क़साब की याचिका पर सुनवाई आज से

गत मई में एक विशेष अदालत ने विभिन्न आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद क़साब को मौत की सज़ा सुनाई थी. क़साब ने इस सज़ा को चुनौती दी है. हालांकि हाईकोर्ट ने क़साब की यह अर्ज़ी नामंज़ूर कर दी है कि इस सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से या फिर जेल प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी मौजूद न रहें.
जब हाईकोर्ट में सुनवाई शुरु होगी तो क़साब ख़ुद अदालत में मौजूद नहीं रहेंगे बल्कि वे वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए इस मुक़दमे में भाग लेंगे. क़साब को अदालत में न लाने का फ़ैसला सुरक्षा की वजह लिया गया है. माना जा रहा है कि यह सुनवाई तीन महीनों में पूरी हो जाएगी.
इसके दौरान वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक पीठ विशेष अदालत में क़साब के ख़िलाफ़ पेश किए गए सबूतों को फिर से परखेगा. लेकिन हाईकोर्ट में हो रही सुनवाई क़साब का अंतिम क़ानूनी अधिकार नहीं है. यदि हाईकोर्ट में भी अजमल क़साब की हार होती है तो उसे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार होगा और इसके बाद राष्ट्रपति के सामने सज़ा माफ़ करने अपील भी की जा सकती है.
उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2008 में क़सब सहित दस लोगों ने भारत की व्यावसायिक राजधानी में अंधाधुँध गोलियाँ बरसाई थीं और हथगोले फेंके थे. इसमें कम से कम 170 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे.












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