नहीं आएंगी और उन चीजों को हटाना जरूरी हो जाता है। पुरानी पत्रिकाओं और अखबारों तथा गंदे पेपर प्लेटों को निश्चित होकर कचरे के डिब्बे में डाला जा सकता है। एक कमरे की सफाई करने में क्रोधित होने की कोई जरूरत नहीं है।

बिल्कुल इसी तरह अपने मन-मस्तिष्क के घर की सफाई करनी है। इसलिए क्रोधित होने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि अविश्वास को उतनी ही आसानी से जाने दें, जितनी आसानी से आप भोजन करने के बाद बचे हुए टुकड़ों को कूड़ेदान में फेंक देते हैं। क्या आप आज का भोजन तैयार करने के लिए पिछले दिन के कूड़ेदान में हाथ डालेंगे? क्या आप आने वाले कल के अनुभव तैयार करने के लिए पुराने मानसिक कूड़े को कुरेदते हैं?

अगर कोई विचार या विश्वास आपके काम नहीं आता तो उसे जाने दें। ऐसा कोई कानून नहीं है कि आप जिस बात पर विश्वास करते थे, उस पर हमेशा के लिए विश्वास बनाए रखना जरूरी है। आपके लिए कुछ संकुचित विचारों पर नजर डालते हैं और देखते हैं कि वे आते कहां से हैं?

विचार : 'मैं उतना अच्छा नहीं हूं।' स्रोत : बार-बार उसके पिता ने कहा कि वह मूर्ख है। उसने कहा कि वह एक सफल व्यक्ति बनना चाहता था, ताकि उसके पिता को उस पर गर्व हो। लेकिन वह अपराध-बोध की भावना से भरा हुआ था, जिसने उसके अंदर-असंतोष उत्पन्न किया और उसके कारण उसे एक के बाद एक विफलता मिली। पिता ने उसके लिए कई व्यवसायों के लिए पैसा लगाया, लेकिन वे सब असफल हो गए। उसने बदला लेने के लिए विफलताओं का इस्तेमाल किया। उसने अपने पिता को बार-बार पैसे देने के लिए मजबूर किया। निश्चित रूप से वह एक असफल व्यक्ति था।

विचार : अपने आप से प्रेम की कमी। स्रोत : वह पिता की स्वीकृति पाने की कोशिश कर रही थी। वह अपने पिता की तरह बिल्कुल नहीं बनना चाहती थी, क्योंकि वे किसी भी मुद्दे पर सहमत नहीं होते थे और उनके बीच हमेशा बहस होती थी। वह सिर्फ अपने पिता की स्वीकृति चाहती थी, लेकिन उसकी बजाय उसे सिर्फ आलोचना मिली। उसके शरीर में पीड़ा भरी हुई थी। उसके पिता के शरीर में भी उसी प्रकार की पीड़ा थी। वह समझ नहीं पा रही थी कि उसका रोष उसके दर्द की वजह है, जिस प्रकार उसके पिता का गुस्सा उनके शरीर में दर्द उत्पन्न कर रहा था।

(प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'यू कैन हील योर लाइफ' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+