अविश्वास लाता है दुख
सरश्री तेजपारखी
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुख की वजह से इंसान के अंदर विश्वास डोलता रहता है और सफलता से उसकी दूरी बढ़ती जाती है। वरना स्वयं में विश्वास महसूस करना कठिन नहीं है। सिर्फ पूर्ण ज्ञान न होने की वजह से इंसान के अंदर विश्वास दबा हुआ रहता है और कभी-कभी ही प्रकट होता है।
विश्वास की आवश्यकता आज हर इंसान को इसलिए है, क्योंकि यह अपने अंदर जाने का मार्ग तैयार करता है, 'न-मन' होने का मार्ग तैयार करता है। हमारा यही मन बाहर भी जा रहा है और अंदर भी आ रहा है। जिस पाइप से पानी बाहर जा रहा है, उसी पाइप से पानी अंदर भी आ सकता है। पानी के अंदर या बाहर जाने के लिए पाइप तो एक ही है। जिस तरह मन से विश्वास अंदर जाता है, उसी तरह मन से वह बाहर भी आ सकता है।
'विश्वास' एक ऐसी चीज है जो मन से हमारे शरीर द्वारा बाहर झांक रहा है। हर इंसान वही विश्वास प्रकट करना और खोलना चाहता है। थोड़ा भी विश्वास खुला तो हमें आनंद आता है, हमें अपने जीवन में चमत्कार दिखाई देते हैं। कोई घटना होने के बाद हम कई बार लोगों को ऐसी पंक्तियां कहते हुए सुनते हैं कि 'मुझे पक्का विश्वास था कि यह होनेवाला है, मुझे मालूम था।' यह विश्वास उन्हें कैसे था? इसका अर्थ है कि उनमें विश्वास तो जागा था, पर कहीं उनके मन में थोड़ा सा संदेह था, इसलिए वे यह बात किसी को बता नहीं पाए थे। संदेह विश्वास का वह दुश्मन है, जो दोस्ती की नकाब में अपने दोस्त का धीरे-धीरे खात्मा करता है।
हर एक के अंदर विश्वास है, प्रकट भी हो रहा है मगर कुछ जगहों पर ही प्रकट हो पा रहा है। थोड़ा विश्वास प्रकट होने से भी कितना आनंद आता है। जब भी आप यह पंक्ति कहते हैं कि 'अरे! मुझे पक्का मालूम था ऐसा ही होनेवाला है' तब आपको अपने अंदर से कितना आनंद मिलता है, कितना अच्छा लगता है।
यदि आप यह सर्वेक्षण करके देखें, हर एक से पूछें कि 'क्या आप में विश्वास है?' तो विश्व का एक भी इंसान यह नहीं कहेगा कि मुझे विश्वास नहीं है, सभी में विश्वास है। किसी को ईश्वर के होने में विश्वास है तो किसी को उसके न होने में विश्वास है। विश्वास तो दोनों में है और दोनों का उसका फल मिल रहा है। जो जैसा विश्वास रखता है, उसे वैसा फल मिलता है। यदि आप यह विश्वास रखते हैं कि कोई काम आप कर सकते हैं या वह काम आप नहीं कर सकते तो दोनों अवस्थाओं में आपके अपने विश्वास अनुसार फल मिलता है। विश्वास रखनेवाला बाधाओं के बावजूद भी देर सवेर अपना काम पूरा करता है। विश्वास न रखनेवाला छोटी बाधा से भी काम को रोक सकता है।
विश्वास सभी के अंदर है पर उसे प्रकट होने का मौका नहीं मिलता है। विश्वास प्रकट होगा तो उसके परिणाम आएंगे। आप अपने आपसे पूछें कि 'आपके अंदर कितना प्रतिशत विश्वास प्रकट हुआ है? कितना प्रतिशत खुला है?' अगर खुला है तो आपके जीवन में चमत्कार चल रहा है। नहीं खुला है तो समझें कि अभी उसके खुलने के लिए कुछ काम होना बाकी है। विश्वास इंसान की सबसे बड़ी ताकत है। पूरे विश्व में कहीं पर जो भी चमत्कार हो रहे हैं, वह विश्वास की शक्ति की वजह से ही हो रहे हैं। हर एक के अंदर विश्वास है परंतु का वह विश्वास उसे आत्मसाक्षात्कार दिलाएगा, तेज सफलता दिलवाएगा यह वह लक्ष्य देगा, जो करने के लिए वह पृथ्वी पर आया है?
विश्वास सभी में है और सभी में कुछ न कुछ मात्रा में प्रकट हो रहा है, फिर वह बल, कुर्सी या पैसे की वजह से ही क्यों न हो।
पांच प्रकार के विश्वास की परिभाषा की जा सकती है। जिसके द्वारा आपको बाहर के जगत में किस आधार पर लोगों का विश्वास होता है, यह ज्ञात होगा।
1. बल से प्रकट हुआ विश्वास : कुछ विश्वास बल, शारीरिक ताकत की वजह से इंसान में आता है। एक इंसान जब कराटे सीखकर आता है तब उसमें से कुछ झांक रहा होता है। उसे एक विश्वास महसूस होता है कि 'कोई अब मुझ पर आक्रमण करे तब उसे मैं देख लूंगा' उसे अपने बल व हुनर पर विश्वास होने लगता है।
हठ योगी और सिद्धियां प्राप्त करनेवाले में भी इस वजह से विश्वास होता है कि 'मेरे पास फलां-फलां सिद्धि और ज्ञान है। अगर कोई गुस्सा दिलाएगा तो उसे मैं भस्म कर सकता हूं।' उसे सांप के काटने का भी डर नहीं होता है, क्योंकि उसके पास सिद्धि का मंत्र होता है। ऐसा इंसान जंगल में भी बिना डरे, निडर होकर चलता है। यह अवस्था अपने अंदर लाने के लिए उसने तप द्वारा आत्मविश्वास प्राप्त किया होता है।
2. निरीक्षण से आया हुआ विश्वास : जब कई लोग एक्शन फिल्म देखकर आते हैं, तब थोड़ी देर के लिए वे बड़े विश्वास से चलते हैं, क्योंकि उन्होंने फिल्म के हीरो को बारीकी से देखा होता है, उसका निरीक्षण किया होता है। जिस कारण थोड़ी देर के लिए क्यों न हो, मगर उन्हें लगता है कि उनमें बहुत विश्वास आ गया है। वे भी उस हीरो की तरह नकल करने लगते हैं, आत्मविश्वास से चलने लगते हैं।
3. नाम, शोहरत से आया हुआ विश्वास : एक इंसान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में एक वर्ल्ड रिकार्ड बनाता है। वह कुछ ऐसे करतब कर दिखाता है, जो बाकी लोग नहीं कर पाते। हजारों लोग उसे देखने आते हैं। उस वक्त वह बहुत विश्वास से चलता है। चारों तरफ उसकी वाह-वाह होती है, उसका नाम होता है। यह विश्वास नाम और शोहरत की वजह से आया हुआ विश्वास है।
4. पैसे से आया हुआ विश्वास : कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनका विश्वास उनके पैसों पर टिका होता है। यदि किसी की लॉटरी लगी हो और वह मैच देखने गया हो तो उसे यही विचार आएगा कि 'मैच फिक्स करवा दूं' क्योंकि उसका पूरा विश्वास उसके पैसे पर टिका हुआ है। जब से उसकी लॉटरी लगी है तब से वह विश्वास से चलता, वरना उसके पहले तो उसे ऐसे विचार भी नहीं आते थे। उसका विश्वास उसे घमंडी या कंजूस बना सकता है। इसलिए पैसे को सही दिशा मिलना आवश्यक है।
5. कुर्सी से आया हुआ विश्वास : इंसान जब चुनाव जीतकर आता है तब उसे भी विश्वास आता है, भले ही फिर उसमें वह विश्वास पांच साल के लिए ही क्यों न आया हो। जिसके पास कुर्सी, राजनीतिक शक्ति है, वह इंसान सोचेगा, 'अंडरवर्ल्ड से संपर्क करें.. किसी को धमकी दिलवाएं, किसी को डराएं, किसी ने कुछ किया तो उसे खत्म करवा दें' इत्यादि। कुर्सी की शक्ति उसके अंदर उछल रही होती है, मगर उसे यह नहीं पता कि ऐसा विश्वास उसे और बदतर ही बनाता जाएगा, उसका विश्वासघात ही करता जाएगा।
ये पांचों तरह के विश्वास किसी न किसी घटनाओं पर आधारित हैं। इस तरह का विश्वास केवल 'फिक्सिंग' ही करवा सकता है।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**


Click it and Unblock the Notifications